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Revision as of 00:25, 10 April 2026
लू शुन: छत्र-तले (华盖集)
लू शुन (鲁迅, 1881-1936)
चीनी से हिंदी में अनुवाद।
| छत्र-तले | |
|---|---|
| लेखक | लू शुन (鲁迅) |
| मूल शीर्षक | 华盖集 (Huágàijí) |
| खंड | लू शुन सम्पूर्ण रचनावली, खंड 3 |
| काल | 1925–1927 |
| अनुवाद | क्लॉड / मार्टिन वोएस्लर |
प्राक्कथन
इस संग्रह का नाम "छत्र-तले" (华盖) इसलिए है क्योंकि "हुआगाई" वह ज्योतिषीय तारा है जो भिक्षुओं के लिए शुभ किंतु सामान्य लोगों के लिए दुर्भाग्यसूचक माना जाता है। लू शुन ने कहा कि उनके ऊपर हुआगाई तारा विराजमान है — वे जो भी करें, कठिनाई, बाधा, विरोध। किंतु इस दुर्भाग्य को उन्होंने शक्ति बनाया।
1925
- वसंत के अंत की विषादमय बातें (春末闲谈) — ततैये अपने शिकार के तंत्रिका-गुच्छ में डंक मारती, शिकार को मारती नहीं किंतु लकवाग्रस्त कर देती, ताकि उसके लार्वा ताज़ा माँस खा सकें। क्या शासक वर्ग भी जनता के साथ ऐसा ही नहीं करता? मारता नहीं, किंतु विचारशून्य, प्रतिरोधहीन बना देता?
- गुलाम की बात अचानक करते हुए (忽然想到) — चीनी इतिहास के दो युग: वह जब लोग स्थिर दास थे, और वह जब दास बनना चाहते थे किंतु बन भी नहीं पा रहे।
- अंधकारपूर्ण चीन का साहित्य-जगत — मुझे प्रायः "अंधकारपूर्ण" लेख लिखने का आरोप लगता है। किंतु जो समाज सत्य से भयभीत हो, वह प्रकाश को अंधकार कहेगा ही।
- साहित्य और राजनीति — साहित्यकार से सदैव अपेक्षा कि सत्ता का समर्थन करे; जो न करे, "राष्ट्रद्रोही"।
- इस बार यह (这回是) — विद्यार्थी आंदोलन पर। "जो आज विद्यार्थियों पर गोली चलाता, वह कल जनता पर चलाएगा।"
- बिना फूल का गुलाब (无花的蔷薇) — विचार-स्वतंत्रता के दमन पर।
1926 (अनुपूरक)
- एक काँटेदार उपमा (一点比喻) — "हम चीनी वर्तमान में जी रहे हैं, न अतीत में, न भविष्य में।"
- 18 मार्च की घटना: लिऊ हेझेन की स्मृति में (记念刘和珍君) — 18 मार्च 1926 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों पर सरकारी गोलीबारी; लिऊ हेझेन (刘和珍) और अन्य की हत्या।
"सत्य कहूँ तो, मैं वास्तव में नहीं जानता कि इस वर्ष 18 मार्च का रक्तपात सुधार की शक्तियों के लिए ऐसे लाभदायक होगा जैसे सुधारक कहते हैं। किंतु मैं इतना जानता हूँ कि जो शक्तियाँ दमन चाहती हैं, उन्होंने सचमुच एक अद्भुत विजय प्राप्त की है। एक विशाल अंधकार उतरा है, और मैं लगभग कुछ नहीं कह सकता।"
"मौन, मौन! मौन में यदि विस्फोट न हो, तो मौन में ही विनाश।"
- फ़ान ऐनोंग (范爱农) — मित्र फ़ान ऐनोंग की स्मृति। "वह एक विद्रोही था, किंतु विद्रोह करने का मार्ग नहीं मिला। एक उदार मनुष्य था, किंतु उदारता के लिए स्थान नहीं। अंत में, शराब पीकर नदी में गिर गया। दुर्घटना थी, या इच्छा — कोई नहीं जानता।"
(1925–1927.)