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'''लू शुन (鲁迅, Lǔ Xùn, 1881–1936)'''
 
'''लू शुन (鲁迅, Lǔ Xùn, 1881–1936)'''
  
चीनी से हिंदी में अनुवाद।
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चीनी से हिंदी में अनुवाद। मूल: अ. फ़ादेयेव (法捷耶夫), ''विनाश'' (毁灭), लू शुन द्वारा चीनी में अनूदित।
  
 
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धुएँ से कमरा नीला-धूसर और दमघोंटू। बेंचें अपर्याप्त। किसान और छापामार मिले-जुले, गलियारे में ठुँसे, दरवाज़े पर सिकुड़े, लेविन्सन (莱奋生) की गर्दन पर साँस लेते।
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मोरोश्का (木罗式加) ने दरवाज़े तक रास्ता बनाया, उदास और क्रूर चेहरा, तूपोव (图皤夫) के बगल में खड़ा।
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लेविन्सन का दस्ता पाँच सप्ताह से निष्क्रिय, उसी स्थान पर। घोड़े, गाड़ियाँ, रसद बढ़ गई। लोग अधिक सोते, प्रहरी तक। चिंताजनक सूचनाएँ उस आलसी शरीर को न हिला पाईं।
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स्तेत्सिन्स्की (斯捷兹因斯基) के अतिरिक्त कोई लेविन्सन की दुविधा न जानता। किसी से विचार साझा नहीं, केवल "हाँ" या "नहीं"। सबके सामने विशेष रूप से सही दिखता, विशेषकर युवा बक्रानोव (巴克拉诺夫) को, जो हर बात में नक़ल करता।
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जब से कमांडर चुना गया, कोई उसे अन्य भूमिका में कल्पना न कर सके। यदि बताता कि बचपन में पिता को पुरानी पोशाकें बेचने में सहायता करता, पिता चूहों से डरता और बुरा वायलिन बजाता — सब मज़ाक़ समझते। किंतु लेविन्सन ऐसा कभी बताता नहीं।
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(1927–1929। लू शुन का अनुवाद।)
  
 
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विनाश [अनुवाद] (毁灭)

लू शुन (鲁迅, Lǔ Xùn, 1881–1936)

चीनी से हिंदी में अनुवाद। मूल: अ. फ़ादेयेव (法捷耶夫), विनाश (毁灭), लू शुन द्वारा चीनी में अनूदित।


अध्याय छह: खदान के लोग

धुएँ से कमरा नीला-धूसर और दमघोंटू। बेंचें अपर्याप्त। किसान और छापामार मिले-जुले, गलियारे में ठुँसे, दरवाज़े पर सिकुड़े, लेविन्सन (莱奋生) की गर्दन पर साँस लेते।

"शुरू करें, योसिफ़ अब्रामोविच (约瑟夫·亚伯拉弥支)," ल्यूबोव (略勃支) ने असंतुष्ट भाव से कहा।

मोरोश्का (木罗式加) ने दरवाज़े तक रास्ता बनाया, उदास और क्रूर चेहरा, तूपोव (图皤夫) के बगल में खड़ा।

लेविन्सन ने गंभीरता से बताया कि किसानों को काम से नहीं निकालता यदि यह मामला दोनों से संबंधित न होता।

"जैसा सब तय करें," उन्होंने भारी स्वर में समाप्त किया। बेंच पर धीरे बैठे, मुड़े, और अचानक छोटे, महत्वहीन में बदल गए — सभा को अँधेरे में छोड़ा, स्वयं दीपक की बत्ती-सी मद्धम।

पहले अनेक एक साथ बोले, अव्यवस्थित। फिर सभा जीवंत। कई मिनट एक वाक्य स्पष्ट नहीं। बोलने वाले अधिकांश किसान; छापामार शांत।

"ऐसे भी ठीक नहीं," बूढ़ा ओस्ताफ़ेई (遏斯泰菲) ने गंभीरता से कहा, काई जैसे श्वेत बालों वाला। "पहले, निकोलस (米古拉式加) के समय में, ऐसा करने वाले को गली-गली पीटते, चुराई चीज़ गले में लटकाते, बर्तन बजाते..."

"छोड़ो निकोलस! वो ज़माना गया!" कूबड़ वाले काने ने चिल्लाया।

"लेकिन ग़लत तो ग़लत," बूढ़ा अड़ा। "इसी मिट्टी से सबका पेट भरता। चोर पालना काम नहीं।"

"कौन चोर पालता? यह जवान छह साल लड़ा... एक खरबूज़े के लिए बेकार?"

किसानों में कटुता नहीं। अधिकांश सहमत: पुराने नियम नहीं चलेंगे।

लेविन्सन खड़ा हुआ, मेज़ पर हाथ मारा। "साथियो, बारी-बारी बोलें। मोरोश्का, यहाँ आओ।"

मोरोश्का सिर झुकाए मेज़ की ओर चला। भारी पसीना, हाथ काँपते। सैकड़ों दृष्टियाँ।

"बोलो!" सबने प्रोत्साहित किया।

"हाँ, मैंने... किया..." धीमे स्वर, शब्द नहीं मिलते। "वो खरबूज़े... अगर पता होता... बुरी नीयत से नहीं... बच्चे ऐसे ही हैं... और तूपोव कहता है, मैं सब साथियों के लिए..." अचानक सीने में कुछ फटा; आगे झुका, आँखों से गर्म प्रकाश... "साथियों के लिए ख़ून की आख़िरी बूँद! ऐसे... और बदनाम भी?... कैसे?!..."

"कैसे सज़ा दूँ खुद को?" दर्द से किंतु दृढ़। "केवल क़सम — खनिक की क़सम — जो टूटती नहीं..."

"नहीं निभाई तो?" लेविन्सन ने पूछा।

"तो... गोली मार दो..."

"ठीक, तेरी जान!" तूपोव ने कहा, आँखों में स्नेह की चमक।

"ख़त्म!" भीड़ चिल्लाई।

"रुको," लेविन्सन ने शांत हाथ उठाया। "यह मामला तय। अब दूसरा..."

"और क्या?!"

"प्रस्ताव: सैन्य सेवा से बाहर के समय में, आवारा कुत्तों का पीछा छोड़ो, किसानों की सहायता करो।"

"चलो! हाथ घिसेंगे नहीं!" किसानों ने मान लिया।

"सभा समाप्त!" छापामारों ने शोर मचाया। "कितनी बकवास! और भूख — आँतें लोहे-सी ऐंठ रही हैं!"


अध्याय सात: लेविन्सन

लेविन्सन का दस्ता पाँच सप्ताह से निष्क्रिय, उसी स्थान पर। घोड़े, गाड़ियाँ, रसद बढ़ गई। लोग अधिक सोते, प्रहरी तक। चिंताजनक सूचनाएँ उस आलसी शरीर को न हिला पाईं।

स्तेत्सिन्स्की (斯捷兹因斯基) के अतिरिक्त कोई लेविन्सन की दुविधा न जानता। किसी से विचार साझा नहीं, केवल "हाँ" या "नहीं"। सबके सामने विशेष रूप से सही दिखता, विशेषकर युवा बक्रानोव (巴克拉诺夫) को, जो हर बात में नक़ल करता।

जब से कमांडर चुना गया, कोई उसे अन्य भूमिका में कल्पना न कर सके। यदि बताता कि बचपन में पिता को पुरानी पोशाकें बेचने में सहायता करता, पिता चूहों से डरता और बुरा वायलिन बजाता — सब मज़ाक़ समझते। किंतु लेविन्सन ऐसा कभी बताता नहीं।


(1927–1929। लू शुन का अनुवाद।)