Lu Xun Complete Works/zh-hi/Huagaiji
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华盖集 — लू शुन: छत्र-तले (华盖集)
| 中文 (Chinese) | हिंदी (Hindi) |
|---|---|
| नोट / 注意: इस रचना में चीनी में 829 और हिंदी में 16 अनुच्छेद हैं। पूर्ण पाठ के लिए: 中文 और हिंदी। | |
| 华盖集 | == प्राक्कथन == |
| 题记 | इस संग्रह का नाम "छत्र-तले" (华盖) इसलिए है क्योंकि "हुआगाई" वह ज्योतिषीय तारा है जो भिक्षुओं के लिए शुभ किंतु सामान्य लोगों के लिए दुर्भाग्यसूचक माना जाता है। लू शुन ने कहा कि उनके ऊपर हुआगाई तारा विराजमान है — वे जो भी करें, कठिनाई, बाधा, विरोध। किंतु इस दुर्भाग्य को उन्होंने शक्ति बनाया। |
| ——一九二五年—— | == 1925 == |
| 咬文嚼字(一至二) | * वसंत के अंत की विषादमय बातें (春末闲谈) — ततैये अपने शिकार के तंत्रिका-गुच्छ में डंक मारती, शिकार को मारती नहीं किंतु लकवाग्रस्त कर देती, ताकि उसके लार्वा ताज़ा माँस खा सकें। क्या शासक वर्ग भी जनता के साथ ऐसा ही नहीं करता? मारता नहीं, किंतु विचारशून्य, प्रतिरोधहीन बना देता? |
| 青年必读书 | * गुलाम की बात अचानक करते हुए (忽然想到) — चीनी इतिहास के दो युग: वह जब लोग स्थिर दास थे, और वह जब दास बनना चाहते थे किंतु बन भी नहीं पा रहे। |
| 忽然想到(一至四) | * अंधकारपूर्ण चीन का साहित्य-जगत — मुझे प्रायः "अंधकारपूर्ण" लेख लिखने का आरोप लगता है। किंतु जो समाज सत्य से भयभीत हो, वह प्रकाश को अंधकार कहेगा ही। |
| 通讯 | * साहित्य और राजनीति — साहित्यकार से सदैव अपेक्षा कि सत्ता का समर्थन करे; जो न करे, "राष्ट्रद्रोही"। |
| 论辩的魂灵 | * इस बार यह (这回是) — विद्यार्थी आंदोलन पर। "जो आज विद्यार्थियों पर गोली चलाता, वह कल जनता पर चलाएगा।" |
| 牺牲谟 | * बिना फूल का गुलाब (无花的蔷薇) — विचार-स्वतंत्रता के दमन पर। |
| 战士和苍蝇 | == 1926 (अनुपूरक) == |
| 夏三虫 | * एक काँटेदार उपमा (一点比喻) — "हम चीनी वर्तमान में जी रहे हैं, न अतीत में, न भविष्य में।" |
| 忽然想到(五至六) | * 18 मार्च की घटना: लिऊ हेझेन की स्मृति में (记念刘和珍君) — 18 मार्च 1926 को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों पर सरकारी गोलीबारी; लिऊ हेझेन (刘和珍) और अन्य की हत्या। |
| 杂感 | "सत्य कहूँ तो, मैं वास्तव में नहीं जानता कि इस वर्ष 18 मार्च का रक्तपात सुधार की शक्तियों के लिए ऐसे लाभदायक होगा जैसे सुधारक कहते हैं। किंतु मैं इतना जानता हूँ कि जो शक्तियाँ दमन चाहती हैं, उन्होंने सचमुच एक अद्भुत विजय प्राप्त की है। एक विशाल अंधकार उतरा है, और मैं लगभग कुछ नहीं कह सकता।" |
| 北京通信 | "मौन, मौन! मौन में यदि विस्फोट न हो, तो मौन में ही विनाश।" |
| 导师 | * फ़ान ऐनोंग (范爱农) — मित्र फ़ान ऐनोंग की स्मृति। "वह एक विद्रोही था, किंतु विद्रोह करने का मार्ग नहीं मिला। एक उदार मनुष्य था, किंतु उदारता के लिए स्थान नहीं। अंत में, शराब पीकर नदी में गिर गया। दुर्घटना थी, या इच्छा — कोई नहीं जानता।" |
| 长城 | (1925–1927.) |
| 忽然想到(七至九) | |
| “碰壁”之后 | |
| 并非闲话 | |
| 我的“籍”和“系” | |
| 咬文嚼字(三) | |
| 忽然想到(十至十一) | |
| 补白 | |
| 答KS君 | |
| “碰壁”之余 | |
| 并非闲话(二) | |
| 十四年的“读经” | |
| 评心雕龙 | |
| 这个与那个 | |
| 并非闲话(三) | |
| 我观北大 | |
| 碎话 | |
| “公理”的把戏 | |
| 这回是“多数”的把戏 | |
| 后记 | |
| 华盖集续编 | |
| 小引 | |
| ——一九二六年—— | |
| 杂论管闲事·做学问·灰色等 | |
| 有趣的消息 | |
| 学界的三魂 | |
| 古书与白话 | |
| 一点比喻 | |
| 不是信 | |
| 我还不能“带住” | |
| 送灶日漫笔 | |
| 谈皇帝 | |
| 无花的蔷薇 | |
| 无花的蔷薇之二 | |
| “死地” | |
| 可惨与可笑 | |
| 记念刘和珍君 | |
| 空谈 | |
| 如此“讨赤” | |
| 无花的蔷薇之三 | |
| 新的蔷薇 | |
| 再来一次 | |
| 为半农题记“何典”后,作 | |
| 马上日记 | |
| 马上支日记 | |
| 马上日记之二 | |
| 记“发薪” | |
| 记谈话 | |
| 上海通信 | |
| 华盖集续编的续编 | |
| 厦门通信 | |
| 厦门通信(二) | |
| 阿Q正传的成因 | |
| 关于“三藏取经记”等 | |
| 所谓“思想界先驱者”鲁迅启事 | |
| 厦门通信(三) | |
| 海上通信 | |
| 而已集 | |
| 题辞 | |
| ——一九二七年—— | |
| 黄花节的杂感 | |
| 略论中国人的脸 | |
| 革命时代的文学 | |
| 写在“劳动问题”之前 | |
| 略谈香港 | |
| 读书杂谈 | |
| 通信 | |
| 答有恒先生 | |
| 辞“大义” | |
| 反“漫谈” | |
| 忧“天乳” | |
| 革“首领” | |
| 谈“激烈” | |
| 扣丝杂感 | |
| “公理”之所在 | |
| 可恶罪 | |
| “意表之外” | |
| 新时代的放债法 | |
| 魏晋风度及文章与药及酒之关系 | |
| 小杂感 | |
| 再谈香港 | |
| 革命文学 | |
| “尘影”题辞 | |
| 当陶元庆君的绘画展览时 | |
| 卢梭和胃口 | |
| 文学和出汗 | |
| 文艺和革命 | |
| 谈所谓“大内档案” | |
| 拟豫言 | |
| 附录 | |
| 大衍发微 | |
| 【华盖集续编】 | |
| 【小引】 | |
| 还不满一整年,所写的杂感的分量,已有去年一年的那么多了。秋来住在海边,目前只见云水,听到的多是风涛声,几乎和社会隔绝。如果环境没有改变,大概今年不见得再有什么废话了罢。灯下无事,便将旧稿编集起来;还豫备付印,以供给要看我的杂感的主顾们。 | |
| 这里面所讲的仍然并没有宇宙的奥义和人生的真谛。不过是,将我所遇到的,所想到的,所要说的,一任它怎样浅薄,怎样偏激,有时便都用笔写了下来。说得自夸一点,就如悲喜时节的歌哭一般,那时无非借此来释愤抒情,现在更不想和谁去抢夺所谓公理或正义。你要那样,我偏要这样是有的;偏不遵命,偏不磕头是有的;偏要在庄严高尚的假面上拨它一拨也是有的,此外却毫无什么大举。名副其实,“杂感”而已。 | |
| 从一月以来的,大略都在内了;只删去了一篇。那是因为其中开列着许多人,未曾,也不易遍征同意,所以不好擅自发表。 | |
| 书名呢?年月是改了,情形却依旧,就还叫《华盖集》。然而年月究竟是改了,因此只得添上两个字:“续编”。 | |
| 一九二六年十月十四日,鲁迅记于厦门。 | |
| 【附录】 | |
| 【大衍发微】 | |
| 三月十八日段祺瑞、贾德耀、章士钊们使卫兵枪杀民众,通缉五个所谓“暴徒首领”之后,报上还流传着一张他们想要第二批通缉的名单。对于这名单的编纂者,我现在并不想研究。但将这一批人的籍贯、职务调查开列起来,却觉得取舍是颇为巧妙的。先开前六名,但所任的职务,因为我见闻有限,所以也许有遗漏: | |
| 一 徐谦(安徽)俄国退还庚子赔款委员会委员,中俄大学校长,广东外交团代表主席。 | |
| 二 李大钊(直隶)国立北京大学教授、校长室秘书。 | |
| 三 吴敬恒(江苏)清室善后委员会监理。 | |
| 四 李煜瀛(直隶)俄款委员会委员长,清室善后委员会委员长,中法大学代理校长,北大教授。 | |
| 五 易培基(湖南)前教育总长,现国立北京女子师范大学校长。 | |
| 六 顾兆熊(直隶)俄款委员会委员,北大教务长,北京教育会 | |
| 会长。 | |
| 四月九日《京报》云:“姓名上尚有圈点等符号,其意不明。……徐、李等五人名上各有三圈,吴稚晖虽列名第三,而仅一点。余或两圈一圈或一点,不记其详。”于是就有人推测,以为吴老先生之所以仅有一点者,因章士钊还想引以为重,以及别的原因云云。案此皆未经开列职务,以及未见陈源《闲话》之故也。只要一看上文,便知道圈点之别,不过表明“差缺”之是否“优美”。监理是点查物件的监督者,又没有什么薪水,所以只配一点;而别人之“差缺”则大矣,自然值得三圈。“不记其详”的余人,依此类推,大约即不至于有大错。将冠冕堂皇的“整顿学风”的盛举,只作如是观,虽然太煞风景,对不住“正人君子”们,然而我的眼光这样,也就无法可想。再写下去罢,计开: | |
| 七 陈友仁(广东)前《民报》英文记者,现《国民新报》英文 | |
| 记者。 | |
| 八 陈启修(四川)中俄大学教务长,北大教授,女师大教授,《国民新报副刊》编辑。 | |
| 九 朱家骅(浙江)北大教授。 | |
| 十 蒋梦麟(浙江)北大教授,代理校长。 | |
| 十一 马裕藻(浙江)北大国文系主任,师大教授,前女师大总务长现教授。 | |
| 十二 许寿裳(浙江)教育部编审员,前女师大教务长现教授。 | |
| 十三 沈兼士(浙江)北大国文系教授,清室善后委员会委员,女师大教授。 | |
| 十四 陈垣(广东)前教育次长,现清室善后委员会委员,北大 | |
| 导师。 | |
| 十五 马叙伦(浙江)前教育次长,教育特税督办,现国立师范大学教授,北大讲师。 | |
| 十六 邵振青(浙江)《京报》总编辑。 | |
| 十七 林玉堂(福建)北大英文系教授,女师大教务长,《国民新报》英文部编辑,《语丝》撰稿者。 | |
| 十八 萧子升(湖南)前《民报》编辑,教育部秘书,《猛进》撰 | |
| 稿者。 | |
| 十九 李玄伯(直隶)北大法文系教授,《猛进》撰稿者。 | |
| 二十 徐炳昶(河南)北大哲学系教授,女师大教授,《猛进》撰 | |
| 稿者。 | |
| 二十一 周树人(浙江)教育部佥事,女师大教授,北大国文系讲师,中国大学讲师,《国副》编辑,《莽原》编辑,《语丝》撰稿者。 | |
| 二十二 周作人(浙江)北大国文系教授,女师大教授,燕京大学副教授,《语丝》撰稿者。 | |
| 二十三 张凤举(江西)北大国文系教授,女师大讲师,《国副》编辑,《猛进》及《语丝》撰稿者。 | |
| 二十四 陈大齐(浙江)北大哲学系教授,女师大教授。 | |
| 二十五 丁维汾(山东)国民党。 | |
| 二十六 王法勤(直隶)国民党,议员。 | |
| 二十七 刘清扬(直隶)国民党妇女部长。 | |
| 二十八 潘廷干 | |
| 二十九 高鲁(福建)中央观象台长,北大讲师。 | |
| 三 十 谭熙鸿(江苏)北大教授,《猛进》撰稿者。 | |
| 三十一 陈彬和(江苏)前平民中学教务长,前天津南开学校总务长,现中俄大学总务长。 | |
| 三十二 孙伏园(浙江)北大讲师,《京报副刊》编辑。 | |
| 三十三 高一涵(安徽)北大教授,中大教授,《现代评论》撰稿者。 | |
| 三十四 李书华(直隶)北大教授,《猛进》撰稿者。 | |
| 三十五 徐宝璜(江西)北大教授,《猛进》撰稿者。 | |
| 三十六 李麟玉(直隶)北大教授,《猛进》撰稿者。 | |
| 三十七 成平(湖南)《世界日报》及《晚报》总编辑,女师大讲师。 | |
| 三十八 潘蕴巢(江苏)《益世报》记者。 | |
| 三十九 罗敦伟(湖南)《国民晚报》记者。 | |
| 四 十 邓飞黄(湖南)《国民新报》总编辑。 | |
| 四十一 彭齐群(吉林)中央观象台科长,《猛进》撰稿者。 | |
| 四十二 徐巽(安徽)中俄大学校务委员会委员长。 | |
| 四十三 高穰(福建)律师,曾担任女师大学生控告章士钊、刘百 | |
| 昭事。 | |
| 四十四 梁鼎 | |
| 四十五 张平江(四川)女师大学生。 | |
| 四十六 姜绍谟(浙江)前教育部秘书。 | |
| 四十七 郭春涛(河南)北大学生。 | |
| 四十八 纪人庆(云南)大中公学教员。 | |
| 以上只有四十八人,五十缺二,不知是失抄,还是像九六的制钱似的,这就算是足串了。至于职务,除遗漏外,怕又有错误,并且有几位是为我所一时无从查考的。但即此已经足够了,早可以看出许多秘密来—— | |
| 甲,改组两个机关。 | |
| 1.俄国退还庚子赔款委员会。 | |
| 2.清室善后委员会。 | |
| 乙,“扫除”三个半学校: | |
| 1.中俄大学; | |
| 2.中法大学; | |
| 3.女子师范大学; | |
| 4.北京大学之一部分。 | |
| 丙,扑灭四种报章: | |
| 1.《京报》; | |
| 2.《世界日报》及《晚报》; | |
| 3.《国民新报》; | |
| 4.《国民晚报》。 | |
| 丁,“逼死”两种副刊: | |
| 1.《京报副刊》; | |
| 2.《国民新报副刊》。 | |
| 戊,妨害三种期刊: | |
| 1.《猛进》; | |
| 2.《语丝》; | |
| 3.《莽原》。 | |
| “孤桐先生”是“正人君子”一流人,“党同伐异”怕是不至于的,“睚眦之怨”或者也未必报。但是赵子昂的画马,岂不是据说先对着镜子,摹仿形态的么?据上面的镜子,从我的眼睛,还可以看见一些额外的 | |
| 形态—— | |
| 1.连替女师大学生控告章士钊的律师都要获罪,上面已经说过了。 | |
| 2.陈源“流言”中的所谓“某籍”,有十二人,占全数四分之一。 | |
| 3.陈源“流言”中的所谓“某系”(案盖指北大国文系也),计有 | |
| 五人。 | |
| 4.曾经发表反章士钊宣言的北大评议员十七人,有十四人在内。 | |
| 5.曾经发表反杨荫榆宣言的女师大教员七人,有三人在内,皆 | |
| “某籍”。 | |
| 这通缉如果实行,我是想要逃到东交民巷或天津去的;能不能自然是别一问题。这种举动虽将为“正人君子”所冷笑,但我却不愿意为要博得这些东西的夸奖,便到“孤桐先生”的麾下去投案。但这且待后来再说,因为近几天是“孤桐先生”也如“政客,富人,和革命猛进者及民众的首领”一般,“安居在东交民巷里”了。 | |
| 【小引】 | |
| 还不满一整年,所写的杂感的分量,已有去年一年的那么多了。秋来住在海边,目前只见云水,听到的多是风涛声,几乎和社会隔绝。如果环境没有改变,大概今年不见得再有什么废话了罢。灯下无事,便将旧稿编集起来;还豫备付印,以供给要看我的杂感的主顾们。 | |
| 这里面所讲的仍然并没有宇宙的奥义和人生的真谛。不过是,将我所遇到的,所想到的,所要说的,一任它怎样浅薄,怎样偏激,有时便都用笔写了下来。说得自夸一点,就如悲喜时节的歌哭一般,那时无非借此来释愤抒情,现在更不想和谁去抢夺所谓公理或正义。你要那样,我偏要这样是有的;偏不遵命,偏不磕头是有的;偏要在庄严高尚的假面上拨它一拨也是有的,此外却毫无什么大举。名副其实,“杂感”而已。 | |
| 从一月以来的,大略都在内了;只删去了一篇。那是因为其中开列着许多人,未曾,也不易遍征同意,所以不好擅自发表。 | |
| 书名呢?年月是改了,情形却依旧,就还叫《华盖集》。然而年月究竟是改了,因此只得添上两个字:“续编”。 | |
| 一九二六年十月十四日,鲁迅记于厦门。 | |
| 【一九二六年】 | |
| 【杂论管闲事·做学问·灰色等】 | |
| 1 | |
| 听说从今年起,陈源(即西滢)教授要不管闲事了;这豫言就见于《现代评论》五十六期的《闲话》里。惭愧我没有拜读这一期,因此也不知其详。要是确的呢,那么,除了用那照例的客套说声“可惜”之外,真的倒实在很诧异自己之胡涂:年纪这么大了,竟不知道阳历的十二月三十一日和一月一日之交在别人是可以发生这样的大变动。我近来对于年关颇有些神经过钝了,全不觉得怎样。其实,倘要觉得罢,可是也不胜其觉得。大家挂上五色旗,大街上搭起几坐彩坊,中间还有四个字道:“普天同庆”,据说这算是过年。大家关了门,贴上门神,爆竹毕剥砰的放起来,据说这也是过年。要是言行真跟着过年为转移,怕要转移不迭,势必至于成为转圈子。所以,神经过钝虽然有落伍之虑,但有弊必有利,却也很占一点小小的便宜的。 | |
| 但是,还有些事我终于想不明白:即如天下有闲事,有人管闲事之类。我现在觉得世上是仿佛没有所谓闲事的,有人来管,便都和自己有点关系;即便是爱人类,也因为自己是人。假使我们知道了火星里张龙和赵虎打架,便即大有作为,请酒开会,维持张龙,或否认赵虎,那自然是颇近于管闲事了。然而火星上事,既然能够“知道”,则至少必须已经可以通信,关系也密切起来,算不得闲事了。因为既能通信,也许将来就能交通,他们终于会在我们的头顶上打架。至于咱们地球之上,即无论那一处,事事都和我们相关,然而竟不管者,或因不知道,或因管不着,非以其“闲”也。譬如英国有刘千昭雇了爱尔兰老妈子在伦敦拉出女生,在我们是闲事似的罢,其实并不,也会影响到我们这里来。留学生不是多多,多多了么?倘有合宜之处,就要引以为例,正如在文学上的引用什么莎士比亚呀,塞文狄斯呀,芮恩施呀一般。 | |
| (不对,错了。芮恩施是美国的驻华公使,不是文学家。我大约因为在讲什么文艺学术的一篇论文上见过他的名字,所以一不小心便带出来了。合即订正于此,尚希读者谅之。) | |
| 即使是动物,也怎能和我们不相干?青蝇的脚上有一个霍乱菌,蚊子的唾沫里有两个疟疾菌,就说不定会钻进谁的血里去。管到“邻猫生子”,很有人以为笑谈,其实却正与自己大有相关。譬如我的院子里,现在就有四匹邻猫常常吵架了,倘使这些太太们之一又诞育四匹,则三四月后,我就得常听到八匹猫们常常吵闹,比现在加倍地心烦。 | |
| 所以我就有了一种偏见,以为天下本无所谓闲事,只因为没有这许多遍管的精神和力量,于是便只好抓一点来管。为什么独抓这一点呢?自然是最和自己相关的,大则因为同是人类,或是同类,同志;小则,因为是同学,亲戚,同乡,——至少,也大概叨光过什么,虽然自己的显在意识上并不了然,或者其实了然,而故意装痴作傻。 | |
| 但陈源教授据说是去年却管了闲事了,要是我上文所说的并不错,那就确是一个超人。今年不问世事,也委实是可惜之至,真是斯人不管,“如苍生何”了。幸而阴历的过年又快到了,除夕的亥时一过,也许又可望心回意转的罢。 | |
| 2 | |
| 昨天下午我从沙滩回家的时候,知道大琦君来访过我了。这使我很高兴,因为我是猜想他进了病院的了,现在知道并没有。而尤其使我高兴的是他还留赠我一本《现代评论增刊》,只要一看见封面上画着的一枝细长的蜡烛,便明白这是光明之象,更何况还有许多名人学者的著作,更何况其中还有陈源教授的一篇《做学问的工具》呢?这是正论,至少可以赛过“闲话”的;至少,是我觉得赛过“闲话”,因为它给了我许多东西。 | |
| 我现在才知道南池子的“政治学会图书馆”去年“因为时局的关系,借书的成绩长进了三至七倍”了,但他“家翰笙”却还“用‘平时不烧香,临时抱佛脚’十个字形容当今学术界大部分的状况”。这很改正了我许多误解。我先已说过,现在的留学生是多多,多多了,但我总疑心他们大部分是在外国租了房子,关起门来炖牛肉吃的,而且在东京实在也看见过。那时我想:炖牛肉吃,在中国就可以,何必路远迢迢,跑到外国来呢?虽然外国讲究畜牧,或者肉里面的寄生虫可以少些,但炖烂了,即使多也就没有关系。所以,我看见回国的学者,头两年穿洋服,后来穿皮袍,昂头而走的,总疑心他是在外国亲手炖过几年牛肉的人物,而且即使有了什么事,连“佛脚”也未必肯抱的。现在知道并不然,至少是“留学欧美归国的人”并不然。但可惜中国的图书馆里的书太少了,据说北京“三十多个大学,不论国立私立,还不及我们私人的书多”云。这“我们”里面,据说第一要数“溥仪先生的教师庄士敦先生”,第二大概是“孤桐先生”即章士钊,因为在德国柏林时候,陈源教授就亲眼看见他两间屋里“几乎满床满架满桌满地,都是关于社会主义的德文书”。 现在呢,想来一定是更多的了。这真教我欣羡佩服。记得自己留学时候,官费每月三十六元,支付衣食学费之外,简直没有赢余,混了几年,所有的书连一壁也遮不满,而且还是杂书,并非专而又专,如“都是关于社会主义的德文书”之类。 | |
| 但是很可惜,据说当民众“再毁”这位“孤桐先生”的“寒家”时,“好象他们夫妇两位的藏书都散失了”。想那时一定是拉了几十车,向各处走散,可惜我没有去看,否则倒也是一个壮观。 | |
| 所以“暴民”之为“正人君子”所深恶痛绝,也实在有理由,即如这回之“散失”了“孤桐先生”夫妇的藏书,其加于中国的损失,就在毁坏了三十多个国立及私立大学的图书馆之上。和这一比较,刘百昭司长的失少了家藏的公款八千元,要算小事件了,但我们所引为遗憾的是偏是章士钊、刘百昭有这么多的储藏,而这些储藏偏又全都遭了劫。 | |
| 在幼小时候曾有一个老于世故的长辈告诫过我:你不要和没出息的担子或摊子为难,他会自己摔了,却诬赖你,说不清,也赔不完。这话于我似乎到现在还有影响,我新年去逛火神庙的庙会时,总不敢挤近玉器摊去,即使它不过摆着寥寥的几件。怕的是一不小心,将它碰倒了,或者摔碎了一两件,就要变成宝贝,一辈子赔不完,那罪孽之重,会在毁坏一坐博物馆之上。而且推而广之,连热闹场中也不大去了,那一回的示威运动时,虽有“打落门牙”的“流言”,其实却躺在家里,托福无恙。但那两屋子“关于社会主义的德文书”以及其他从“孤桐先生”府上陆续散出的壮观,却也因此“交臂失之”了。这实在也就是所谓“有一利必有一弊”,无法两全的。 | |
| 现在是收藏洋书之富,私人要数庄士敦先生,公团要推“政治学会图书馆”了,只可惜一个是外国人,一个是靠着美国公使芮恩施竭力提倡出来的。“北京国立图书馆”将要扩张,实在是再好没有的事,但听说所依靠的还是美国退还的赔款,常年经费又不过三万元,每月二千余。要用美国的赔款,也是非同小可的事,第一,馆长就必须学贯中西,世界闻名的学者。据说,这自然只有梁启超先生了,但可惜西学不大贯,所以配上一个北大教授李四光先生做副馆长,凑成一个中外兼通的完人。然而两位的薪水每月就要一千多,所以此后也似乎不大能够多买书籍。这也就是所谓“有利必有弊”罢,想到这里,我们就更不能不痛切地感到“孤桐先生”独力购置的几房子好书惨遭散失之可惜了。 | |
| 总之,在近几年中,是未必能有较好的“做学问的工具”的,学者要用功,只好是自己买书读,但又没有钱。听说“孤桐先生”倒是想到了这一节,曾经发表过文章,然而下台了,很可惜。学者们另外还有什么法子呢,自然“也难怪他们除了说说‘闲话’便没有什么可干”,虽然北京三十多个大学还不及他们“私人的书多”。为什么呢?要知道做学问不是容易事,“也许一个小小的题目得参考百十种书”,连“孤桐先生”的藏书也未必够用。陈源教授就举着一个例:“就以‘四书’来说”罢,“不研究汉、宋、明、清许多儒家的注疏理论,‘四书’的真正意义是不易领会的。短短的一部‘四书’,如果细细的研究起来,就得用得了几百几千种参考书”。 | |
| 这就足见“学问之道,浩如烟海”了,那“短短的一部‘四书’”,我是读过的,至于汉人的“四书”注疏或理论,却连听也没有听到过。陈源教授所推许为“那样提倡风雅的封藩大臣”之一张之洞先生在做给“束发小生”们看的《书目答问》上曾经说:“‘四书’,南宋以后之名。”我向来就相信他的话,此后翻翻《汉书艺文志》,《隋书经籍志》之类,也只有“五经”,“六经”,“七经”,“六艺”,却没有“四书”,更何况汉人所做的注疏和理论。但我所参考的,自然不过是通常书,北京大学的图书馆里就有,见闻寡陋,也未可知,然而也只得这样就算了,因为即使要“抱”,却连“佛脚”都没有。由此想来,那能“抱佛脚”的,肯“抱佛脚”的,的确还是真正的福人,真正的学者了。他“家翰笙”还慨乎言之,大约是“《春秋》责备贤者”之意罢。 | |
| 完 | |
| 现在不高兴写下去了,只好就此完结。总之:将《现代评论增刊》略翻一遍,就觉得五光十色,正如看见有一回广告上所开列的作者的名单。例如李仲揆教授的《生命的研究》呀,胡适教授的《译诗三首》呀,徐志摩先生的译诗一首呀,西林氏的《压迫》呀,陶孟和教授的要到二○二五年才发表而必须我们的玄孙才能全部拜读的大著作的一部分呀……。但是,翻下去时,不知怎的我的眼睛却看见灰色了,于是乎抛开。 | |
| 现在的小学生就能玩七色板,将七种颜色涂在圆板上,停着的时候,是好看的,一转,便变成灰色,——本该是白色的罢,可是涂得不得法,变成灰色了。收罗许多著名学者的大著作的大报,自然是光怪陆离,但也是转不得,转一周,就不免要显出灰色来,虽然也许这倒正是它的特色。 | |
| (一月三日。) | |
| 【有趣的消息】 | |
| 虽说北京像一片大沙漠,青年们却还向这里跑;老年们也不大走,即或有到别处去走一趟的,不久就转回来了,仿佛倒是北京还很有什么可以留恋。厌世诗人的怨人生,真是“感慨系之矣”,然而他总活着;连祖述释迦牟尼先生的哲人勖本华尔也不免暗地里吃一种医治什么病症的药,不肯轻易“涅槃”。俗语说:“好死不如恶活”,这当然不过是俗人的俗见罢了,可是文人学者之流也何尝不这样。所不同的,只是他总有一面辞严义正的军旗,还有一条尤其义正辞严的逃路。真的,倘不这样,人生可真要无聊透顶,无话可说了。 | |
| 北京就是一天一天地百物昂贵起来;自己的“区区佥事”,又因为“妄有主张”,被章士钊先生革掉了。向来所遭遇的呢,借了安特来夫的话来说,是“没有花,没有诗”,就只有百物昂贵。然而也还是“妄有主张”,没法回头;倘使有一个妹子,如《晨报副刊》上所艳称的“闲话先生”的家事似的,叫道:“阿哥!”那声音正如“银铃之响于幽谷”,向我求告,“你不要再做文章得罪人家了,好不好?”我也许可以借此拨转马头,躲到别墅里去研究汉朝人所做的《四书》注疏和理论去。然而,惜哉,没有这样的好妹子;“女嬃之婵媛兮,申申其詈予,曰:鲧婞直以亡身兮,终然夭乎羽之野。”连有一个那样凶姊姊的幸福也不及屈灵均。我的终于“妄有主张”,或者也许是无可推托之故罢。然而这关系非同小可,将来怕要遭殃了,因为我知道,得罪人是要得到报应的。 | |
| 话要回到释迦先生的教训去了,据说:活在人间,还不如下地狱的稳妥。做人有“作”就是动作(=造孽),下地狱却只有“报”(=报应)了;所以生活是下地狱的原因,而下地狱倒是出地狱的起点。这样说来,实在令人有些想做和尚,但这自然也只限于“有根”(据说,这是“一句天津话”)的大人物,我却不大相信这一类鬼画符。活在沙漠似的北京城里,枯燥当然是枯燥的,但偶然看看世态,除了百物昂贵之外,究竟还是五花八门,创造艺术的也有,制造流言的也有,肉麻的也有,有趣的也有……这大概就是北京之所以为北京的缘故,也就是人们总还要奔凑聚集的缘故。可惜的是只有一些小玩意,老实一点的朋友就难于给自己竖起一杆辞严义正的军旗来。 | |
| 我一向以为下地狱的事,待死后再对付,只有目前的生活的枯燥是最可怕的,于是便不免于有时得罪人,有时则寻些小玩意儿来开开笑口,但这也就是得罪人。得罪人当然要受报,那也只好准备着,因为寻些小玩意儿来开开笑口的是更不能竖起辞严义正的军旗来的。其实,这里也何尝没有国家大事的消息呢,“关外战事不日将发生”呀,“国军一致拥段”哪,有些报纸上都用了头号字煌煌地排印着,可以刺得人们头昏,但于我却都没有什么鸟趣味。人的眼界之狭是不大有药可救的,我近来觉得有趣的倒要算看见那在德国手格盗匪若干人,在北京率领三河县老妈子一大队的武士刘百昭校长居然做骈文,大有偃武修文之意了;而且“百昭海邦求学,教部备员,多艺之誉愧不如人,审美之情差堪自信”,还是一位文武全才,我先前实在没有料想到。第二,就是去年肯管闲事的“学者”,今年不管闲事了,在年底结清帐目的办法,原来不止是掌柜之于流水簿,也可以适用于“正人君子”的行为的。或者,“阿哥!”这一声叫,正在中华民国十四年十二月卅一日的夜间十二点钟罢。 | |
| 但是,这些趣味,刹那间也即消失了,就是我自己的思想的变动,也诚然是可恨。我想,照着境遇,思想言行当然要迁移,一迁移,当然会有所以迁移的道理。况且世界上的国庆很不少,古今中外名流尤其多,他们的军旗,是全都早经竖定了的。前人之勤,后人之乐,要做事的时候可以援引孔丘墨翟,不做事的时候另外有老聃,要被杀的时候我是关龙逄,要杀人的时候他是少正卯,有些力气的时候看看达尔文赫胥黎的书,要人帮忙就有克鲁巴金的《互助论》,勃朗宁夫妇岂不是讲恋爱的模范么,勖本华尔和尼采又是咒诅女人的名人,……归根结蒂,如果杨荫榆或章士钊可以比附到犹太人特莱孚斯去,则他的篾片就可以等于左拉等辈了。这个时候,可怜的左拉要被中国人背出来;幸而杨荫榆或章士钊是否等于特莱孚斯,也还是一个大疑问。 | |
| 然而事情还没有这么简单,中国的坏人(如水平线下的文人和学棍学匪之类),似乎将来要大吃其苦了,虽然也许要在身后,像下地狱一般。但是,深谋远虑的人,总还以从此小心,不要多说为稳妥。你以为“闲话先生”真是不管闲事了么?并不然的。据说他是要“到那天这班出锋头的人们脱尽了锐气的日子,我们这位闲话先生正在从容的从事他那‘完工的拂拭’(The finishing touch),笑吟吟的擎着他那枝从铁杠磨成的绣针,讽刺我们情急是多么不经济的一个态度,反面说只有无限的耐心才是天才唯一的凭证”。(《晨报副刊》一四二三) | |
| 后出者胜于前者,本是天下的平常事情,但除了堕落的民族。即以衣服而论,也是由裸体而用会阴带或围裙,于是有衣裳,衮冕。我们将来的天才却特异的,别人系了围裙狂跳时,他却躲在绣房里刺绣,——不,磨绣针。待到别人的围裙全数破旧,他却穿了绣花衫子站出来了。大家只好说道“阿!”可怜的性急的野蛮人,竟连围裙也不知道换一条,怪不得锐气终于脱尽;脱尽犹可,还要看那“笑吟吟”的“讽刺”的“天才”脸哩,这实在是对于灵魂的鞭责,虽说还在辽远的将来。 | |
| 还有更可怕的,是我们风闻二○二五年一到,陶孟和教授要发表一部著作。内容如何,只有百年后的我们的曾孙或玄孙们知道罢了,但幸而在《现代评论增刊》上提前发表了几节,所以我们竟还能“管中窥豹”似的,略见这一部新书的大概。那是讲“现代教育界的特色”的,连教员的“兼课”之多也说在内。他问:“我的议论太悲观,太刻薄,太荒诞吗?我深愿受这个批评,假使事实可以证明。”这些批评我们且俟之百年之后,虽然那时也许无从知道事实;典籍呢,大概也只有“笑吟吟的”佳作留传。要是当真这样,那大半是“英雄所见略同”的,后人总不至于以为刻薄罢。但我们也难于悬揣,不过就今论今,似乎颇有些“孔子作《春秋》,而乱臣贼子惧”之意了。人们不逢如此盛事者,盖已将二千四百年云。 | |
| 总之:百年以内,将有陈源教授的许多(?)书,百年以后,将有陶孟和教授的一部书出现。内容虽然不知道怎样,但据目下所走漏的风声看起来,大概总是讽刺“那班出锋头的人们”,或“驰驱九城”的教授的。 | |
| 我常常感叹,印度小乘教的方法何等厉害:它立了地狱之说,借着和尚,尼姑,念佛老妪的嘴来宣扬,恐吓异端,使心志不坚定者害怕。那诀窍是在说报应并非眼前,却在将来百年之后,至少也须到锐气脱尽之时。这时候你已经不能动弹了,只好听别人摆布,流下鬼泪,深悔生前之妄出锋头;而且这时候,这才认识阎罗大王的尊严和伟大。 | |
| 这些信仰,也许是迷信罢,但神道设教,于“挽世道而正人心”的事,或者也还是不无裨益。况且,未能将坏人“投界豺虎”于生前,当然也只好口诛笔伐之于身后,孔子一车两马,倦游各国以还,抽出钢笔来作《春秋》,盖亦此志也。 | |
| 但是,时代迁流了,到现在,我以为这些老玩意,也只好骗骗极端老实人。连闹这些玩意儿的人们自己尚且未必信,更何况所谓坏人们。得罪人要受报应,平平常常,并不见得怎样奇特,有时说些宛转的话,是姑且客气客气的,何尝想借此免于下地狱。这是无法可想的,在我们不从容的人们的世界中,实在没有那许多工夫来摆臭绅士的臭架子了,要做就做,与其说明年喝酒,不如立刻喝水;待廿一世纪的剖拨戮尸,倒不如马上就给他一个嘴巴。至于将来,自有后起的人们,决不是现在人即将来所谓古人的世界,如果还是现在的世界,中国就会完! | |
| (一月十四日。) | |
| 【学界的三魂】 | |
| 从《京报副刊》上知道有一种叫《国魂》的期刊,曾有一篇文章说章士钊固然不好,然而反对章士钊的“学匪”们也应该打倒。我不知道大意是否真如我所记得?但这也没有什么关系,因为不过引起我想到一个题目,和那原文是不相干的。意思是,中国旧说,本以为人有三魂六魄,或云七魄;国魂也该这样。而这三魂之中,似乎一是“官魂”,一是“匪魂”,还有一个是什么呢?也许是“民魂”罢,我不很能够决定。又因为我的见闻很偏隘,所以未敢悉指中国全社会,只好缩而小之曰“学界”。 | |
| 中国人的官瘾实在深,汉重孝廉而有埋儿刻木,宋重理学而有高帽破靴,清重帖括而有“且夫”“然则”。总而言之:那魂灵就在做官,——行官势,摆官腔,打官话。顶着一个皇帝做傀儡,得罪了官就是得罪了皇帝,于是那些人就得了雅号曰“匪徒”。学界的打官话是始于去年,凡反对章士钊的都得了“土匪”、“学匪”、“学棍”的称号,但仍然不知道从谁的口中说出,所以还不外乎一种“流言”。 | |
| 但这也足见去年学界之糟了,竟破天荒的有了学匪。以大点的国事来比罢,太平盛世,是没有匪的;待到群盗如毛时,看旧史,一定是外戚,宦官,奸臣,小人当国,即使大打一通官话,那结果也还是“呜呼哀哉”。当这“呜呼哀哉”之前,小民便大抵相率而为盗,所以我相信源增先生的话:“表面上看只是些土匪与强盗,其实是些农民革命军。”(《国民新报副刊》四三)那么,社会不是改进了么?并不,我虽然也是被为“土匪”之一,却并不想为老前辈们饰非掩过。农民是不来夺取政权的,源增先生又道:“任三五热心家乘势将皇帝推倒,自己过皇帝瘾去。”但这时候,匪便被称为帝,除遗老外,文人学者却都来恭维,又称反对他的为匪了。 | |
| 所以中国的国魂里大概总有这两种魂:官魂和匪魂。这也并非硬要将我辈的魂挤进国魂里去,贪图与教授名流的魂为伍,只因为事实仿佛是这样。社会诸色人等,爱看《双官诰》,也爱看《四杰村》,望偏安巴蜀的刘玄德成功,也愿意打家劫舍的宋公明得法;至少,是受了官的恩惠时候则艳羡官僚,受了官的剥削时候便同情匪类。但这也是人情之常;倘使连这一点反抗心都没有,岂不就成为万劫不复的奴才了? | |
| 然而国情不同,国魂也就两样。记得在日本留学时候,有些同学问我在中国最有大利的买卖是什么,我答道:“造反。”他们便大骇怪。在万世一系的国度里,那时听到皇帝可以一脚踢落,就如我们听说父母可以一棒打杀一般。为一部分士女所心悦诚服的李景林先生,可就深知此意了,要是报纸上所传非虚。今天的《京报》即载着他对某外交官的谈话道:“予预计于旧历正月间,当能与君在天津晤谈;若天津攻击竟至失败,则拟俟三四月间卷土重来,若再失败,则暂投土匪,徐养兵力,以待时机”云。但他所希望的不是做皇帝,那大概是因为中华民国之故罢。 | |
| 所谓学界,是一种发生较新的阶级,本该可以有将旧魂灵略加湔洗之望了,但听到“学官”的官话,和“学匪”的新名,则似乎还走着旧道路。那末,当然也得打倒的。这来打倒他的是“民魂”,是国魂的第三种。先前不很发扬,所以一闹之后,终不自取政权,而只“任三五热心家将皇帝推倒,自己过皇帝瘾去”了。 | |
| 惟有民魂是值得宝贵的,惟有他发扬起来,中国才有真进步。但是,当此连学界也倒走旧路的时候,怎能轻易地发挥得出来呢?在乌烟瘴气之中,有官之所谓“匪”和民之所谓匪;有官之所谓“民”和民之所谓民;有官以为“匪”而其实是真的国民,有官以为“民”而其实是衙役和马弁。所以貌似“民魂”的,有时仍不免为“官魂”,这是鉴别魂灵者所应该十分注意的。 | |
| 话又说远了,回到本题去。去年,自从章士钊提了“整顿学风”的招牌,上了教育总长的大任之后,学界里就官气弥漫,顺我者“通”,逆我者“匪”,官腔官话的余气,至今还没有完。但学界却也幸而因此分清了颜色;只是代表官魂的还不是章士钊,因为上头还有“减膳”执政在,他至多不过做了一个官魄;现在是在天津“徐养兵力,以待时机”了。我不看《甲寅》,不知道说些什么话:官话呢,匪话呢,民话呢,衙役马弁 | |
| 话呢?…… | |
| (一月二十四日。) | |
| 【古书与白话】 | |
| 记得提倡白话那时,受了许多谣诼诬谤,而白话终于没有跌倒的时候,就有些人改口说:然而不读古书,白话是做不好的。我们自然应该曲谅这些保古家的苦心,但也不能不悯笑他们这祖传的成法。凡有读过一点古书的人都有这一种老手段:新起的思想,就是“异端”,必须歼灭的,待到它奋斗之后,自己站住了,这才寻出它原来与“圣教同源”;外来的事物,都要“用夷变夏”,必须排除的,但待到这“夷”入主中夏,却考订出来了,原来连这“夷”也还是黄帝的子孙。这岂非出人意料之外的事呢?无论什么,在我们的“古”里竟无不包函了! | |
| 用老手段的自然不会长进,到现在仍是说非“读破几百卷书者”即做不出好白话文,于是硬拉吴稚晖先生为例。可是竟又会有“肉麻当有趣”,述说得津津有味的,天下事真是千奇百怪。其实吴先生的“用讲话体为文”,即“其貌”也何尝与“黄口小儿所作若同”。不是“纵笔所之,辄数万言”么?其中自然有古典,为“黄口小儿”所不知,尤有新典,为“束发小生”所不晓。清光绪末,我初到日本东京时,这位吴稚晖先生已在和公使蔡钧大战了,其战史就有这么长,则见闻之多,自然非现在的“黄口小儿”所能企及。所以他的遣辞用典,有许多地方是惟独熟于大小故事的人物才能够了然,从青年看来,第一是惊异于那文辞的滂沛。这或者就是名流学者们所认为长处的罢,但是,那生命却不在于此。甚至于竟和名流学者们所拉拢恭维的相反,而在自己并不故意显出长处,也无法灭去名流学者们的所谓长处;只将所说所写,作为改革道中的桥梁,或者竟并不想到作为改革道中的桥梁。 | |
| 愈是无聊赖,没出息的脚色,愈想长寿,想不朽,愈喜欢多照自己的照相,愈要占据别人的心,愈善于摆臭架子。但是,似乎“下意识”里,究竟也觉得自己之无聊的罢,便只好将还未朽尽的“古”一口咬住,希图做着肠子里的寄生虫,一同传世;或者在白话文之类里找出一点古气,反过来替古董增加宠荣。如果“不朽之大业”不过这样,那未免太可怜了罢。而且,到了二九二五年,“黄口小儿”们还要看什么《甲寅》之流,也未免过于可惨罢,即使它“自从孤桐先生下台之后,……也渐渐的有了生气了”。 | |
| 菲薄古书者,惟读过古书者最有力,这是的确的。因为他洞知弊病,能“以子之矛攻子之盾”,正如要说明吸雅片的弊害,大概惟吸过雅片者最为深知,最为痛切一般。但即使“束发小生”,也何至于说,要做戒绝雅片的文章,也得先吸尽几百两雅片才好呢。 | |
| 古文已经死掉了;白话文还是改革道上的桥梁,因为人类还在进化。便是文章,也未必独有万古不磨的典则。虽然据说美国的某处已经禁讲进化论了,但在实际上,恐怕也终于没有效的。 | |
| (一月二十五日。) | |
| 【一点比喻】 | |
| 在我的故乡不大通行吃羊肉,阖城里,每天大约不过杀几匹山羊。北京真是人海,情形可大不相同了,单是羊肉铺就触目皆是。雪白的群羊也常常满街走,但都是胡羊,在我们那里称绵羊的。山羊很少见;听说这在北京却颇名贵了,因为比胡羊聪明,能够率领羊群,悉依它的进止,所以畜牧家虽然偶而养几匹,却只用作胡羊们的领导,并不杀掉它。 | |
| 这样的山羊我只见过一回,确是走在一群胡羊的前面,脖子上还挂着一个小铃铎,作为智识阶级的徽章。通常,领的赶的却多是牧人,胡羊们便成了一长串,挨挨挤挤,浩浩荡荡,凝着柔顺有余的眼色,跟定他匆匆地竞奔它们的前程。我看见这种认真的忙迫的情形时,心里总想开口向它们发一句愚不可及的疑问—— | |
| “往那里去?!” | |
| 人群中也很有这样的山羊,能领了群众稳妥平静地走去,直到他们应该走到的所在。袁世凯明白一点这种事,可惜用得不大巧,大概因为他是不很读书的,所以也就难于熟悉运用那些的奥妙。后来的武人可更蠢了,只会自己乱打乱割,乱得哀号之声,洋洋盈耳,结果是除了残虐百姓之外,还加上轻视学问,荒废教育的恶名。然而“经一事,长一智”,二十世纪已过了四分之一,脖子上挂着小铃铎的聪明人是总要交到红运的,虽然现在表面上还不免有些小挫折。 | |
| 那时候,人们,尤其是青年,就都循规蹈矩,既不嚣张,也不浮动,一心向着“正路”前进了,只要没有人问—— | |
| “往那里去?!” | |
| 君子若曰:“羊总是羊,不成了一长串顺从地走,还有什么别的法子呢?君不见夫猪乎?拖延着,逃着,喊着,奔突着,终于也还是被捉到非去不可的地方去,那些暴动,不过是空费力气而已矣。” | |
| 这是说:虽死也应该如羊,使天下太平,彼此省力。 | |
| 这计划当然是很妥帖,大可佩服的。然而,君不见夫野猪乎?它以两个牙,使老猎人也不免于退避。这牙,只要猪脱出了牧豕奴所造的猪圈,走入山野,不久就会长出来。 | |
| Schopenhauer先生曾将绅士们比作豪猪,我想,这实在有些失体统。但在他,自然是并没有什么别的恶意的,不过拉扯来作一个比喻。《Parerga und Paralipomena》里有着这样意思的话:有一群豪猪,在冬天想用了大家的体温来御寒冷,紧靠起来了,但它们彼此即刻又觉得刺的疼痛,于是乎又离开。然而温暖的必要,再使它们靠近时,却又吃了照样的苦。但它们在这两种困难中,终于发见了彼此之间的适宜的间隔,以这距离,它们能够过得最平安。人们因为社交的要求,聚在一处,又因为各有可厌的许多性质和难堪的缺陷,再使他们分离。他们最后所发见的距离,——使他们得以聚在一处的中庸的距离,就是“礼让”和“上流的风习”。有不守这距离的,在英国就这样叫,“Keep you disatance” | |
| 但即使这样叫,恐怕也只能在豪猪和豪猪之间才有效力罢,因为它们彼此的守着距离,原因是在于痛而不在于叫的。假使豪猪们中夹着一个别的,并没有刺,则无论怎么叫,它们总还是挤过来。孔子说:礼不下庶人。照现在的情形看,该是并非庶人不得接近豪猪,却是豪猪可以任意刺着庶人而取得温暖。受伤是当然要受伤的,但这也只能怪你自己独独没有刺,不足以让他守定适当的距离。孔子又说:刑不上大夫。这就又难怪人们的要做绅士。 | |
| 这些豪猪们,自然也可以用牙角或棍棒来抵御的,但至少必须拼出背一条豪猪社会所制定的罪名:“下流”或“无礼”。 | |
| (一月二十五日。) | |
| 【不是信】 | |
| 一个朋友忽然寄给我一张《晨报副刊》,我就觉得有些特别,因为他是知道我懒得看这种东西的。但既然特别寄来了,姑且看题目罢:《关于下面一束通信告读者们》。署名是:志摩。哈哈,这是寄来和我开玩笑的,我想;赶紧翻转,便是几封信,这寄那,那寄这,看了几行,才知道似乎还是什么“闲话……闲话”问题。这问题我仅知道一点儿,就是曾在新潮社看见陈源教授即西滢先生的信,说及我“捏造的事实,传布的‘流言’,本来已经说不胜说”。不禁好笑;人就苦于不能将自己的灵魂砍成酱,因此能有记忆,也因此而有感慨或滑稽。记得首先根据了“流言”,来判决杨荫榆事件即女师大风潮的,正是这位西滢先生,那大文便登在去年五月三十日发行的《现代评论》上。我不该生长“某籍”又在“某系”教书,所以也被归入“暗中挑剔风潮”者之列,虽然他说还不相信,不过觉得可惜。在这里声明一句罢,以免读者的误解:“某系”云者,大约是指国文系,不是说研究系。那时我见了“流言”字样,曾经很愤然,立刻加以驳正,虽然也很自愧没有“十年读书十年养气的工夫”。不料过了半年,这些“流言”却变成由我传布的了,自造自己的“流言”,这真是自己掘坑埋自己,不必说聪明人,便是傻子也想不通。倘说这回的所谓“流言”,并非关于“某籍某系”的,乃是关于不信“流言”的陈源教授的了,则我实在不知道陈教授有怎样的被捏造的事实和流言在社会上传布。说起来惭愧煞人,我不赴宴会,很少往来,也不奔走,也不结什么文艺学术的社团,实在最不合式于做捏造事实和传布流言的枢纽。只是弄弄笔墨是在所不免的,但也不肯以流言为根据,故意给它传布开来,虽然偶有些“耳食之言”,又大抵是无关大体的事;要是错了,即使月久年深,也决不惜追加订正,例如对于汪原放先生“已作古人”一案,其间竟隔了几乎有两年。——但这自然是只对于看过《热风》的读者说的。 | |
| 这几天,我的“捏……言”罪案,仿佛只等于昙花一现了,《一束通信》的主要部分中,似乎也承情没有将我“流”进去,不过在后屁股的《西滢致志摩》是附带的对我的专论,虽然并非一案,却因为亲属关系而灭族,或文字狱的株连一般。灭族呀,株连呀,又有点“刑名师爷”口吻了,其实这是事实,法家不过给他起了一个名,所谓“正人君子”是不肯说的,虽然不妨这样做。此外如甲对乙先用流言,后来却说乙制造流言这一类事,“刑名师爷”的笔下就简括到只有两个字:“反噬”。呜呼,这实在形容得痛快淋漓。然而古语说,“察见渊鱼者不祥”,所以“刑名师爷”总没有好结果,这是我早经知道的。 | |
| 我猜想那位寄给我《晨报副刊》的朋友的意思了:来刺激我,讥讽我,通知我的,还是要我也说几句话呢?终于不得而知。好,好在现在正须还笔债,就用这一点事来搪塞一通罢,说话最方便的题目是《鲁迅致□□》,既非根据学理和事实的论文,也不是“笑吟吟”的天才的讽刺,不过是私人通信而已,自己何尝愿意发表;无论怎么说,粪坑也好,毛厕也好,决定与“人气”无关。即不然,也是因为生气发热,被别人逼成的,正如别的副刊将被《晨报副刊》“逼死”一样。我的镜子真可恨,照出来的总是要使陈源教授呕吐的东西,但若以赵子昂——“是不是他?”——画马为例,自然恐怕正是我自己。自己是没有什么要紧的,不过总得替□□想一想。现在不是要谈到《西滢致志摩》么,那可是极其危险的事,一不小心就要跌入“泥潭中”,遇到“悻悻的狗”,暂时再也看不见“笑吟吟”。至少,一关涉陈源两个字,你总不免要被公理家认为“某籍”,“某系”,“某党”,“喽罗”,“重女轻男”……等;而且还得小心记住,倘有人说过他是文士,是法兰斯,你便万不可再用“文士”或“法兰斯”字样,否则,——自然,当然又有“某籍”……等等的嫌疑了,我何必如此陷害无辜,《鲁迅致□□》决计不用,所以一直写到这里,还没有题目,且待写下去看罢。 | |
| 我先前不是刚说我没有“捏造事实”么?那封信里举的却有。说是我说他“同杨荫榆女士有亲戚朋友的关系,并且吃了她许多酒饭”了,其实都不对。杨荫榆女士的善于请酒,我说过的,或者别人也说过,并且偶见于新闻上。现在的有些公论家,自以为中立,其实却偏,或者和事主倒有亲戚,朋友,同学,同乡,……等等关系,甚至于叨光了酒饭,我也说过的。这不是明明白白的么,报社收津贴,连同业中也互讦过,但大家仍都自称为公论。至于陈教授和杨女士是亲戚而且吃了酒饭,那是陈教授自己连结起来的,我没有说曾经吃酒饭,也不能保证未曾吃酒饭,没有说他们是亲戚,也不能保证他们不是亲戚,大概不过是同乡罢,但只要不是“某籍”,同乡有什么要紧呢。绍兴有“刑名师爷”,绍兴人便都是“刑名师爷”的例,是只适用于绍兴的人们的。 | |
| 我有时泛论一般现状,而无意中触着了别人的伤疤,实在是非常抱歉的事。但这也是没法补救,除非我真去读书养气,一共廿年,被人们骗得老死牖下;或者自己甘心倒掉;或者遭了阴谋。即如上文虽然说明了他们是亲戚并不是我说的话,但因为列举的名词太多了,“同乡”两字,也足以招人“生气”,只要看自己愤然于“流言”中的“某籍”两字,就可想而知。照此看来,这一回的说“叭儿狗”,(《莽原半月刊》第一期)怕又有人猜想我是指着他自己,在那里“悻悻”了。其实我不过是泛论,说社会上有神似这个东西的人,因此多说些它的主人:阔人,太监,太太,小姐。本以为这足见我是泛论了,名人们现在那里还有肯跟太监的呢,但是有些人怕仍要忽略了这一层,各各认定了其中的主人之一,而以“叭儿狗”自命。时势实在艰难,我似乎只有专讲上帝,才可以免于危险,而这事又非我所长。但是,倘使所有的只是暴戾之气,还是让它尽量发出来罢,“一群悻悻的狗”,在后面也好,在对面也好。我也知道将什么之气都放在心里,脸上笔下却全都“笑吟吟”,是极其好看的;可是掘不得,小小的挖一个洞,便什么之气都出来了。但其实这倒是真面目。 | |
| 第二种罪案是“近一些的一个例”,陈教授曾“泛论图书馆的重要”,“说孤桐先生在他未下台以前发表的两篇文章里,这一层‘他似乎没看到’。”我却轻轻地改为“听说孤桐先生倒是想到了这一节,曾经发表过文章,然而下台了,很可惜”了。而且还问道:“你看见吗,那刀笔吏的笔尖?”“刀笔吏”是不会有漏洞的,我却与陈教授的原文不合,所以成了罪案,或者也就不成其为“刀笔吏”了罢。《现代评论》早已不见,全文无从查考,现在就据这一回的话,敬谨改正,为“据说孤桐先生在未下台以前发表的文章里竟也没想到;现在又下了台,目前无法补救了,很可惜”罢。这里附带地声明,我的文字中,大概是用别人的原文用引号,举大意用“据说”,述听来的类似“流言”的用“听说”,和《晨报》大将文例不相同。 | |
| 第三种罪案是关于我说“北大教授兼京师图书馆副馆长月薪至少五六百元的李四光”的事,据说已告了一年的假,假期内不支薪,副馆长的月薪又不过二百五十元。别一张《晨副》上又有本人的声明,话也差不多,不过说月薪确有五百元,只是他“只拿二百五十元”,其余的“捐予图书馆购买某种书籍”了。此外还给我许多忠告,这使我非常感谢,但愿意奉还“文士”的称号,我是不属于这一类的。只是我以为告假和辞职不同,无论支薪与否,教授也仍然是教授,这是不待“刀笔吏”才能知道的。至于图书馆的月薪,我确信李教授(或副馆长)现在每月“只拿二百五十元”的现钱,是美国那面的;中国这面的一半,真说不定要拖欠到什么时候才有。但欠帐究竟也是钱,别人的兼差,大抵多是欠帐,连一半现钱也没有,可是早成了有些论客的口实了,虽然其缺点是在不肯及早捐出去。我想,如果此后每月必发,而以学校欠薪作比例,中国的一半是明年的正月间会有的,倘以教育部欠俸作比例,则须十七年正月间才有,那时购买书籍来,我一定就更正,只要我还在做“官僚”,因为这容易得知,我也自信还有这样的记性,不至于今年忘了去年事。但是,倘若又被章士钊们革掉,那就莫明其妙,更正的事也只好作罢了。可是我所说的职衔和钱数,在今日却是事实。 | |
| 第四种的罪案是……。陈源教授说,“好了,不举例了。”为什么呢?大约是因为“本来已经说不胜说”,或者是在矫正“打笔墨官司的时候,谁写得多,骂得下流,捏造得新奇就是谁的理由大”的恶习之故罢,所以就用三个例来概其全般,正如中国戏上用四个兵卒来象征十万大军一样。此后,就可以结束,漫骂——“正人君子”一定另有名称,但我不知道,只好暂用这加于“下流”人等的行为上的话——了。原文很可以做“正人君子”的真相的标本,删之可惜,扯下来粘在后面罢—— | |
| “有人同我说,鲁迅先生缺乏的是一面大镜子,所以永远见不到他的尊容。我说他说错了。鲁迅先生的所以这样,正因为他有了一面大镜子。你听见过赵子昂——是不是他?——画马的故事罢?他要画一个姿势,就对镜伏地做出那个姿势来。鲁迅先生的文章也是对了他的大镜子写的,没有一句骂人的话不能应用在他自己的身上。要是你不信,我可以同你打一个赌。” | |
| 这一段意思很了然,犹言我写马则自己就是马,写狗自己就是狗,说别人的缺点就是自己的缺点,写法兰斯自己就是法兰斯,说“臭毛厕”自己就是臭毛厕,说别人和杨荫榆女士同乡,就是自己和她同乡。赵子昂也实在可笑,要画马,看看真马就够了,何必定作畜生的姿势;他终于还是人,并不沦入马类,总算是侥幸的。不过赵子昂也是“某籍”,所以这也许还是一种“流言”,或自造,或那时的“正人君子”所造都说不定。这只能看作一种无稽之谈。倘若陈源教授似的信以为真,自己也照样做,则写法兰斯的时候坐下做一个法姿势,讲“孤桐先生”的时候立起作一个孤姿势,倒还堂哉皇哉;可是讲“粪车”也就得伏地变成粪车,说“毛厕”即须翻身充当便所,未免连臭架子也有些失掉罢,虽然肚子里本来满是这样的货色。 | |
| “不是有一次一个报馆访员称我们为‘文士’吗?鲁迅先生为了那名字几乎笑掉了牙。可是后来某报天天鼓吹他是‘思想界的权威者’他倒又不笑了。 | |
| “他没有一篇文章里不放几枝冷箭,但是他自己常常的说人‘放冷箭’,并且说‘放冷箭’是卑劣的行为。 | |
| “他常常‘散布流言’和‘捏造事实’,如上面举出来的几个例,但是他自己又常常的骂人‘散布流言’‘捏造事实’,并且承认那样是‘下流’。 | |
| “他常常的无故骂人,要是那人生气,他就说人家没有‘幽默’。可是要是有人侵犯了他一言半语,他就跳到半天空,骂得你体无完肤——还不肯罢休。” | |
| 这是根据了三条例和一个赵子昂故事的结论。其实是称别个为“文士”我也笑,称我为“思想界的权威者”我也笑,但牙却并非“笑掉”,据说是“打掉”的,这较可以使他们快意些。至于“思想界的权威者”等等,我连夜梦里也没有想做过,无奈我和“鼓吹”的人不相识,无从劝止他,不像唱双簧的朋友,可以彼此心照;况且自然会有“文士”来骂倒,更无须自己费力。我也不想借这些头衔去发财发福,有了它于实利上是并无什么好处的。我也曾反对过将自己的小说采入教科书,怕的是教错了青年,记得曾在报上发表;不过这本不是对上流人说的,他们当然不知道。冷箭呢,先是不肯的,后来也放过几枝,但总是对于先“放冷箭”用“流言”的如陈源教授之辈,“请君入瓮”,也给他尝尝这滋味。不过虽然对于他们,也还是明说的时候多,例如《语丝》上的《音乐》就说明是指徐志摩先生,《我的籍和系》和《并非闲话》也分明对西滢即陈源教授而发;此后也还要射,并无悔祸之心。至于署名,则去年以来只用一个,就是陈教授之所谓“鲁迅,即教育部佥事周树人”就是。但在下半年,应将“教育部佥事”五字删去,因为被“孤桐先生”所革;今年却又变了“暂署佥事”了,还未去做,然而豫备去做的,目的是在弄几文俸钱,因为我祖宗没有遗产,老婆没有奁田,文章又不值钱,只好以此暂且糊口。还有一个小目的,是在对于以我去年的免官为“痛快”者,给他一个不舒服,使他恨得扒耳搔腮,忍不住露出本相。至于“流言”,则先已说过,正是陈源教授首先发明的专卖品,独有他听到过许多;在我呢,心术是看不见的东西,且勿说,我的躲在家里的生活即不利于作“捏……言”的枢纽。剩下的只有“幽默”问题了,我又没有说过这些话,也没有主张过“幽默”,也许将这两字连写,今天还算 | |
| 第一回。我对人是“骂人”,人对我是“侵犯了一言半语”,这真使我记起我的同乡“刑名师爷”来,而且还是弄着不正经的“出重出轻”的玩意儿的时候。这样看来,一面镜子确是该有的,无论生在那一县。还有罪状哩—— | |
| “他常常挖苦别人家抄袭。有一个学生钞了沫若的几句诗,他老先生骂得刻骨镂心的痛快,可是他自己的《中国小说史略》,却就是根据日本人盐谷温的《支那文学概论讲话》里面的‘小说’一部分。其实拿人家的著述做你自己的蓝本,本可以原谅,只要你在书中有那样的声明,可是鲁迅先生就没有那样的声明。在我们看来,你自己做了不正当的事也就罢了,何苦再去挖苦一个可怜的学生,可是他还尽量的把人家刻薄。‘窃钩者诛,窃国者侯’,本是自古已有的道理。” | |
| 这“流言”早听到过了;后来见于《闲话》,说是“整大本的摽窃”,但不直指我,而同时有些人的口头上,却相传是指我的《中国小说史略》。我相信陈源教授是一定会干这样勾当的。但他既不指名,我也就只回敬他一通骂街,这可实在不止“侵犯了他一言半语”。这回说出来了;我的“以小人之心”也没有猜错了“君子之腹”。但那罪名却改为“做你自己的蓝本”了,比先前轻得多,仿佛比自谦为“一言半语”的“冷箭”钝了一点似的。盐谷氏的书,确是我的参考书之一,我的《小说史略》二十八篇的 | |
| 第二篇,是根据它的,还有论《红楼梦》的几点和一张《贾氏系图》,也是根据它的,但不过是大意,次序和意见就很不同。其他二十六篇,我都有我独立的准备,证据是和他的所说还时常相反。例如现有的汉人小说,他以为真,我以为假;唐人小说的分类他据森槐南,我却用我法。六朝小说他据《汉魏丛书》,我据别本及自己的辑本,这工夫曾经费去两年多,稿本有十册在这里;唐人小说他据谬误最多的《唐人说荟》,我是用《太平广记》的,此外还一本一本搜起来……。其余分量,取舍,考证的不同,尤难枚举。自然,大致是不能不同的,例如他说汉后有唐,唐后有宋,我也这样说,因为都以中国史实为“蓝本”。我无法“捏造得新奇”,虽然塞文狄斯的事实和“四书”合成的时代也不妨创造。但我的意见,却以为似乎不可,因为历史和诗歌小说是两样的。诗歌小说虽有人说同是天才即不妨所见略同,所作相像,但我以为究竟也以独创为贵;历史则是纪事,固然不当偷成书,但也不必全两样。说诗歌、小说相类不妨,历史有几点近似便是“剽窃”,那是“正人君子”的特别意见,只在以“一言半语”“侵犯”“鲁迅先生”时才适用的。好在盐谷氏的书听说(!)已有人译成(?)中文,两书的异点如何,怎样“整大本的摽窃”,还是做“蓝本”,不久(?)就可以明白了。在这以前,我以为恐怕连陈源教授自己也不知道这些底细,因为不过是听来的“耳食之言”。不知道对不对?(盐谷教授的《支那文学概论讲话》的译本,今年夏天看见了,将五百余页的原书,译成了薄薄的一本,那小说一部份,和我的也无从对比了。广告上却道“选译”。措辞实在聪明得很。十月十四日补记。) | |
| 但我还要对于“一个学生钞了沫若的几句诗”这事说几句话;“骂得刻骨镂心的痛快”的,似乎并不是我。因为我于诗向不留心,所以也没有看过“沫若的诗”,因此即更不知道别人的是否钞袭。陈源教授的那些话,说得坏一点,就是“捏造事实”,故意挑拨别人对我的恶感,真可以说发挥着他的真本领。说得客气一点呢,他自说写这信时是在“发热”,那一定是热度太高,发了昏,忘记装腔了,不幸显出本相;并且因为自己爬着。所以觉得我“跳到半天空”,自己抓破了皮肤或者一向就破着,却以为被我“骂”破了。——但是,我在有意或无意中碰破了一角纸糊绅士服,那也许倒是有的;此后也保不定。彼此迎面而来,总不免要挤擦,碰磕,也并非“还不肯罢休”。 | |
| 绅士的跳踉丑态,实在特别好看,因为历来隐藏蕴蓄着,所以一来就比下等人更浓厚。因这一回的放泄,我才悟到陈源教授大概是以为揭发叔华女士的剽窃小说图画的文章,也是我做的,所以早就将“大盗”两字挂在“冷箭”上,射向“思想界的权威者”。殊不知这也不是我做的,我并不看这些小说。“琵亚词侣”的画,我是爱看的,但是没有书,直到那“剽窃”问题发生后,才刺激我去买了一本Art of A. Beardsley来,化钱一元七。可怜教授的心目中所看见的并不是我的影,叫跳竟都白费了。遇见的“粪车”,也是境由心造的,正是自己脑子里的货色,要吐的唾沫,还是静静的咽下去罢。 | |
| 太费纸张了,虽然我不至于娇贵到会发热,但也得赶紧的收梢,然而还得粘上一段大罪状—— | |
| “据他自己的自传,他从民国元年便做了教育部的官,从没脱离过。所以袁世凯称帝,他在教育部,曹锟贿选,他在教育部,‘代表无耻的彭允彝’做总长,他也在教育部,甚而至于‘代表无耻的章士钊’免了他的职后,他还大嚷‘佥事这一个官儿倒也并不算怎样的“区区”’,怎样有人在那里钻谋补他的缺,怎样以为无足轻重的人是‘慷他人之慨’,如是如是,这样这样……这像‘青年叛徒的领 | |