Difference between revisions of "Lu Xun Complete Works/hi/Yao"

From China Studies Wiki
Jump to navigation Jump to search
 
Line 1: Line 1:
 
<div style="background-color: #003399; color: white; padding: 12px 15px; margin: 0 0 20px 0; border-radius: 4px; font-size: 1.1em;">
 
<div style="background-color: #003399; color: white; padding: 12px 15px; margin: 0 0 20px 0; border-radius: 4px; font-size: 1.1em;">
<span style="font-weight: bold;">भाषा:</span> [[Lu_Xun_Complete_Works/zh/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/en/Yao|<span style="color: #FFD700;">EN</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/de/Yao|<span style="color: #FFD700;">DE</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/fr/Yao|<span style="color: #FFD700;">FR</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/es/Yao|<span style="color: #FFD700;">ES</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/it/Yao|<span style="color: #FFD700;">IT</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/ru/Yao|<span style="color: #FFD700;">RU</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/ar/Yao|<span style="color: #FFD700;">AR</span>]] · <span style="color: #FFD700; font-weight: bold;">HI</span> · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-en/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-EN</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-de/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-DE</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-fr/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-FR</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-es/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-ES</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works|<span style="color: #FFD700;">← सूची</span>]]
+
<span style="font-weight: bold;">Language:</span> [[Lu_Xun_Complete_Works/zh/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/en/Yao|<span style="color: #FFD700;">EN</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/de/Yao|<span style="color: #FFD700;">DE</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/fr/Yao|<span style="color: #FFD700;">FR</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/es/Yao|<span style="color: #FFD700;">ES</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/it/Yao|<span style="color: #FFD700;">IT</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/ru/Yao|<span style="color: #FFD700;">RU</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/ar/Yao|<span style="color: #FFD700;">AR</span>]] · <span style="color: #FFD700; font-weight: bold;">HI</span> · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-en/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-EN</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-de/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-DE</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-fr/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-FR</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-es/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-ES</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-it/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-IT</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-ru/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-RU</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-ar/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-AR</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works/zh-hi/Yao|<span style="color: #FFD700;">ZH-HI</span>]] · [[Lu_Xun_Complete_Works|<span style="color: #FFD700;">← Contents</span>]]
 
</div>
 
</div>
  

Latest revision as of 00:31, 10 April 2026

Language: ZH · EN · DE · FR · ES · IT · RU · AR · HI · ZH-EN · ZH-DE · ZH-FR · ZH-ES · ZH-IT · ZH-RU · ZH-AR · ZH-HI · ← Contents

औषधि (药)

लू शुन (鲁迅, Lǔ Xùn, 1881–1936)

चीनी से हिंदी में अनुवाद।


I

शरद रात्रि के उत्तरार्ध में, चंद्रमा अस्त हो चुका था और सूर्य अभी नहीं उगा था; केवल गहरे नीले आकाश की एक पट्टी शेष थी। रात्रिचरों के अतिरिक्त, सब कुछ सोया हुआ था। हुआ परिवार के बूढ़े शुआन अचानक उठ बैठे, माचिस जलाई, और चिकने तेल से सना दीपक प्रज्वलित किया। चाय-घर के दो कमरे हल्के नीलाभ प्रकाश से भर गए।

"छोटे शुआन के पिता, अभी जा रहे हो?" — एक वृद्ध स्त्री का स्वर। भीतरी कोठरी से खाँसी का दौरा सुनाई दिया।

"हूँ।" बूढ़े शुआन ने सुना, उत्तर दिया, और कुर्ता बंद किया। हाथ बढ़ाया: "दे दो मुझे।"

श्रीमती हुआ ने बहुत देर तक तकिये के नीचे ढूँढ़ा और चाँदी के सिक्कों का एक पुड़िया निकालकर बूढ़े शुआन को दिया। उसने काँपते हाथों से लिया, जेब में ठूँसा, और बाहर से दो बार दबाया। फिर लालटेन जलाई, दीपक बुझाया, और भीतरी कमरे में गया। कुछ सरसराहट हुई, फिर खाँसी। बूढ़े शुआन ने शांत होने की प्रतीक्षा की, फिर धीरे से पुकारा: "छोटे शुआन... उठो मत। दुकान? तुम्हारी माँ सँभाल लेगी।"

जब बेटे से और कुछ न सुनाई दिया, मान लिया कि वह सो गया। दरवाज़ा खोलकर सड़क पर निकला। सड़क घुप्प अंधेरी और सुनसान; केवल एक धूसर-श्वेत राह स्पष्ट दिखती थी। लालटेन का प्रकाश उसके दो पैरों पर पड़ता — एक क़दम के पश्चात् दूसरा। कभी-कभी कुछ कुत्ते मिले, किंतु एक ने भी नहीं भौंका। हवा भीतर से कहीं अधिक ठंडी; तथापि बूढ़े शुआन को ताज़गी अनुभव हुई, मानो अचानक जवान हो गया हो, अलौकिक शक्ति और प्राणदान की क्षमता प्राप्त कर ली हो। उसके क़दम असाधारण ऊँचे और लंबे, सड़क अधिकाधिक स्पष्ट, आकाश अधिकाधिक उज्ज्वल।

चलने में पूर्णतः तल्लीन, बूढ़ा शुआन अचानक चौंका: सामने दूर एक तिराहा स्पष्ट दिखा। कुछ क़दम पीछे हटा, बंद दरवाज़े वाली एक दुकान मिली, छज्जे के नीचे दरवाज़े से टिककर खड़ा हो गया। बहुत देर बाद ठंड लगने लगी।

"हुंह, बूढ़ा।" "ख़ुश लग रहा है..."

बूढ़ा शुआन फिर चौंका। आँखें खोलीं तो कई लोग सामने से गुज़र चुके थे। एक ने पीछे मुड़कर देखा — चेहरा स्पष्ट नहीं, किंतु दृष्टि भूखे व्यक्ति की भोजन देखने जैसी। बूढ़े शुआन ने लालटेन देखी: बुझ चुकी। जेब टटोली: कठोर गाँठ वहीं। दोनों ओर देखा — अनेक विचित्र आकृतियाँ, दो-दो, तीन-तीन, भूतों-सी भटकती।

शीघ्र ही कुछ सिपाही दिखे; वर्दी पर आगे-पीछे बड़े सफ़ेद गोले दूर से भी दिखते। पैरों की धमक, और पलक झपकते एक बड़ी भीड़ उमड़ आई, तिराहे के मुँह पर अर्धवृत्त में जम गई।

बूढ़ा शुआन भी उधर देखने लगा, किंतु केवल पीठों की दीवार; गर्दनें लंबी तनीं, मानो अदृश्य हाथ ने बत्तखों को ऊपर खींचा हो। एक क्षण का सन्नाटा, फिर कोई ध्वनि, भीड़ हिली; गर्जना के साथ पीछे हटी, बिखरती हुई बूढ़े शुआन तक पहुँची।

"ए! एक हाथ में पैसा, दूसरे में माल!" पूर्ण कृष्ण वस्त्रधारी एक पुरुष सामने खड़ा था, आँखें दो छुरियों-सी। एक बड़ा हाथ फैला; दूसरे में एक चमकीला रक्त-लाल मांतोऊ, जिससे लाल बूँदें अभी भी टपक रही थीं।

बूढ़े शुआन ने घबराकर चाँदी के सिक्के निकाले, किंतु वह वस्तु लेने का साहस नहीं हुआ। काले ने अधीर होकर चिल्लाया: "डर काहे का!" बूढ़ा हिचकिचाता रहा; काले ने लालटेन छीनी, काग़ज़ फाड़ा, मांतोऊ लपेटा, थमा दिया। चाँदी के सिक्के झपटे, पलटा, चला गया: "बूढ़ा मूर्ख..."

बूढ़े शुआन का संपूर्ण अस्तित्व उस पुड़िये पर केंद्रित हो गया; उसे ऐसे पकड़े था मानो दस पीढ़ियों बाद जन्मा इकलौता पुत्र। इस पुड़िये में छिपे नए जीवन को अपने घर में रोपकर महान सुख काटना चाहता था। सूर्य उगा; सामने चौड़ी सड़क सीधे घर तक।

II

घर पहुँचा तो दुकान साफ़-सुथरी। केवल छोटा शुआन पिछली पंक्ति में बैठा खा रहा था। माथे पर पसीने की बड़ी बूँदें, कुर्ता रीढ़ से चिपका, कंधों की हड्डियाँ उभरकर उलटा आठ। बेटे को देखकर बूढ़े की भौंहें सिकुड़ गईं। पत्नी रसोई से दौड़ी, आँखें फैलीं, होंठ काँपते: "मिल गया?" "हाँ।"

रसोई में गए, विचार-विमर्श किया। श्रीमती हुआ ने कमल-पत्ता लाकर मेज़ पर फैलाया। बूढ़े शुआन ने रक्त-लाल वस्तु सावधानी से उस पर रखी। चूल्हे पर आग जलाई, भूना; लाल रंग काला पड़ गया, विचित्र गंध कमरे में भरी।

"खा ले! बीमारी दूर हो जाएगी।"

छोटे शुआन ने काला मांतोऊ उठाया, देखता रहा। बूढ़े शुआन ने तोड़कर मुँह में डाला। बच्चा चबाता रहा, दोनों माता-पिता एकटक देखते — मानो शरीर में चमत्कार प्रवेश करने वाला हो।

III

दोपहर को ग्राहक आने लगे। मूँछों वाला कांग चाचा:

"सुना? आज सुबह फाँसी हुई!" "किसकी?" "शिया यू (夏瑜)! शिया परिवार का बेटा। क्रांतिकारी। कहता था 'यह देश हम सबका है।' आज सुबह..." "जेल में भी पागलपन! जेलर से कहता: 'तू भी ग़ुलाम!' जेलर ने दो थप्पड़ जड़े।" "अच्छा किया!" "और सुनो: सगे चाचा ने ही ख़बर दी। इनाम भी मिला!"

बूढ़ा शुआन ने सब सुना, कुछ न बोला। भीतर गया — छोटा शुआन अभी भी खाँस रहा था, पहले से और ज़ोर से।

IV

अगले वर्ष, चिंगमिंग (清明) — मृतकों को श्रद्धांजलि का दिन। दो स्त्रियाँ क़ब्रिस्तान में मिलीं।

श्रीमती हुआ अपने बेटे छोटे शुआन की समाधि पर आई — वह "औषधि" काम नहीं आई। समाधि पर राख, काग़ज़, चावल का कटोरा रखा।

थोड़ी दूर पर शिया यू की माँ खड़ी थी। उसके बेटे को — उस क्रांतिकारी को — उसी दिन फाँसी हुई जिस दिन छोटे शुआन के लिए "औषधि" ख़रीदी गई।

दो माँएँ, दो समाधियाँ — बीच में एक पगडंडी।

शिया यू की माँ ने समाधि पर लाल और सफ़ेद फूलों की माला देखी। "कौन रख गया? कोई तो है जो उसे याद करता है..."

एक कौआ उड़ा और दूर किसी पेड़ पर बैठ गया।

दोनों स्त्रियों ने एक-दूसरे को देखा — और चुपचाप अपनी-अपनी राह चल दीं।

(अप्रैल 1919)