Lu Xun Complete Works/zh-hi/Mingtian

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Tomorrow (明天)

Lu Xun (鲁迅, Lǔ Xùn, 1881–1936)


中文(原文) हिन्दी

原来鲁镇是僻静地方,还有些古风:不上一更,大家便都关门睡觉。深更半夜没有睡的只有两家:一家是咸亨酒店,几个酒肉朋友围着柜台,吃喝得正高兴;一家便是间壁的单四嫂子,他自从前年守了寡,便须专靠着自己的一双手纺出绵纱来,养活他自己和他三岁的儿子,所以睡的也迟。

संग्रह युद्ध-नाद (《呐喊》) से

लेखक: लू शुन (鲁迅)

चीनी से हिंदी में अनुवाद।

ड्रैगन बोट उत्सव (端午节)

फ़ांग श्वानचुओ (方玄绰) ने हाल ही में "लगभग एक समान" कहने की आदत अपना ली थी, इस हद तक कि यह लगभग उनकी मुहावरा बन गई; और वे केवल कहते ही नहीं, सचमुच यह उनके मन में बैठ गया था। पहले "सब एक समान" कहते, फिर "लगभग एक समान" में बदला, और इसी का प्रयोग जारी रहा।

इस साधारण उक्ति की खोज के बाद, यद्यपि नई कटुता मिली, साथ ही सांत्वना भी। बड़ों को युवाओं पर अत्याचार करते देख पहले क्रोध, अब सोचते: जब इन युवाओं के पुत्र-पौत्र होंगे, वे भी वही करेंगे। सैनिक को रिक्शा चालक पीटते देख सोचते: यदि स्थान बदलें, वही होगा। कभी संदेह कि पलायन मार्ग गढ़ रहे — "नैतिक बोध का अभाव" — किंतु विचार बढ़ता गया।

प्रथम सार्वजनिक प्रकटीकरण पेइचिंग के शाओशान विद्यालय (首善学校) की कक्षा में हुआ। ऐतिहासिक चर्चा से बात छात्रों और नौकरशाहों पर: "नौकरशाह कोई अलग प्रजाति नहीं; कम नहीं जो कभी छात्र थे। 'उसी स्थान पर वही करोगे': विचार, वाणी, कर्म में अंतर नहीं... छात्र संगठनों के उद्यम भी दोषपूर्ण, अधिकांश विलुप्त। लगभग एक समान। चीन के भविष्य की चिंता यहीं।"

वास्तव में सब गलत थे — यह असंतोष का नवीन रूप, यद्यपि निष्क्रिय अटकल। वे अचल, अनुरूपतावादी। पद सुरक्षित तो मुँह बंद; बकाया हो किंतु अधिकारी-वेतन मिले तो चुप। शिक्षकों ने वेतन माँगा — गुपचुप "अत्यधिक शोर" माना। सरकार ने कहा "पहले पढ़ाओ" और एक शिक्षाविद् ने कहा "पैसे माँगना गरिमाहीन" — तब पत्नी से शिकायत।

बर्फ़ीली बारिश में शिक्षक शिनहुआ द्वार (新华门) पर पीटे गए। कुछ वेतन मिला। फ़ांग श्वानचुओ ने बिना हिले हिस्सा लिया, पुराने कर्ज़ चुकाए। बाद में सरकार ने अधिकारियों की भी उपेक्षा शुरू की; ईमानदार अधिकारी स्वयं वेतन-सभाओं के अगुआ बने।

त्योहार निकट, आर्थिक स्थिति निराशाजनक। श्रीमती फ़ांग भी सम्मान कम करती जातीं। पाँचवें मास के चौथे दिन बिलों का पुलंदा — एक सौ अस्सी युआन। चेक था किंतु प्रतिनिधि नहीं बाँटते; बैंक बंद, तीन दिन अवकाश, आठवीं तक प्रतीक्षा। जिन योंगशेंग (金永生) से उधार — मना।

"त्योहार जैसे संकट में कौन उधार देगा?" श्रीमती फ़ांग उदासीन स्वर में बोलीं। तब पिछले वर्षांत याद आया: एक हमवतन को दस युआन उधार मना किया था — "सहायता वश में नहीं" — खाली हाथ विदा किया। अब असहज अनुभव।

रात लियानहुआबाई (莲花白) शराब उधार मँगवाई। दो प्याले, चेहरा लाल, प्रसन्न। सिगरेट जलाया, प्रयोग संग्रह (尝试集) लेकर बिस्तर पर। पत्नी: "कल व्यापारियों का?" — "आठवीं दोपहर कहो।" — "विश्वास नहीं करेंगे।" — "पूछ सकते हैं: किसी को नहीं मिला!" तर्जनी से अर्धवृत्त।

"ऐसे नहीं चलेगा; कोई और काम..." — "क्या? 'लेखन में प्रतिलिपिकार नहीं, शस्त्र में अग्निशामक नहीं।'" — "शंघाई की दुकानों के लिए?" — "अक्षर गिनकर देती हैं, रिक्त स्थान नहीं। रॉयल्टी आधे वर्ष से लापता।" — "अख़बार?" — "हज़ार अक्षर पर कुछ सिक्के! पेट में इतने लेख कहाँ?" — "त्योहार के बाद?" — "अधिकारी बने रहना।"

पत्नी: "लॉटरी टिकट ख़रीदें..." — "बेतुका!" किंतु उसी क्षण याद आया: दाओशियांगचुन (稻香村) के सामने "प्रथम पुरस्कार" का पोस्टर देखकर कुछ भीतर हिला, शायद कदम धीमे हुए, किंतु जेब के छह जिआओ से अलग न हो सके। चेहरे का रंग बदला। पत्नी बिना वाक्य पूरा किए हटीं। वे भी पसरकर ज़ोर से प्रयोग संग्रह पढ़ने लगे।


(जून 1922.)


सुखी परिवार (幸福的家庭)

(पूर्ण पाठ: सुखी परिवार पृष्ठ देखें)


एकाकी (孤独者)

(पूर्ण पाठ: एकाकी पृष्ठ देखें)


भाई (弟兄)

(पूर्ण पाठ: भाई पृष्ठ देखें)


साबुन (肥皂)

(पूर्ण पाठ: साबुन पृष्ठ देखें)


(1918–1926.)