Lu Xun Complete Works/zh-hi/Guxiang
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故乡 — गृहनगर (故乡)
| 中文 (Chinese) | हिंदी (Hindi) |
|---|---|
| नोट / 注意: इस रचना में चीनी में 4137 और हिंदी में 90 अनुच्छेद हैं। पूर्ण पाठ के लिए: 中文 और हिंदी। | |
| 一九二七年 | गृहनगर |
| 黄花节的杂感 | कड़ाके की ठंड सहते हुए, मैंने दो हज़ार से अधिक ली की यात्रा करके उस गृहनगर को लौटा जिसे बीस से अधिक वर्ष पहले छोड़ा था। |
| 黄花节将近了,必须做一点所谓文章。但对于这一个题目的文章,教我做起来,实在近于先前的在考场里“对空策”。因为,——说出来自己也惭愧,——黄花节这三个字,我自然明白它是什么意思的;然而战死在黄花冈头的战士们呢,不但姓名,连人数也不知道。 | शीत ऋतु अपनी गहराई में थी। जैसे-जैसे निकट पहुँचा, मौसम मेघाच्छादित हो गया; एक ठंडी हवा नौका की कोठरी में से कराहती बहती थी। छत्र की दरार से झाँकते हुए, पीले आकाश के नीचे, दूर-निकट बिखरे कुछ उजाड़, परित्यक्त गाँव दिखे — जीवन का कोई चिह्न नहीं। मेरा हृदय उदासी से भर गया। |
| 为寻些材料,好发议论起见,只得查《辞源》。书里面有是有的,可不过是: | अहा! क्या यही वह गृहनगर था जिसे मैंने इन बीस वर्षों में इतनी बार स्मरण किया? |
| “黄花冈,地名,在广东省城北门外白云山之麓。清宣统三年三月二十九日,革命党数十人,攻袭督署,不成而死,丛葬于此。” | जो गृहनगर मुझे याद था, वह इससे बिलकुल भिन्न था। मेरा गृहनगर कहीं अधिक सुंदर रहा था। किंतु जब उसकी सुंदरता को स्मरण करने का, उसके गुणों को शब्दों में बाँधने का प्रयास किया, तो न कोई छवि मिली न कोई शब्द। लगता था शायद सदा से ऐसा ही रहा हो। तब मैंने स्वयं को समझाया: गृहनगर सदा से ऐसा ही था — यद्यपि कोई प्रगति नहीं हुई, किंतु जितना उजाड़ मैं अनुभव कर रहा था उतना अनिवार्यतः नहीं; यह मात्र मेरे मनोभाव का परिवर्तन था, क्योंकि इस बार मैं प्रसन्न चित्त से नहीं लौटा था। |
| 轻描淡写,和我所知道的差不多,于我并不能有所裨益。 | मैं विशेष रूप से विदा लेने आया था। वह पुराना घर जहाँ हमारा कुल बहुत वर्षों से संयुक्त रूप से रहता आया था, दूसरे परिवार को बेच दिया गया था। उसे सौंपने की अवधि इसी वर्ष के भीतर थी, अतः मुझे नववर्ष के प्रथम दिन से पूर्व आकर परिचित पुराने घर से अंतिम विदा लेनी थी, परिचित गृहनगर को सदा के लिए पीछे छोड़कर उस सुदूर स्थान को जाना था जहाँ मैं जीविकोपार्जन करता था। |
| 我又愿意知道一点十七年前的三月二十九日的情形,但一时也找不到目击耳闻的耆老。从别的地方——如北京,南京,我的故乡——的例子推想起来,当时大概有若干人痛惜,若干人快意,若干人没有什么意见,若干人当作酒后茶余的谈助的罢。接着便将被人们忘却。久受压制的人们,被压制时只能忍苦,幸而解放了便只知道作乐,悲壮剧是不能久留在记忆里的。 | अगली सुबह मैं अपने घर के द्वार पर पहुँचा। छत की खपरैलों पर टूटे सूखे तिनके हवा में काँप रहे थे — स्पष्ट बता रहे थे कि इस पुराने घर का स्वामित्व बदलना अपरिहार्य क्यों था। अन्य शाखाओं के संबंधी संभवतः पहले ही जा चुके थे, क्योंकि बड़ा सन्नाटा था। जब मैं हमारे भाग के सामने पहुँचा, माँ पहले से स्वागत के लिए निकल आई थीं, और उनके ठीक पीछे मेरा आठ वर्षीय भतीजा होंगर दौड़ा आया। |
| 但是三月二十九日的事却特别,当时虽然失败,十月就是武昌起义,第二年,中华民国便出现了。于是这些失败的战士,当时也就成为革命成功的先驱;悲壮剧刚要收场,又添上一个团圆剧的结束。这于我们是很可庆幸的,我想,在纪念黄花节的时候便可以看出。 | माँ बहुत प्रसन्न थीं, किंतु उनके चेहरे पर गहरी उदासी भी छिपी थी। उन्होंने मुझे बैठने, विश्राम करने, चाय पीने को कहा, और अभी स्थानांतरण की बात नहीं उठाई। होंगर ने मुझे कभी देखा नहीं था और दूर खड़ा टकटकी लगाए देखता रहा। |
| 我还没有亲自遇见过黄花节的纪念,因为久在北方。不过,中山先生的纪念日却遇见过了:在学校里,晚上来看演剧的特别多,连凳子也踏破了几条,非常热闹。用这例子来推断,那么,黄花节也一定该是极其热闹的罢。 | किंतु अंततः स्थानांतरण की चर्चा हुई। मैंने बताया कि शहर में किराये का मकान ले लिया है और कुछ फ़र्नीचर ख़रीद लिया है; इसके अतिरिक्त, घर का सारा लकड़ी का सामान बेचकर वहाँ नया लेना होगा। माँ सहमत हुईं; कहा कि अधिकांश सामान बाँध दिया गया है, भारी फ़र्नीचर आधा बिक चुका है — बस भुगतान वसूल करना कठिन है। |
| 当三月十二日那天的晚上,我在热闹场中,便深深地更感得革命家的伟大。我想,恋爱成功的时候,一个爱人死掉了,只能给生存的那一个以悲哀。然而革命成功的时候,革命家死掉了,却能每年给生存的大家以热闹,甚而至于欢欣鼓舞。惟独革命家,无论他生或死,都能给大家以幸福。同是爱,结果却有这样地不同,正无怪现在的青年,很有许多感到恋爱和革命的冲突的苦闷。 | "एक-दो दिन आराम करो, संबंधियों से मिलो, फिर चलेंगे," माँ ने कहा। |
| 以上的所谓“革命成功”,是指暂时的事而言;其实是“革命尚未成功”的。革命无止境,倘使世上真有什么“止于至善”,这人间世便同时变了凝固的东西了。不过,中国经了许多战士的精神和血肉的培养,却的确长出了一点先前所没有的幸福的花果来,也还有逐渐生长的希望。倘若不像有,那是因为继续培养的人们少,而赏玩,攀折这花,摘食这果实的人们倒是太多的缘故。 | "हाँ।" |
| 我并非说,大家都须天天去痛哭流涕,以凭吊先烈的“在天之灵”,一年中有一天记起他们也就可以了。但就广东的现在而论,我却觉得大家对于节日的办法,还须改良一点。黄花节很热闹,热闹一天自然也好;热闹得疲劳了,回去就好好地睡一觉。然而第二天,元气恢复了,就该加工做一天自己该做的工作。这当然是劳苦的,但总比枪弹从致命的地方穿过去要好得远;何况这也算是在培养幸福的花果,为着后来的人们呢。 | "और रुंतू है। जब भी हमारे घर आता है, तुम्हारे बारे में पूछता है। तुमसे बहुत मिलना चाहता है। मैंने उसे तुम्हारे आने का अनुमानित समय बता दिया है; शायद किसी भी दिन आ जाए।" |
| (三月二十四日夜。) | उसी क्षण एक अद्भुत चित्र मेरे मन में कौंधा: गहरे नीले आकाश में टँगा सुनहरा पूर्ण चंद्रमा, और उसके नीचे समुद्रतटीय बालू का मैदान, जहाँ तक दृष्टि जाए पन्ने-से हरे तरबूज़ लगे हुए। उनके बीच ग्यारह-बारह वर्ष का एक बालक खड़ा था, गले में चाँदी का छल्ला, हाथों में इस्पात का त्रिशूल, पूरी शक्ति से एक बिज्जू पर वार करता — किंतु जंतु शरीर मोड़कर उसके पैरों के बीच से निकल भागा। |
| 略论中国人的脸 | वह बालक रुंतू था। जब मैंने उसे पहली बार जाना, मैं स्वयं दस से अधिक वर्ष का नहीं था; तब से लगभग तीस वर्ष बीत चुके थे। उन दिनों पिता जीवित थे, परिवार संपन्न था, और मैं एक कुलपुत्र था। उस वर्ष हमारे परिवार की बारी थी महान पूर्वज-बलि का आयोजन करने की। कहा जाता था कि यह अनुष्ठान तीस-कुछ वर्षों में एक बार आता था, अतः अत्यंत गंभीरता से संपन्न किया जाता। प्रथम मास में पूर्वज-चित्र सजाए जाते, भेंट प्रचुर होती, अनुष्ठान-पात्र बहुमूल्य — और अनेक लोग पूजा करने आते — उन पात्रों की चोरी से रक्षा भी करनी होती। हमारे परिवार में केवल एक मौसमी मज़दूर था। वह अकेला सँभाल नहीं सकता था, अतः उसने पिता से कहा कि वह अपने पुत्र रुंतू को पात्रों की रखवाली के लिए भेज सकता है। |
| 大约人们一遇到不大看惯的东西,总不免以为他古怪。我还记得初看见西洋人的时候,就觉得他脸太白,头发太黄,眼珠太淡,鼻梁太高。虽然不能明明白白地说出理由来,但总而言之:相貌不应该如此。至于对于中国人的脸,是毫无异议;即使有好丑之别,然而都不错的。 | पिता सहमत हो गए, और मैं भी प्रसन्न हुआ, क्योंकि रुंतू का नाम बहुत पहले सुना था और जानता था कि वह मेरी ही आयु का है, अधिकमास में जन्मा, और पंचतत्वों में पृथ्वी की कमी है — इसीलिए उसके पिता ने उसका नाम रुंतू रखा, अर्थात् "अधिक-पृथ्वी"। वह जाल लगाकर छोटे पक्षी पकड़ना जानता था। |
| 我们的古人,倒似乎并不放松自己中国人的相貌。周的孟轲就用眸子来判胸中的正不正,汉朝还有《相人》二十四卷。后来闹这玩艺儿的尤其多;分起来,可以说有两派罢:一是从脸上看出他的智愚贤不肖;一是从脸上看出他过去,现在和将来的荣枯。于是天下纷纷,从此多事,许多人就都战战兢兢地研究自己的脸。我想,镜子的发明,恐怕这些人和小姐们是大有功劳的。不过近来前一派已经不大有人讲究,在北京、上海这些地方捣鬼的都只是后一派了。 | तब से मैं नववर्ष के दिन गिनने लगा, क्योंकि नववर्ष के साथ रुंतू आएगा। अंततः वर्ष का अंत निकट आया, और एक दिन माँ ने बताया कि रुंतू आ गया है। मैं दौड़कर गया। वह रसोई में था; गोल चेहरा, गहरा बैंगनी रंग, छोटी नमदे की टोपी, चमकदार चाँदी का गले का छल्ला — यह संकेत था कि उसके पिता उसे अत्यंत प्रेम करते थे और, मृत्यु के भय से, देवताओं और बुद्ध के समक्ष प्रतिज्ञा करके उसे छल्ले से बाँधकर सुरक्षित रखा था। वह अजनबियों के सामने बहुत लजीला था, किंतु मेरे सामने नहीं; जब कोई और न होता, वह मुझसे बातें करता, और आधे ही दिन में हम गहरे मित्र बन गए। |
| 我一向只留心西洋人。留心的结果,又觉得他们的皮肤未免太粗;毫毛有白色的,也不好。皮上常有红点,即因为颜色太白之故,倒不如我们之黄。尤其不好的是红鼻子,有时简直象是将要熔化的蜡烛油,仿佛就要滴下来,使人看得栗栗危惧,也不及黄色人种的较为隐晦,也见得较为安全。总而言之:相貌还是不应该如此的。 | हमने क्या-क्या बातें कीं, अब स्मरण नहीं; बस इतना याद है कि रुंतू बहुत प्रसन्न था और बोला कि शहर आने के बाद उसने बहुत कुछ ऐसा देखा जो पहले कभी नहीं देखा था। |
| 后来,我看见西洋人所画的中国人,才知道他们对于我们的相貌也很不敬。那似乎是《天方夜谈》或者《安兑生童话》中的插画,现在不很记得清楚了。头上戴着拖花翎的红缨帽,一条辫子在空中飞扬,朝靴的粉底非常之厚。但这些都是满洲人连累我们的。独有两眼歪斜,张嘴露齿,却是我们自己本来的相貌。不过我那时想,其实并不尽然,外国人特地要奚落我们,所以格外形容得过度了。 | अगले दिन मैंने उससे पक्षी पकड़ने को कहा। उसने कहा: |
| 但此后对于中国一部分人们的相貌,我也逐渐感到一种不满,就是他们每看见不常见的事件或华丽的女人,听到有些醉心的说话的时候,下巴总要慢慢挂下,将嘴张了开来。这实在不大雅观;仿佛精神上缺少着一样什么机件。据研究人体的学者们说,一头附着在上颚骨上,那一头附着在下颚骨上的“咬筋”,力量是非常之大的。我们幼小时候想吃核桃,必须放在门缝里将它的壳夹碎。但在成人,只要牙齿好,那咬筋一收缩,便能咬碎一个核桃。有着这么大的力量的筋,有时竟不能收住一个并不沉重的自己的下巴,虽然正在看得出神的时候,倒也情有可原,但我总以为究竟不是十分体面的事。 | "अभी नहीं। भारी हिमपात चाहिए। हमारी रेतीली ज़मीन पर, जब हिम गिरती है, मैं एक जगह साफ़ करता हूँ, एक बड़ी बाँस की छलनी को छोटी डंडी से टिकाता हूँ, नीचे भूसी बिखेरता हूँ, और जब पक्षी खाने आते हैं, दूर से डंडी में बँधी रस्सी खींचता हूँ — और वे छलनी के नीचे फँस जाते हैं। सब तरह के: चावल-मुर्गियाँ, सींगदार तीतर, फ़ाख्ताएँ, नीलपृष्ठ..." |
| 日本的长谷川如是闲是善于做讽刺文字的。去年我见过他的一本随笔集,叫作《猫·狗·人》;其中有一篇就说到中国人的脸。大意是初见中国人,即令人感到较之日本人或西洋人,脸上总欠缺着一点什么。久而久之,看惯了,便觉得这样已经尽够,并不缺少东西;倒是看得西洋人之流的脸上,多余着一点什么。这多余着的东西,他就给它一个不大高妙的名目:兽性。中国人的脸上没有这个,是人,则加上多余的东西,即成了下列的算式: | तब मैं फिर से हिमपात की कामना करने लगा। |
| 人+兽性=西洋人 | रुंतू ने मुझे और भी बताया: |
| 他借了称赞中国人,贬斥西洋人,来讥刺日本人的目的,这样就达到了,自然不必再说这兽性的不见于中国人的脸上,是本来没有的呢,还是现在已经消除。如果是后来消除的,那么,是渐渐净尽而只剩了人性的呢,还是不过渐渐成了驯顺。野牛成为家牛,野猪成为猪,狼成为狗,野性是消失了,但只足使牧人喜欢,于本身并无好处。人不过是人,不再夹杂着别的东西,当然再好没有了。倘不得已,我以为还不如带些兽性,如果合于下列的算式倒是不很有趣的: | "अभी बहुत सर्दी है, पर गर्मियों में हमारे यहाँ आना। दिन में हम समुद्रतट पर सीपियाँ चुनते हैं — लाल, हरी, भूत-डरावनी और बुद्ध-हस्त। रात को मैं पिता के साथ तरबूज़ों की रखवाली करता हूँ; तुम भी आना।" |
| 人+家畜性=某一种人 | "चोरों से?" |
| 中国人的脸上真可有兽性的记号的疑案,暂且中止讨论罢。我只要说近来却在中国人所理想的古今人的脸上,看见了两种多余。一到广州,我觉得比我所从来的厦门丰富得多的,是电影,而且大半是“国片”,有古装的,有时装的。因为电影是“艺术”,所以电影艺术家便将这两种多余加上去了。 | "नहीं। कोई राहगीर प्यासा हो और एक तरबूज़ तोड़ ले, तो यहाँ उसे चोरी नहीं मानते। जिनसे सावधान रहना होता है वे हैं बिज्जू, साही, और 'छा'। चाँदनी रात में सुनो — एक सरसराहट, 'छा' तरबूज़ कुतर रहा है। त्रिशूल उठाओ और धीरे-धीरे पास जाओ..." |
| 古装的电影也可以说是好看,那好看不下于看戏;至少,决不至于有大锣大鼓将人的耳朵震聋。在“银幕”上,则有身穿不知何时何代的衣服的人物,缓慢地动作;脸正如古人一般死,因为要显得活,便只好加上些旧式戏子的昏庸。 | उस समय मुझे पता नहीं था कि यह 'छा' नामक प्राणी क्या है — आज तक नहीं जानता — मैंने बस अस्पष्ट रूप से कल्पना की कि वह छोटे कुत्ते जैसा कोई उग्र जंतु होगा। |
| 时装人物的脸,只要见过清朝光绪年间上海的吴友如的《画报》的,便会觉得神态非常相像。《画报》所画的大抵不是流氓拆梢,便是妓女吃醋,所以脸相都狡猾。这精神似乎至今不变,国产影片中的人物,虽是作者以为善人杰士者,眉宇间也总带些上海洋场式的狡猾。可见不如此,是连善人杰士也做不成的。 | "काटता नहीं?" |
| 听说,国产影片之所以多,是因为华侨欢迎,能够获利,每一新片到,老的便带了孩子去指点给他们看道:“看哪,我们的祖国的人们是这样的。”在广州似乎也受欢迎,日夜四场,我常见看客坐得满满。 | "त्रिशूल इसीलिए है। जब पास पहुँचो और 'छा' दिखे, वार करो। वह बड़ा चालाक है — तुम्हारी ओर झपटता है, पर फिर तुम्हारे पैरों के बीच से निकल जाता है। उसकी खाल तेल जैसी चिकनी है..." |
| 广州现在也如上海一样,正在这样地修养他们的趣味。可惜电影一开演,电灯一定熄灭,我不能看见人们的下巴。 | मैंने कभी नहीं जाना था कि संसार में इतने अद्भुत रहस्य हैं: समुद्रतट पर अनेक रंगों की सीपियाँ; और तरबूज़ों के ऐसे ख़तरनाक साहसिक अनुभव — मैंने तो उन्हें केवल फल की दुकान में सजे देखा था। |
| (四月六日。) | "हमारी रेतीली ज़मीन पर, जब ज्वार आता है, तो झुंड-के-झुंड कीचड़-मछलियाँ उछलती हैं, हर एक के दो पैर मेंढक जैसे..." |
| 革命时代的文学 | अहा! रुंतू के मन में अद्भुत कथाओं का अक्षय भंडार था, सब मेरे सामान्य खेल-साथियों को अज्ञात। उन्हें ऐसी किसी बात का पता नहीं था; जबकि रुंतू समुद्रतट पर था, वे — मेरी ही भाँति — केवल प्रांगण की ऊँची दीवारों के ऊपर आकाश का चौकोर टुकड़ा देख पाते थे। |
| ——四月八日在黄埔军官学校讲 | दुर्भाग्यवश, प्रथम मास बीत गया और रुंतू को घर लौटना पड़ा। मैं फूट-फूटकर रोया, और वह भी रसोई में छिपकर रोता रहा, जाने से मना करता रहा, किंतु अंततः उसके पिता उसे ले गए। बाद में उसने पिता के माध्यम से मुझे एक पुड़िया सीपियाँ और कुछ सुंदर पक्षी-पंख भिजवाए; मैंने भी उसे एक-दो बार कुछ भेजा, किंतु उसके बाद हम कभी नहीं मिले। |
| 今天要讲几句的话是就将这“革命时代的文学”算作题目。这学校是邀过我好几次了,我总是推宕着没有来。为什么呢?因为我想,诸君的所以来邀我,大约是因为我曾经做过几篇小说,是文学家,要从我这里听文学。其实我并不是的,并不懂什么。我首先正经学习的是开矿,叫我讲掘煤,也许比讲文学要好一些。自然,因为自己的嗜好,文学书是也时常看看的,不过并无心得,能说出于诸君有用的东西来。加以这几年,自己在北京所得的经验,对于一向所知道的前人所讲的文学的议论,都渐渐的怀疑起来。那是开枪打杀学生的时候罢,文禁也严厉了,我想:文学文学,是最不中用的,没有力量的人讲的;有实力的人并不开口,就杀人,被压迫的人讲几句话,写几个字,就要被杀;即使幸而不被杀,但天天呐喊,叫苦,鸣不平,而有实力的人仍然压迫,虐待,杀戮,没有方法对付他们,这文学于人们又有什么益处呢? | अब माँ ने उसका उल्लेख किया तो बचपन की सारी स्मृतियाँ एक झलक में उमड़ आईं, और लगा मानो अपना सुंदर गृहनगर अपने सामने देख रहा हूँ। मैंने तत्काल उत्तर दिया: |
| 在自然界里也这样,鹰的捕雀,不声不响的是鹰,吱吱叫喊的是雀;猫的捕鼠,不声不响的是猫,吱吱叫喊的是老鼠;结果,还是只会开口的被不开口的吃掉。文学家弄得好,做几篇文章,也许能够称誉于当时,或者得到多少年的虚名罢,——譬如一个烈士的追悼会开过之后,烈士的事情早已不提了,大家倒传诵着谁的挽联做得好:这实在是一件很稳当的 | "कितना अच्छा! वह — कैसा है?..." |
| 买卖。 | "वह?... उसकी भी दशा ठीक नहीं..." माँ ने दरवाज़े की ओर देखते हुए कहा। "वे फिर आ रहे हैं। कहते हैं फ़र्नीचर ख़रीदना है, पर जो हाथ लगे उठा ले जाते हैं। मुझे जाकर देखना चाहिए।" |
| 但在这革命地方的文学家,恐怕总喜欢说文学和革命是大有关系的,例如可以用这来宣传,鼓吹,煽动,促进革命和完成革命。不过我想,这样的文章是无力的,因为好的文艺作品,向来多是不受别人命令,不顾利害,自然而然地从心中流露的东西;如果先挂起一个题目,做起文章来,那又何异于八股,在文学中并无价值,更说不到能否感动人了。为革命起见,要有“革命人”,“革命文学”倒无须急急,革命人做出东西来,才是革命文学。所以,我想:革命,倒是与文章有关系的。革命时代的文学和平时的文学不同,革命来了,文学就变换色彩。但大革命可以变换文学的色彩,小革命却不,因为不算什么革命,所以不能变换文学的色彩。在此地是听惯了“革命”了,江苏、浙江谈到革命二字,听的人都很害怕,讲的人也很危险。其实“革命”是并不稀奇的,惟其有了它,社会才会改革,人类才会进步,能从原虫到人类,从野蛮到文明,就因为没有一刻不在革命。生物学家告诉我们:“人类和猴子是没有大两样的,人类和猴子是表兄弟。”但为什么人类成了人,猴子终于是猴子呢?这就因为猴子不肯变化——它爱用四只脚走路。也许曾有一个猴子站起来,试用两脚走路的罢,但许多猴子就说:“我们底祖先一向是爬的,不许你站!”咬死了。它们不但不肯站起来,并且不肯讲话,因为它守旧。人类就不然,他终于站起,讲话,结果是他胜利了。现在也还没有完。所以革命是并不稀奇的,凡是至今还未灭亡的民族,还都天天在努力革命,虽然往往不过是小革命。 | माँ उठकर बाहर गईं। बाहर से स्त्रियों के स्वर सुनाई दिए। मैंने होंगर को पास बुलाया और बातें कीं: लिखना आता है? यात्रा करना चाहता है? |
| 大革命与文学有什么影响呢?大约可以分开三个时候来说: | "क्या हम रेलगाड़ी से जाएँगे?" |
| (一)大革命之前,所有的文学,大抵是对于种种社会状态,觉得不平,觉得痛苦,就叫苦,鸣不平,在世界文学中关于这类的文学颇不少。但这些叫苦鸣不平的文学对于革命没有什么影响,因为叫苦鸣不平,并无力量,压迫你们的人仍然不理,老鼠虽然吱吱地叫,尽管叫出很好的文学,而猫儿吃起它来,还是不客气。所以仅仅有叫苦鸣不平的文学时,这个民族还没有希望,因为止于叫苦和鸣不平。例如人们打官司,失败的方面到了分发冤单的时候,对手就知道他没有力量再打官司,事情已经了结了;所以叫苦鸣不平的文学等于喊冤,压迫者对此倒觉得放心。有些民族因为叫苦无用,连苦也不叫了,他们便成为沉默的民族,渐渐更加衰颓下去,埃及,阿拉伯,波斯,印度就都没有什么声音了!至于富有反抗性,蕴有力量的民族,因为叫苦没用,他便觉悟起来,由哀音而变为怒吼。怒吼的文学一出现,反抗就快到了;他们已经很愤怒,所以与革命爆发时代接近的文学每每带有愤怒之音;他要反抗,他要复仇。苏俄革命将起时,即有些这类的文学。但也有例外,如波兰,虽然早有复仇的文学,然而他的恢复,是靠着欧洲大战的。 | "हाँ, रेलगाड़ी से।" |
| (二)到了大革命的时代,文学没有了,没有声音了,因为大家受革命潮流的鼓荡,大家由呼喊而转入行动,大家忙着革命,没有闲空谈文学了。还有一层,是那时民生凋敝,一心寻面包吃尚且来不及,那里有心思谈文学呢?守旧的人因为受革命潮流的打击,气得发昏,也不能再唱所谓他们底文学了。有人说:“文学是穷苦的时候做的”,其实未必,穷苦的时候必定没有文学作品的,我在北京时,一穷,就到处借钱,不写一个字,到薪俸发放时,才坐下来做文章。忙的时候也必定没有文学作品,挑担的人必要把担子放下,才能做文章;拉车的人也必要把车子放下,才能做文章。大革命时代忙得很,同时又穷得很,这一部分人和那一部分人斗争,非先行变换现代社会底状态不可,没有时间也没有心思做文章;所以大革命时代的文学便只好暂归沉寂了。 | "और नाव से?" |
| (三)等到大革命成功后,社会底状态缓和了,大家底生活有余裕了,这时候就又产生文学。这时候底文学有二:一种文学是赞扬革命,称颂革命,——讴歌革命,因为进步的文学家想到社会改变,社会向前走,对于旧社会的破坏和新社会的建设,都觉得有意义,一方面对于旧制度的崩坏很高兴,一方面对于新的建设来讴歌。另有一种文学是吊旧社会的灭亡——挽歌——也是革命后会有的文学。有些的人以为这是“反革命的文学”,我想,倒也无须加以这么大的罪名。革命虽然进行,但社会上旧人物还很多,决不能一时变成新人物,他们的脑中满藏着旧思想旧东西;环境渐变,影响到他们自身的一切,于是回想旧时的舒服,便对于旧社会眷念不已,恋恋不舍,因而讲出很古的话,陈旧的话,形成这样的文学。这种文学都是悲哀的调子,表示他心里不舒服,一方面看见新的建设胜利了,一方面看见旧的制度灭亡了,所以唱起挽歌来。但是怀旧,唱挽歌,就表示已经革命了,如果没有革命,旧人物正得势,是不会唱挽歌的。 | "पहले नाव से..." |
| 不过中国没有这两种文学——对旧制度挽歌,对新制度讴歌;因为中国革命还没有成功,正是青黄不接,忙于革命的时候。不过旧文学仍然很多,报纸上的文章,几乎全是旧式。我想,这足见中国革命对于社会没有多大的改变,对于守旧的人没有多大的影响,所以旧人仍能超然物外。广东报纸所讲的文学,都是旧的,新的很少,也可以证明广东社会没有受革命影响;没有对新的讴歌,也没有对旧的挽歌,广东仍然是十年前底广东。不但如此,并且也没有叫苦,没有鸣不平;止看见工会参加游行,但这是政府允许的,不是因压迫而反抗的,也不过是奉旨革命。中国社会没有改变,所以没有怀旧的哀词,也没有崭新的进行曲,只在苏俄却已产生了这两种文学。他们的旧文学家逃亡外国,所作的文学,多是吊亡挽旧的哀词,新文学则正在努力向前走,伟大的作品虽然还没有,但是新作品已不少,他们已经离开怒吼时期而过渡到讴歌的时期了。赞美建设是革命进行以后的影响,再往后去的情形怎样,现在不得而知,但推想起来,大约是平民文学罢,因为平民的世界,是革命的结果。 | "हा! तुम्हें देखो अब! कितनी लंबी दाढ़ी!" एक तीखा, विचित्र स्वर अचानक चीख़ उठा। |
| 现在中国自然没有平民文学,世界上也还没有平民文学,所有的文学,歌呀,诗呀,大抵是给上等人看的;他们吃饱了,睡在躺椅上,捧着看。一个才子出门遇见一个佳人,两个人很要好,有一个不才子从中捣乱,生出差迟来,但终于团圆了。这样地看看,多么舒服。或者讲上等人怎样有趣和快乐,下等人怎样可笑。前几年《新青年》载过几篇小说,描写罪人在寒地里的生活,大学教授看了就不高兴,因为他们不喜欢看这样的下流人。如果诗歌描写车夫,就是下流诗歌;一出戏里,有犯罪的事情,就是下流戏。他们的戏里的脚色,止有才子佳人,才子中状元,佳人封一品夫人,在才子佳人本身很欢喜,他们看了也很欢喜,下等人没奈何,也只好替他们一同欢喜欢喜。在现在,有人以平民——工人农民——为材料,做小说做诗,我们也称之为平民文学,其实这不是平民文学,因为平民还没有开口。这是另外的人从旁看见平民的生活,假托平民底口吻而说的。眼前的文人有些虽然穷,但总比工人农民富足些,这才能有钱去读书,才能有文章;一看好象是平民所说的,其实不是;这不是真的平民小说。平民所唱的山歌野曲,现在也有人写下来,以为是平民之音了,因为是老百姓所唱。但他们间接受古书的影响很大,他们对于乡下的绅士有田三千亩,佩服得不了,每每拿绅士的思想,做自己的思想,绅士们惯吟五言诗,七言诗,因此他们所唱的山歌野曲,大半也是五言或七言。这是就格律而言,还有构思取意,也是很陈腐的,不能称是真正的平民文学。现在中国底小说和诗实在比不上别国,无可奈何,只好称之曰文学;谈不到革命时代的文学,更谈不到平民文学。现在的文学家都是读书人,如果工人农民不解放,工人农民的思想,仍然是读书人的思想,必待工人农民得到真正的解放,然后才有真正的平民文学。有些人说:“中国已有平民文学”,其实这是不对的。 | मैं चौंका और जल्दी से ऊपर देखा — लगभग पचास वर्ष की एक स्त्री मेरे सामने खड़ी थी, उभरी हुई गालों की हड्डियाँ, पतले होंठ, हाथ कमर पर टिकाए, बिना एप्रन, पैर फैलाए — बिलकुल ड्राइंग-सेट के पतले पैरों वाले कंपास जैसी। |
| 诸君是实际的战争者,是革命的战士,我以为现在还是不要佩服文学的好。学文学对于战争,没有益处,最好不过作一篇战歌,或者写得美的,便可于战余休憩时看看,倒也有趣。要讲得堂皇点,则譬如种柳树,待到柳树长大,浓阴蔽日,农夫耕作到正午,或者可以坐在柳树底下吃饭,休息休息。中国现在的社会情状,止有实地的革命战争,一首诗吓不走孙传芳,一炮就把孙传芳轰走了。自然也有人以为文学于革命是有伟力的,但我个人总觉得怀疑,文学总是一种余裕的产物,可以表示一民族的文化,倒是真的。 | मैं अवाक् रह गया। |
| 人大概是不满于自己目前所做的事的,我一向只会做几篇文章,自己也做得厌了,而捏枪的诸君,却又要听讲文学。我呢,自然倒愿意听听大炮的声音,仿佛觉得大炮的声音或者比文学的声音要好听得多似的。我的演说只有这样多,感谢诸君听完的厚意! | "पहचानते नहीं? मैं तुम्हें गोद में उठाती थी!" |
| 写在“劳动问题”之前 | मैं और भी स्तब्ध। सौभाग्य से माँ तभी भीतर आईं और एक ओर से बोलीं: |
| 还记得去年夏天住在北京的时候,遇见张我权君,听到他说过这样意思的话:“中国人似乎都忘记了台湾了,谁也不大提起。”他是一个台湾的青年。 | "इतने वर्ष दूर रहा, सब भूल गया। तुम्हें याद करना चाहिए," मेरी ओर मुड़कर कहा। "ये सामने तिरछे घर की यांग भाभी हैं — तोफ़ू की दुकान चलाती हैं।" |
| 我当时就像受了创痛似的,有点苦楚;但口上却道:“不。那倒不至于的。只因为本国太破烂,内忧外患,非常之多,自顾不暇了,所以只能将台湾这些事情暂且放下。……” | हाँ, अब याद आया। बचपन में मैंने वास्तव में एक यांग भाभी को तिरछे सामने की तोफ़ू-दुकान में दिनभर बैठे देखा था; सब उन्हें "तोफ़ू-सुंदरी" कहते। पर तब उन्होंने श्वेत पाउडर लगाया होता था, गालों की हड्डियाँ इतनी उभरी नहीं थीं, होंठ इतने पतले नहीं। और चूँकि वे सदा बैठी रहतीं, मैंने यह कंपास-रूप कभी नहीं देखा था। लोग कहते थे कि उनकी बदौलत तोफ़ू-दुकान ख़ूब चलती थी। किंतु संभवतः मेरी आयु के कारण, उनके आकर्षण का मुझ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था और इसीलिए मैं पूर्णतः भूल गया। कंपास, तथापि, अत्यंत अप्रसन्न हुईं और तिरस्कार की मुद्रा बनाईं, मानो किसी फ़्रांसीसी को नेपोलियन न जानने पर या अमेरिकी को वॉशिंगटन न जानने पर उपहास कर रही हों: |
| 但正在困苦中的台湾的青年,却并不将中国的事情暂且放下。他们常希望中国革命的成功,赞助中国的改革,总想尽些力,于中国的现在和将来有所裨益,即使是自己还在做学生。 | "भूल गया? बड़ा आदमी बनने पर यही होता है..." |
| 张秀哲君是我在广州才遇见的。我们谈了几回,知道他已经译成一部《劳动问题》给中国,还希望我做一点简短的序文。我是不善于作序,也不赞成作序的;况且对于劳动问题,一无所知,尤其没有开口的资格。我所能负责说出来的,不过是张君于中日两国的文字,俱极精通,译文定必十分可靠这一点罢了。 | "नहीं, ऐसा नहीं... मैं..." मैंने घबराकर कहा, खड़ा होते हुए। |
| 但我这回却很愿意写几句话在这一部译本之前,只要我能够。我虽然不知道劳动问题,但译者在游学中尚且为民众尽力的努力与诚意,我是觉得的。 | "तो सुनो। छोटे शुन, तुम अमीर हो गए, और यह भारी सामान ले जाने में कष्ट है। ये टूटे-फूटे फ़र्नीचर मुझे दे दो। हम जैसे साधारण लोगों के काम आ जाएँगे।" |
| 我只能以这几句话表出我个人的感激。但我相信,这努力与诚意,读者也一定都会觉得的。这实在比无论什么序文都有力。 | "मैं कहाँ अमीर हूँ। ये सामान बेचकर ही..." |
| 一九二七年四月十一日,鲁迅识于广州中山大学。 | "अरे! सर्किट अधीक्षक बन गए और कहते हो अमीर नहीं! तीन रखैलें रख ली हैं; बाहर निकलो तो आठ कहारों की पालकी — और कहते हो अमीर नहीं! हा! मेरी आँखों से कुछ नहीं छिपता।" |
| 略谈香港 | मैं जान गया कि कहने को कुछ नहीं बचा, अतः मुँह बंद करके खड़ा रहा। |
| 本年一月间我曾去过一回香港,因为跌伤的脚还未全好,不能到街上去闲走,演说一了,匆匆便归,印象淡薄得很,也早已忘却了香港了。今天看见《语丝》一三七期上辰江先生的通信,忽又记得起来,想说几句话来凑热闹。 | "हाँ, हाँ — जितने अमीर उतने कंजूस, और जितने कंजूस उतने अमीर..." कंपास नाराज़गी से पलटी, बुदबुदाती हुई, धीरे-धीरे बाहर निकली, और जाते-जाते माँ के दस्ताने चुपके से अपने कमरबंद में खोंस ले गई। |
| 我去讲演的时候,主持其事的人大约很受了许多困难,但我都不大清楚。单知道先是颇遭干涉,中途又有反对者派人索取入场券,收藏起来,使别人不能去听,后来又不许将讲稿登报,经交涉的结果,是削去和改窜了许多。 | उसके बाद और भी संबंधी और पड़ोसी आए। उनसे मिलने और सामान बाँधने में तीन-चार दिन बीत गए। |
| 然而我的讲演,真是“老生常谈”,而且还是七八年前的“常谈”。 | एक अत्यंत ठंडी दोपहर, भोजन के बाद, मैं बैठा चाय पी रहा था कि किसी के आने का आभास हुआ और मुड़कर देखा। जब देखा कि कौन है, तो एक ज़बरदस्त झटका लगा। मैं उछलकर उसकी ओर दौड़ा। |
| 从广州往香港时,在船上还亲自遇见一桩笑话。有一个船员,不知怎地,是知道我的名字的,他给我十分担心。他以为我的赴港,说不定会遭谋害;我遥遥地跑到广东来教书,而无端横死,他——广东人之一——也觉得抱歉,于是他忙了一路,替我计画,禁止上陆时如何脱身,到埠捕拿时如何避免。到埠后,既不禁止,也不捕拿,而他还不放心,临别时再三叮嘱,说倘有危险,可以避到什么地方去。 | वह रुंतू था। मैंने उसे पहली दृष्टि में पहचान लिया, फिर भी वह मेरी स्मृति का रुंतू नहीं रहा था। वह दुगुना बड़ा हो गया था; पहले का गोल, गहरे रंग का चेहरा पीला-भूरा पड़ गया था और गहरी झुर्रियों से भरा था; आँखें, पिता की तरह, चारों ओर सूजी और लाल थीं — मैं जानता था कि समुद्रतट पर खेती करने वाले, दिनभर समुद्री हवा में रहकर, प्रायः ऐसे ही दिखते हैं। सिर पर फटी नमदे की टोपी, शरीर पर केवल एक बहुत पतला रुई-भरा कुर्ता, और वह सिर से पैर तक काँप रहा था। हाथों में एक काग़ज़ की पुड़िया और एक लंबा हुक्का; वे हाथ अब वे भरे-भरे, लाल, जीवंत हाथ नहीं रहे थे — खुरदरे, भद्दे और फटे हुए, चीड़ की छाल जैसे। |
| 我虽然觉得可笑,但我从真心里十分感谢他的好心,记得他的认真的脸相。 | मैं गहन भावुक हुआ किंतु शब्द नहीं सूझे; बस इतना कह पाया: |
| 三天之后,平安地出了香港了,不过因为攻击国粹,得罪了若干人。现在回想起来,像我们似的人,大危险是大概没有的。不过香港总是一个畏途。这用小事情便可以证明。即如今天的香港《循环日报》上,有这样两条琐事: | "अरे! रुंतू भाई — तुम आ गए?..." |
| ▲陈国被控窃去芜湖街一百五十七号地下布裤一条,昨由史司判笞十二藤云。 | फिर हज़ारों बातें एक साथ उमड़ पड़ीं: तीतर, कीचड़-मछलियाँ, सीपियाँ, 'छा'... किंतु कुछ था जो सब रोक रहा था। शब्द मन में घूमते रहे, बाहर नहीं आए। |
| ▲昨晚夜深,石塘嘴有两西装男子,……遇一英警上前执行搜身。该西装男子用英语对之。该英警不理会,且警以□□□。于是双方缠上警署。…… | वह स्थिर खड़ा रहा। उसके चेहरे पर हर्ष और विषाद दोनों की अभिव्यक्ति थी; होंठ हिले, किंतु कोई स्वर नहीं निकला। अंततः उसने सम्मानपूर्ण मुद्रा धारण की और स्पष्ट उच्चारण से पुकारा: |
| 第一条我们一目了然,知道中国人还在那里被抽藤条。“司”当是“藩司”“臬司”之“司”,是官名;史者,姓也,英国人的。港报上所谓“政府”,“警司”之类,往往是指英国的而言,不看惯的很容易误解,不如上海称为“捕房”之分明。 | "मालिक!..." |
| 第二条是“搜身”的纠葛,在香港屡见不鲜。但三个方围不知道是甚么。何以要避忌?恐怕不是好的事情。这□□□似乎是因为西装和英语而得的;英警嫌恶这两件:这是主人的言语和服装。颜之推以为学鲜卑语,弹琵琶便可以生存的时代,早已过去了。 | एक सिहरन मेरे शरीर से गुज़री; मैं जान गया कि हमारे बीच एक उदास, अभेद्य दीवार खड़ी हो चुकी है। मैं भी कुछ न बोल पाया। |
| 在香港时遇见一位某君,是受了高等教育的人。他自述曾因受屈,向英官申辩,英官无话可说了,但他还是输。那最末是得到严厉的训斥,道:“总之是你错的:因为我说你错!” | उसने सिर घुमाया और कहा: "शुईशेंग, मालिक को प्रणाम करो।" अपने पीछे छिपे बच्चे को खींचकर बाहर लाया — ठीक बीस वर्ष पहले के रुंतू की प्रतिमूर्ति, बस अधिक पीला और दुबला, गले में कोई चाँदी का छल्ला नहीं। "यह मेरा पाँचवाँ है। संसार नहीं देखा, सदा छिपता रहता है..." |
| 带着书籍的人也困难,因为一不小心,会被指为“危险文件”的。这“危险”的界说,我不知其详。总之一有嫌疑,便麻烦了。人先关起来,书去译成英文,译好之后,这才审判。而这“译成英文”的事先就可怕。我记得蒙古人“入主中夏”时,裁判就用翻译。一个和尚去告状追债,而债户商同通事,将他的状子改成自愿焚身了。官说道好;于是这和尚便被推入烈火中。我去讲演的时候也偶然提起元朝,听说颇为“X司”所不悦,他们是的确在研究中国的经史的。 | माँ और होंगर नीचे आए; संभवतः आवाज़ें सुनी थीं। |
| 但讲讲元朝,不但为“政府”的“X司”所不悦,且亦为有些“同胞”所不欢。我早知道不稳当,总要受些报应的。果然,我因为谨避“学者”,搬出中山大学之后,那边的《工商报》上登出来了,说是因为“清党”,已经逃走。后来,则在《循环日报》上,以讲文学为名,提起我的事,说我原是“《晨报副刊》特约撰述员”,现在则“到了汉口”。我知道这种宣传有点危险,意在说我先是研究系的好友,现是共产党的同道,虽不至于“枪终路寝”,益处大概总不会有的,晦气点还可以因此被关起来。便写了一封信去更正: | "श्रीमतीजी। पत्र बहुत पहले मिला। मालिक के घर लौटने की ख़बर सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुआ..." रुंतू ने कहा। |
| “在六月十日十一日两天的《循环世界》里,看见徐丹甫先生的一篇《北京文艺界之分门别户》。各人各有他的眼光,心思,手段。他耍他的,我不想来多嘴。但其中有关于我的三点,我自己比较的清楚些,可以请为更正,即: | "अरे, इतना औपचारिक क्यों? तुम दोनों तो एक-दूसरे को भाई कहते थे न? पुराने तरीक़े से बोलो: छोटा शुन।" माँ ने प्रसन्नता से कहा। |
| “一,我从来没有做过《晨报副刊》的‘特约撰述员’。 | "अय्यो, श्रीमतीजी, सचमुच... यह उचित नहीं होगा। हम बच्चे थे, कुछ नहीं समझते थे..." रुंतू ने कहते हुए शुईशेंग को आगे लाकर प्रणाम करवाना चाहा, किंतु बालक लजाकर पिता की पीठ से चिपका रहा। |
| “二,陈大悲被攻击后,我并未停止投稿。 | "तो यह शुईशेंग है? पाँचवाँ? यहाँ सब अजनबी हैं, शर्माना स्वाभाविक है। होंगर इसे बाहर घुमा लाए," माँ ने कहा। |
| “三,我现仍在广州,并没有‘到了汉口’。” | होंगर ने सुनकर शुईशेंग को इशारा किया, और वह सहर्ष साथ चला गया। माँ ने रुंतू को बैठने को कहा। उसने एक क्षण संकोच किया, फिर बैठ गया, लंबा हुक्का मेज़ से टिकाया और काग़ज़ की पुड़िया आगे बढ़ाई: |
| 从发信之日到今天,算来恰恰一个月,不见登出来。“总之你是这样的:因为我说你是这样”罢。幸而还有内地的《语丝》;否则,“十二藤”,“□□□”,那里去诉苦! | "शीत ऋतु में कुछ ख़ास नहीं। बस ये सूखी हरी सेम हैं, हमने ख़ुद धूप में सुखाई हैं। कृपया, श्रीमान..." |
| 我现在还有时记起那一位船上的广东朋友,虽然神经过敏,但怕未必是无病呻吟。他经验多。 | मैंने उसकी स्थिति पूछी। उसने बस सिर हिलाया। |
| 若夫“香江”(案:盖香港之雅称)之于国粹,则确是正在大振兴而特振兴。如六月二十五日《循环日报》“昨日下午督宪府茶会”条下, | "बड़ा कठिन है। छठा बच्चा अब कुछ सहायता करने लगा है, पर फिर भी पेट नहीं भरता... और शांति नहीं है... हर जगह पैसा माँगते हैं, कोई नियम नहीं... फ़सल ख़राब। कुछ उगाओ और बाज़ार ले जाओ, तो हर बार कर वसूलते हैं, घाटा ही होता है। न बेचो तो सड़ जाता है..." |
| 就说: | बस सिर हिलाता रहा; यद्यपि चेहरे पर गहरी झुर्रियाँ खुदी थीं, एक भी पेशी नहीं हिली — पत्थर की मूर्ति जैसा। संभवतः कटुता के अतिरिक्त कुछ अनुभव ही नहीं करता था, किंतु व्यक्त नहीं कर पाता था। क्षणभर मौन के बाद उसने हुक्का उठाया और चुपचाप पीने लगा। |
| “(上略)赖济熙太史即席演说,略谓大学堂汉文专科异常重要,中国旧道德与乎国粹所关,皆不容缓视,若不贯彻进行,深为可惜,(中略)周寿臣爵士亦演说汉文之宜见重于当世,及汉文科学之重要,关系国家与个人之荣辱等语,后督宪以华语演说,略谓华人若不通汉文为第一可惜,若以华人而中英文皆通达,此后中英感情必更融洽,故大学汉文一科,非常重要,未可以等闲视之云云。(下略)” | माँ ने पूछताछ की और जाना कि घर पर बहुत काम है, कल ही लौटना होगा। चूँकि दोपहर का भोजन नहीं किया था, माँ ने कहा कि जाकर रसोई में चावल तल ले। |
| 我又记得还在报上见过一篇“金制军”的关于国粹的演说,用的是广东话,看起来颇费力;又以为这“金制军”是前清遗老,遗老的议论是千篇一律的,便不去理会它了。现在看了辰江先生的通信,才知道这“金制军”原来就是“港督”金文泰,大英国人也。大惊失色,赶紧跳起来去翻旧报。运气,在六月二十八日这张《循环日报》上寻到了。因为这是中国国粹不可不振兴的铁证,也是将来“中国国学振兴史”的贵重史料,所以毫不删节,并请广东朋友校正误字(但末尾的四句集《文选》句,因为不能悬揣“金制军”究竟如何说法,所以不敢妄改),剪贴于下,加以略注,希《语丝》记者以国学前途为重,予以排印,至纫公谊: | वह बाहर गया तो माँ और मैं दोनों उसकी स्थिति पर आहें भरने लगे: बहुत सारे बच्चे, अकाल, कर का बोझ, सैनिक और डाकू, अधिकारी और ज़मींदार — इन सबने उसे पीस-पीसकर काठ की पुतली बना दिया। माँ ने कहा कि जो सामान ले जाने की आवश्यकता नहीं वह उसे दे दो; जो चाहे चुन ले। |
| EN: 1927 | दोपहर में उसने कुछ चीज़ें चुनीं: दो लंबी मेज़ें, चार कुर्सियाँ, एक अगरबत्तीदान और मोमबत्तीदान, और एक तराज़ू। उसने सारी पुआल की राख भी माँगी (हमारे यहाँ चावल की पुआल से खाना पकता था, और राख रेतीली मिट्टी के लिए उत्तम खाद होती)। जब हम निकलेंगे तो वह अपनी नाव लेकर आएगा, सब ले जाएगा। |
| Miscellaneous Thoughts on the Yellow Flower Festival | उस संध्या हमने कुछ और बातें कीं, कोई विशेष विषय नहीं; अगली सुबह वह शुईशेंग को लेकर चला गया। |
| The Yellow Flower Festival is approaching, and one must write some sort of article. But being asked to write on this topic feels rather like answering an "empty policy question" at an examination hall, as in the old days. For -- and I am ashamed to admit it -- while I naturally understand the meaning of the three characters "Yellow Flower Festival," I know neither the names nor even the number of the soldiers who fell at Huanghuagang. | नौ और दिन बीते, और प्रस्थान का दिन आ गया। रुंतू प्रातः आया; शुईशेंग साथ नहीं था — अपनी पाँच वर्ष की बेटी को नाव सँभालने लाया था। हम दिनभर व्यस्त रहे और बातचीत का समय नहीं मिला। अनेक अतिथि भी आए: कुछ विदा करने, कुछ सामान लेने, कुछ दोनों काम करने। संध्या तक, जब हम नाव पर चढ़े, घर का हर पुराना सामान, बड़ा-छोटा, साफ़ झाड़कर ले जाया जा चुका था। |
| To find some material for the sake of forming opinions, I had no choice but to consult the Ciyuan dictionary. It did contain an entry, but only this: | हमारी नाव आगे बढ़ी। दोनों किनारों की हरी पहाड़ियाँ संध्या में गहरे नीले रंग में रँग गईं और पीछे की ओर सरकती गईं। |
| "Huanghuagang, a place name, at the foot of Baiyun Mountain outside the North Gate of the provincial capital of Guangdong. On the twenty-ninth day of the third month, in the third year of the Xuantong reign, several dozen revolutionaries attacked the Governor-General's office, failed, and died; they were buried in a mass grave there." | होंगर और मैं नाव की खिड़की से टिके, बाहर के धुँधले दृश्य को निहार रहे थे। अचानक उसने पूछा: |
| Perfunctory and sketchy, not much different from what I already knew; it was of no help to me. | "चाचा! हम कब लौटेंगे?" |
| I also wished to learn something of the events of March 29th seventeen years ago, but could find no eyewitness elders on short notice. Judging from examples in other places -- Beijing, Nanjing, my hometown -- I suppose some grieved at the time, some rejoiced, some had no opinion, and some made it a topic for idle conversation over wine and tea. Before long, it would be forgotten. People long oppressed can only endure suffering when under pressure; once liberated, they know only how to make merry -- heroic tragedies cannot long remain in memory. | "लौटेंगे? अभी गए भी नहीं और लौटने की सोच रहे हो?" |
| But the events of March 29th were special: though they failed at the time, in October came the Wuchang Uprising, and the following year the Republic of China was born. Thus these defeated soldiers became the forerunners of revolutionary success; the heroic tragedy was about to end when a happy finale was appended. This is cause for celebration, and one can see it in the commemoration of the Yellow Flower Festival. | "पर शुईशेंग ने मुझे अपने घर खेलने बुलाया है..." वह अपनी बड़ी काली आँखों से स्वप्निल दृष्टि से देखता रहा। |
| On the evening of March 12th, amidst the festivities, I felt all the more deeply the greatness of the revolutionary. When love succeeds and one lover dies, it can only bring sorrow to the survivor. But when revolution succeeds and the revolutionary dies, it brings annual festivity to the surviving masses -- even jubilation. Only the revolutionary, whether alive or dead, can bring happiness to all. | माँ और मैं भी कुछ विह्वल हुए, और फिर से रुंतू की चर्चा हुई। माँ ने बताया कि तोफ़ू-सुंदरी यांग, जब से हमने सामान बाँधना शुरू किया, प्रतिदिन आती रही। दो दिन पहले उसने राख के ढेर में से दर्जन भर से अधिक कटोरे और तश्तरियाँ निकालीं, और कुछ चर्चा के बाद घोषित किया कि रुंतू ने ज़रूर उन्हें वहाँ गाड़ रखा है ताकि राख के साथ घर ले जाए। इस षड्यंत्र की खोज का श्रेय लेकर, यांग भाभी "कुत्ता-छेड़" (हमारे यहाँ मुर्गी-चारा-पात्र: लकड़ी की तश्तरी जिसके ऊपर जाली — मुर्गियाँ गर्दन डालकर खा सकतीं, कुत्ता नहीं, बस देखकर जलभुन जाता) उठाकर भाग गईं। अपने ऊँची एड़ी के बँधे पाँवों के बावजूद, वे आश्चर्यजनक तेज़ी से दौड़ीं। |
| The "revolutionary success" referred to above is only a temporary matter; in truth, "the revolution has not yet succeeded." Revolution knows no end. Nevertheless, nurtured by the spirit and flesh and blood of many soldiers, China has indeed produced some flowers and fruits of happiness that did not exist before. | पुराना घर हमसे दूर, और दूर होता गया; गृहनगर के पहाड़ और नदियाँ धीरे-धीरे ओझल हो रहे थे। किंतु मुझे विशेष विरह अनुभव नहीं हुआ। मैंने बस यही अनुभव किया कि अदृश्य ऊँची दीवारें मुझे चारों ओर से घेरे हैं, मुझे एकांत में काटकर, दबा रही हैं। तरबूज़ के खेत में चाँदी के गले-छल्ले वाले छोटे नायक की छवि, जो अभी इतनी स्पष्ट थी, अचानक धुँधली हो गई — और इससे मुझे गहरा दुःख हुआ। |
| (Night of March 24th.) | माँ और होंगर सो गए थे। |
| A Brief Discussion of Chinese Faces | मैं लेटा हुआ, पतवार के नीचे पानी की बड़बड़ाहट सुन रहा था, जानता था कि मैं अपने मार्ग पर हूँ। सोचा: रुंतू और मेरे बीच यह हो गया! किंतु हमारी संतानें तो अभी एक-हृदय हैं — क्या होंगर इसी क्षण शुईशेंग के विषय में नहीं सोच रहा? मैं चाहता था कि वे हमारी तरह एक-दूसरे से दूर न हों... किंतु मैं नहीं चाहता था कि वे, एकता बनाए रखने के लिए, मेरी-सी परिश्रम और बेचैनी का जीवन जिएँ; न ही चाहता था कि वे रुंतू जैसा परिश्रम और जड़ता का जीवन जिएँ; न ही औरों-सा परिश्रम और निर्लज्ज स्वेच्छाचार का। उन्हें एक नया जीवन मिले, ऐसा जो हमने कभी नहीं जिया। |
| When people encounter something unfamiliar, they inevitably find it strange. I still remember when I first saw Westerners: I thought their faces too white, their hair too yellow, their eyes too pale, their noses too high. Though I could not clearly articulate the reasons, in short: faces should not look like that. | आशा पर विचार करते हुए अचानक भय ने मुझे जकड़ लिया। जब रुंतू ने अगरबत्तीदान और मोमबत्तीदान माँगा था, मैंने मन-ही-मन उस पर हँसा था — सोचा कि वह सदा मूर्तिपूजा करता है, कभी भूलता नहीं। किंतु जिसे मैं अभी "आशा" कह रहा हूँ, क्या वह भी मेरी अपनी गढ़ी हुई प्रतिमा नहीं? अंतर बस इतना था कि उसकी कामना तत्काल थी, और मेरी सुदूर और अस्पष्ट। |
| Our ancients did not seem to let Chinese physiognomy off so easily. Mencius judged the uprightness of a man's heart by his pupils; in the Han dynasty there were twenty-four volumes of "The Art of Reading Faces." Later, far more people took up this pursuit; they can be divided into two schools: one that read intelligence or stupidity from the face, and another that read past, present, and future fortune. | तंद्रा में, मेरी आँखों के सामने समुद्रतट का पन्ने-सा हरा बालू का मैदान फैल गया, ऊपर गहरा नीला आकाश और एक सुनहरा पूर्ण चंद्रमा। मैंने सोचा: आशा को न तो अस्तित्व में कहा जा सकता है, न ही अनस्तित्व में। यह ठीक पृथ्वी के पथों की भाँति है। वस्तुतः पृथ्वी पर आदि में कोई पथ नहीं था, किंतु जब बहुत लोग एक ही मार्ग पर चले, तो पथ बन गया। |
| The Japanese Hasegawa Nyozekan was skilled at writing satire. In his essay collection "Cats, Dogs, and People," one piece discusses Chinese faces. The gist is: upon first seeing a Chinese person, one feels that the face always seems to be missing something compared to Japanese or Westerners. Over time, one grows accustomed and feels this is quite enough; rather, it is the faces of Westerners that have something superfluous. He gives this element a none too flattering name: bestiality. | (जनवरी 1921) |
| Human + Bestiality = Westerner | |
| Human + Domestic Animal Nature = A Certain Kind of Person | |
| Guangzhou is now, like Shanghai, cultivating its tastes in this way. It is a pity that when a film begins, the lights are always extinguished, and I cannot observe people's chins. | |
| (April 6th.) | |
| Literature in the Age of Revolution -- Delivered on April 8th at the Huangpu Military Academy | |
| What I wish to say today takes as its topic "Literature in the Age of Revolution." This school has invited me several times, and I have always put it off. My proper training was in mining; to lecture on coal extraction might suit me better than on literature. In truth "revolution" is nothing extraordinary -- precisely because of it, society reforms, humanity progresses. | |
| You gentlemen are actual fighters, revolutionary soldiers. I think it is better for now not to admire literature. In China's current social condition, only actual revolutionary warfare counts -- a poem cannot drive away Sun Chuanfang, but a cannon can. | |
| My speech is only this much -- I thank you for your kind patience! | |
| Preface to "The Labor Problem" | |
| I recall that last summer, while living in Beijing, I met Mr. Zhang Woquan and heard him say: "It seems the Chinese have all forgotten Taiwan; hardly anyone mentions it." He was a young Taiwanese. | |
| Mr. Zhang Xiuzhe had translated a book on "The Labor Problem" for China. What I can responsibly say is that Mr. Zhang has excellent command of both Chinese and Japanese, and the translation must therefore be highly reliable. | |
| April 11, 1927, Lu Xun, written at Sun Yat-sen University in Guangzhou. | |
| Brief Remarks on Hong Kong | |
| In January of this year, I visited Hong Kong once. When I went to lecture, the organizers apparently encountered great difficulties. On the boat from Guangzhou to Hong Kong, a crew member who somehow knew my name was extremely worried about me, fearing my trip might result in assassination. | |
| In Hong Kong I met a gentleman who had received higher education. He recounted that once, having suffered an injustice, he argued his case before a British official; the official was left speechless -- yet he still lost. The final verdict was a harsh rebuke: "In any case, you are wrong -- because I say you are wrong!" | |
| "In any case, you are this way -- because I say you are this way." Fortunately there is still Yusi on the mainland; otherwise, with "twelve strokes" and "[redacted]," where could one even complain! | |
| As for "Xiang Jiang" (the elegant name for Hong Kong) and national heritage -- it is indeed being vigorously and emphatically revived. | |
| DE: 1927 | |
| Vermischte Gedanken zum Huanghua-Gedenktag | |
| Das Huanghua-Fest naht, und man muss wohl einige sogenannte Aufsaetze verfassen. Doch einen Aufsatz zu diesem Thema zu schreiben, kommt mir beinahe so vor wie einst in der Pruefungshalle eine "Antwort ins Leere" zu formulieren. Denn -- ich schaeme mich, es auszusprechen -- die drei Schriftzeichen "Huanghua-Fest" verstehe ich natuerlich in ihrer Bedeutung; doch von den Kaempfern, die auf dem Huanghua-Huegel fielen, kenne ich weder die Namen noch ihre Zahl. | |
| Um einiges Material zu finden und Ansichten darlegen zu koennen, schlug ich im Ciyuan nach. Im Buch fand sich zwar etwas, doch nicht mehr als dies: | |
| "Huanghuagang, Ortsname, am Fusse des Berges Baiyun ausserhalb des Nordtors der Provinzhauptstadt Guangdong gelegen. Am neunundzwanzigsten Tag des dritten Monats im dritten Jahr der Regierungsdevise Xuantong griffen einige Dutzend Revolutionaere das Gouverneursamt an, scheiterten und starben; sie wurden hier in einem Gemeinschaftsgrab beigesetzt." | |
| Oberflaechlich und knapp, nicht viel anders als das, was ich bereits wusste; fuer mich war es keinerlei Gewinn. | |
| Ich haette auch gerne etwas ueber die Umstaende des 29. Maerz vor siebzehn Jahren erfahren, konnte jedoch auf die Schnelle keine Aeltesten finden, die Augenzeugen gewesen waeren. Aus Beispielen anderer Orte -- etwa Peking, Nanjing oder meiner Heimat -- laesst sich vermuten, dass damals wohl manche trauerten, manche sich freuten, manche keine Meinung hatten und manche es als Gespraechsstoff bei Wein und Tee verwendeten. Bald darauf wurde es von den Menschen vergessen. Lang unterdrueckte Menschen koennen in der Unterdrueckung nur still leiden; wenn sie dann einmal befreit werden, wissen sie nur noch zu feiern -- heroische Tragoedien koennen nicht lange im Gedaechtnis haften bleiben. | |
| Doch die Ereignisse des 29. Maerz waren besonders: Obwohl sie damals scheiterten, folgte im Oktober der Wuchang-Aufstand, und im naechsten Jahr entstand die Republik China. So wurden die gescheiterten Kaempfer zu Vorreitern des Revolutionserfolgs; die heroische Tragoedie stand gerade vor ihrem Ende, als noch ein glueckliches Finale hinzugefuegt wurde. Dies koennen wir als sehr erfreulich betrachten, und ich denke, man kann es an der Feier des Huanghua-Festes ablesen. | |
| Ich selbst habe die Huanghua-Gedenkfeier noch nie persoenlich erlebt, da ich lange im Norden war. Allerdings habe ich den Gedenktag fuer Herrn Sun Yat-sen erlebt: An der Schule kamen abends besonders viele, um die Theaterauffuehrung zu sehen, sogar einige Baenke gingen dabei zu Bruch -- es war aeusserst lebhaft. Wenn man dieses Beispiel heranzieht, dann muss das Huanghua-Fest wohl ebenso ueberaus lebhaft sein. | |
| Am Abend des 12. Maerz empfand ich inmitten des Trubels umso tiefer die Groesse der Revolutionaere. Wenn die Liebe Erfolg hat und ein Liebender stirbt, so kann das dem Ueberlebenden nur Trauer bringen. Wenn aber die Revolution Erfolg hat und der Revolutionaer stirbt, kann er jedes Jahr den Ueberlebenden Festlichkeit schenken, ja sogar Jubel und Begeisterung. Nur der Revolutionaer vermag, ob er lebt oder stirbt, allen Glueck zu bringen. Dieselbe Liebe, und doch so verschiedene Ergebnisse -- kein Wunder, dass heutzutage viele junge Menschen die qualvolle Spannung zwischen Liebe und Revolution empfinden. | |
| Das oben erwaehnte "Gelingen der Revolution" bezieht sich auf voruebergehende Umstaende; tatsaechlich ist "die Revolution noch nicht vollendet". Revolution kennt kein Ende; gaebe es in der Welt wirklich so etwas wie "bei hoechster Guete innehalten", so wuerde diese Menschenwelt zugleich zu etwas Erstarrtem. Immerhin hat China, genaehrt durch den Geist und das Fleisch und Blut vieler Kaempfer, tatsaechlich einige Blueten und Fruechte des Gluecks hervorgebracht, die es zuvor nicht gab, und auch noch Hoffnung auf weiteres Wachstum. Wenn es nicht so aussieht, dann deshalb, weil zu wenige weiter naehren, waehrend zu viele diese Blueten bewundern, pfluecken und die Fruechte verzehren. | |
| Ich sage nicht, dass alle taeglich bitterlich weinen muessen, um den "Geist im Himmel" der Gefallenen zu ehren -- ein Tag im Jahr des Gedenkens genuegt. Doch fuer Guangdong in der Gegenwart finde ich, dass man die Art der Feiertagsgestaltung noch etwas verbessern sollte. Das Huanghua-Fest ist lebhaft, ein Tag des Trubels ist natuerlich gut; wenn man vor Trubel erschoepft ist, geht man nach Hause und schlaeft sich ordentlich aus. Doch am naechsten Tag, wenn die Kraefte wiederhergestellt sind, sollte man sich an die Arbeit machen, die man zu tun hat. Das ist gewiss muehsam, aber es ist bei Weitem besser, als eine Kugel durch eine toedliche Stelle hindurchgehen zu lassen; zumal auch dies bedeutet, die Blueten und Fruechte des Gluecks zu naehren, fuer die Menschen, die nach uns kommen. | |
| (Nacht des 24. Maerz.) | |
| Kurze Betrachtung ueber die Gesichter der Chinesen | |
| Wenn Menschen auf etwas stossen, das sie nicht gewohnt sind, halten sie es unweigerlich fuer seltsam. Ich erinnere mich noch, als ich zum ersten Mal Westler sah: Ich fand ihre Gesichter zu weiss, ihr Haar zu blond, ihre Augen zu blass, ihre Nasenruecken zu hoch. Obwohl ich keine klaren Gruende haette nennen koennen, war mein Gesamteindruck: So sollte ein Gesicht nicht aussehen. Was die Gesichter der Chinesen betraf, gab es keinerlei Einwaende; es mochte Unterschiede zwischen Huebschen und Haesslichen geben, aber alle waren in Ordnung. | |
| Unsere Vorfahren schienen die Gesichter ihrer chinesischen Mitmenschen keineswegs unkritisch zu betrachten. Mengzi in der Zhou-Dynastie beurteilte die Aufrichtigkeit eines Herzens anhand der Pupillen; in der Han-Dynastie gab es gar vierundzwanzig Baende von "Menschenbeurteilung". Spaeter trieben noch weit mehr Leute dieses Spiel; man kann sie in zwei Schulen einteilen: Die eine las vom Gesicht die Klugheit oder Dummheit, Tugend oder Untauglichkeit eines Menschen ab; die andere erkannte in seinem Gesicht Vergangenheit, Gegenwart und Zukunft seines Auf- und Abstiegs. So geriet die Welt in Unruhe, und viele Menschen begannen angsterfuellt, ihre eigenen Gesichter zu studieren. | |
| Der Japaner Hasegawa Nyozekan ist ein geschickter Satiriker. Letztes Jahr las ich seine Essaysammlung "Katzen, Hunde und Menschen"; darin schreibt er auch ueber die Gesichter der Chinesen. Der Kerngedanke ist: Wenn man zum ersten Mal Chinesen sieht, spuert man verglichen mit Japanern oder Westlern stets, dass ihren Gesichtern etwas fehlt. Gewoehnt man sich aber daran, so findet man, es reicht so vollkommen; vielmehr haben die Gesichter der Westler etwas Ueberfluessiges. Dieses Ueberfluessige benennt er mit einem wenig schmeichelhaften Wort: Bestialitaet. Im Gesicht der Chinesen fehlt diese, und wenn man einem Menschen das Ueberfluessige hinzufuegt, ergibt sich folgende Gleichung: | |
| Mensch + Bestialitaet = Westler | |
| Mensch + Haustier-Natur = eine gewisse Art Mensch | |
| Guangzhou schult nun, genau wie Shanghai, auf diese Weise seinen Geschmack. Leider werden bei Filmbeginn immer die Lichter geloescht, sodass ich die Unterkiefer der Menschen nicht sehen kann. | |
| (6. April.) | |
| Literatur in Zeiten der Revolution -- Vorgetragen am 8. April an der Militaerakademie Huangpu | |
| Was ich heute in einigen Worten ansprechen moechte, hat die "Literatur in Zeiten der Revolution" zum Thema. Diese Schule hatte mich schon mehrfach eingeladen, doch ich hatte es stets aufgeschoben. Warum? Weil ich dachte: Der Grund Ihrer Einladung ist wohl, dass ich einige Erzaehlungen geschrieben habe, also ein Literat bin, und Sie von mir ueber Literatur hoeren moechten. In Wirklichkeit bin ich das nicht und verstehe auch nichts davon. Mein urspruengliches Fachstudium war der Bergbau; ueber Kohleabbau zu sprechen, koennte mir womoeglich besser gelingen als ueber Literatur. | |
| Revolution ist also nichts Aussergewoehnliches; alle Voelker, die bis heute nicht untergegangen sind, bemuehen sich Tag fuer Tag um Revolution, wenn auch meist nur um kleine. | |
| Meine Herren, Sie sind Praktiker des Krieges, Kaempfer der Revolution; ich meine, es ist besser, die Literatur vorerst nicht zu bewundern. Das Studium der Literatur nuetzt dem Krieg nichts. In Chinas gegenwaertiger Lage zaehlt nur der wirkliche Revolutionskrieg; ein Gedicht kann Sun Chuanfang nicht vertreiben, eine Kanone aber schon. | |
| Mein Vortrag ist hiermit beendet -- ich danke Ihnen fuer Ihre Geduld! | |
| Vorwort zu "Das Arbeitsproblem" | |
| Ich erinnere mich noch, als ich letzten Sommer in Peking wohnte und Herrn Zhang Woquan traf. Er sagte sinngemäss: "Die Chinesen scheinen Taiwan voellig vergessen zu haben; niemand spricht mehr davon." Er war ein junger Taiwaner. | |
| Zhang Xiuzhe uebersetzte das Buch "Das Arbeitsproblem" fuer China. Ich bin weder geschickt im Vorwortschreiben noch ein Befuerworter davon; zudem habe ich keinerlei Kenntnis vom Arbeitsproblem. Was ich verantwortlich sagen kann, ist nur, dass Herr Zhang sowohl die chinesische als auch die japanische Sprache meisterhaft beherrscht und die Uebersetzung daher gewiss hoechst zuverlaessig ist. | |
| 11. April 1927, Lu Xun, notiert an der Sun-Yat-sen-Universitaet in Guangzhou. | |
| Kurze Bemerkungen ueber Hongkong | |
| Im Januar dieses Jahres war ich einmal in Hongkong. Als ich meinen Vortrag hielt, hatten die Organisatoren wohl grosse Schwierigkeiten, doch ich wusste wenig davon. Auf der Schiffsfahrt von Guangzhou nach Hongkong erlebte ich selbst eine komische Geschichte. Ein Matrose, der irgendwie meinen Namen kannte, machte sich grosse Sorgen um mich. | |
| In Hongkong traf ich einen gewissen Herrn, der hoehere Bildung genossen hatte. Er erzaehlte, er habe sich einmal bei einem britischen Beamten beschwert; der Beamte war sprachlos -- und trotzdem verlor er. Am Ende bekam er eine strenge Ruege: "Auf jeden Fall haben Sie Unrecht -- weil ich sage, dass Sie Unrecht haben!" | |
| "Auf jeden Fall sind Sie so, weil ich sage, dass Sie so sind." Zum Glueck gibt es noch die "Yusi" im Inland; sonst -- "zwoelf Stockhiebe", "drei leere Kaestchen" -- wohin soll man sich beklagen! | |
| Was das "Xiang Jiang" (gemeint ist die elegante Bezeichnung fuer Hongkong) und das Nationalkulturerbe betrifft: Es wird dort in der Tat kraeftig wiederbelebt. | |
| FR: 1927 | |
| Reflexions diverses sur la Fete des fleurs jaunes | |
| La Fete des fleurs jaunes approche et il faut bien ecrire quelque article. Mais rediger un texte sur ce sujet me rappelle les "dissertations a vide" des anciennes salles d'examen. Car -- j'ai honte de l'avouer -- si je comprends naturellement la signification des trois caracteres "Fete des fleurs jaunes", des combattants tombes au mont Huanghua, je ne connais ni les noms ni meme le nombre. | |
| Pour trouver quelque matiere, j'ai du consulter le Ciyuan. Il contenait bien une entree, mais rien de plus que ceci : | |
| "Huanghuagang, nom de lieu, au pied du mont Baiyun, hors de la porte nord de la capitale provinciale du Guangdong. Le vingt-neuvieme jour du troisieme mois de la troisieme annee du regne Xuantong, plusieurs dizaines de revolutionnaires attaquerent le siege du gouverneur, echouerent et perirent ; ils furent enterres ici dans une fosse commune." | |
| Sommaire et lapidaire, guere different de ce que je savais deja. | |
| Mais les evenements du 29 mars furent particuliers : bien qu'ils aient echoue sur le moment, en octobre eut lieu le soulevement de Wuchang, et l'annee suivante naquit la Republique de Chine. Ainsi, ces combattants vaincus devinrent les precurseurs du succes revolutionnaire. | |
| Le soir du 12 mars, au milieu de l'effervescence, je ressentis d'autant plus profondement la grandeur du revolutionnaire. Seul le revolutionnaire, qu'il vive ou qu'il meure, peut apporter le bonheur a tous. | |
| Le "succes de la revolution" mentionne ci-dessus ne concerne que des circonstances temporaires ; en realite, "la revolution n'est pas encore accomplie". La revolution est sans fin. Neanmoins, nourrie par l'esprit, la chair et le sang de nombreux combattants, la Chine a bel et bien produit quelques fleurs et fruits du bonheur qui n'existaient pas auparavant. | |
| (Nuit du 24 mars.) | |
| Breve reflexion sur les visages des Chinois | |
| Lorsque les gens rencontrent quelque chose d'inhabituel, ils le trouvent inevitablement etrange. Je me souviens encore de la premiere fois que je vis des Occidentaux : je trouvais leur visage trop blanc, leurs cheveux trop blonds, leurs yeux trop clairs, leur nez trop haut. | |
| Nos ancetres ne semblaient pas laisser passer les physionomies chinoises sans examen. Mencius jugeait la droiture d'un coeur par les pupilles ; sous les Han, on disposait de vingt-quatre volumes de "L'art de juger les physionomies". | |
| Le Japonais Hasegawa Nyozekan etait un habile satiriste. Dans son recueil "Chats, Chiens et Hommes", il traite des visages chinois. L'idee principale est : le visage chinois semble manquer de quelque chose compare aux Occidentaux. Avec le temps, on trouve que c'est suffisant ; c'est plutot le visage des Occidentaux qui a quelque chose de trop : la bestialite. | |
| Homme + Bestialite = Occidental | |
| Homme + Nature d'animal domestique = Une certaine sorte d'homme | |
| Canton, comme Shanghai, cultive ainsi son gout. Dommage qu'au debut de chaque film, les lumieres s'eteignent et que je ne puisse observer le menton des spectateurs. | |
| (6 avril.) | |
| La litterature a l'epoque de la revolution -- Conference prononcee le 8 avril a l'Academie militaire de Huangpu | |
| Ce que je souhaite dire aujourd'hui prend pour sujet "La litterature a l'epoque de la revolution". Cette ecole m'a invite a plusieurs reprises. Ma formation initiale etait l'industrie miniere. En verite, la "revolution" n'a rien d'extraordinaire -- c'est precisement grace a elle que la societe se reforme, que l'humanite progresse. | |
| Messieurs, vous etes des combattants de la revolution. Je pense qu'il vaut mieux pour l'instant ne pas admirer la litterature. Dans la situation actuelle de la Chine, seule la guerre revolutionnaire concrete compte -- un poeme ne peut pas chasser Sun Chuanfang, mais un canon le peut. | |
| Mon discours s'arrete ici -- merci de votre aimable patience ! | |
| Preface au "Probleme du travail" | |
| Je me souviens qu'a l'ete dernier, vivant a Pekin, je rencontrai M. Zhang Woquan qui me dit : "Les Chinois semblent avoir completement oublie Taiwan." C'etait un jeune Taiwanais. | |
| M. Zhang Xiuzhe avait traduit un ouvrage sur "Le probleme du travail" pour la Chine. Tout ce que je peux dire, c'est que M. Zhang maitrise parfaitement le chinois et le japonais, et que sa traduction est assurement tres fiable. | |
| 11 avril 1927, Lu Xun, a l'Universite Sun Yat-sen de Canton. | |
| Breves remarques sur Hong Kong | |
| En janvier de cette annee, je me rendis une fois a Hong Kong. Lors de ma conference, les organisateurs eurent de grandes difficultes. Sur le bateau de Canton a Hong Kong, un matelot qui connaissait mon nom s'inquietait terriblement pour moi, craignant un assassinat. | |
| A Hong Kong, je rencontrai un monsieur ayant recu une education superieure. Il raconta qu'un jour, victime d'une injustice, il plaida sa cause devant un fonctionnaire britannique ; le fonctionnaire resta sans voix -- et pourtant il perdit. La sentence finale fut : "De toute facon, vous avez tort -- parce que je dis que vous avez tort !" | |
| "De toute facon, vous etes ainsi -- parce que je dis que vous etes ainsi." Heureusement qu'il reste le Yusi de l'interieur ; sinon, avec les "douze coups de rotin" et les "trois cases vides", ou pourrait-on se plaindre ! | |
| Quant au "Xiang Jiang" (le nom elegant de Hong Kong) et au patrimoine national -- il y est en effet vigoureusement ressuscite. | |
| 俗语说:“忠厚是无用的别名”,也许太刻薄一点罢,但仔细想来,却也觉得并非唆人作恶之谈,乃是归纳了许多苦楚的经历之后的警句。譬如不打落水狗说,其成因大概有二:一是无力打;二是比例错。前者且勿论;后者的大错就又有二:一是误将塌台人物和落水狗齐观,二是不辨塌台人物又有好有坏,于是视同一律,结果反成为纵恶。即以现在而论,因为政局的不安定,真是此起彼伏如转轮,坏人靠着冰山,恣行无忌,一旦失足,忽而乞怜,而曾经亲见,或亲受其噬啮的老实人,乃忽以“落水狗”视之,不但不打,甚至于还有哀矜之意,自以为公理已伸,侠义这时正在我这里。殊不知它何尝真是落水,巢窟是早已造好的了,食料是早经储足的了,并且都在租界里。虽然有时似乎受伤,其实并不,至多不过是假装跛脚,聊以引起人们的恻隐之心,可以从容避匿罢了。他日复来,仍旧先咬老实人开手,“投石下井”,无所不为,寻起原因来,一部分就正因为老实人不“打落水狗”之故。所以,要是说得苛刻一点,也就是自家掘坑自家埋,怨天尤人,全是错误的。 | |
| 六 论现在还不能一味“费厄” | |
| 仁人们或者要问:那么,我们竟不要“费厄泼赖”么?我可以立刻回答:当然是要的,然而尚早。这就是“请君入瓮”法。虽然仁人们未必肯用,但我还可以言之成理。土绅士或洋绅士们不是常常说,中国自有特别国情,外国的平等自由等等,不能适用么?我以为这“费厄泼赖”也是其一。否则,他对你不“费厄”,你却对他去“费厄”,结果总是自己吃亏,不但要“费厄”而不可得,并且连要不“费厄”而亦不可得。所以要“费厄”,最好是首先看清对手,倘是些不配承受“费厄”的,大可以老实不客气;待到它也“费厄”了,然后再与它讲“费厄”不迟。 | |
| 这似乎很有主张二重道德之嫌,但是也出于不得已,因为倘不如此,中国将不能有较好的路。中国现在有许多二重道德,主与奴,男与女,都有不同的道德,还没有划一。要是对“落水狗”和“落水人”独独一视同仁,实在未免太偏,太早,正如绅士们之所谓自由平等并非不好,在中国却微嫌太早一样。所以倘有人要普遍施行“费厄泼赖”精神,我以为至少须俟所谓“落水狗”者带有人气之后。但现在自然也非绝不可行,就是,有如上文所说:要看清对手。而且还要有等差,即“费厄”必视对手之如何而施,无论其怎样落水,为人也则帮之,为狗也则不管之,为坏狗也则打之。一言以蔽之:“党同伐异”而已矣。 | |
| 满心“婆理”而满口“公理”的绅士们的名言暂且置之不论不议之列,即使真心人所大叫的公理,在现今的中国,也还不能救助好人,甚至于反而保护坏人。因为当坏人得志,虐待好人的时候,即使有人大叫公理,他决不听从,叫喊仅止于叫喊,好人仍然受苦。然而偶有一时,好人或稍稍蹶起,则坏人本该落水了,可是,真心的公理论者又“勿报复”呀,“仁恕”呀,“勿以恶抗恶”呀……的大嚷起来。这一次却发生实效,并非空嚷了:好人正以为然,而坏人于是得救。但他得救之后,无非以为占了便宜,何尝改悔;并且因为是早已营就三窟,又善于钻谋的,所以不多时,也就依然声势赫奕,作恶又如先前一样。这时候,公理论者自然又要大叫,但这回他却不听你了。 | |
| 但是,“疾恶太严”,“操之过急”,汉的清流和明的东林,却正以这一点倾败,论者也常常这样责备他们。殊不知那一面,何尝不“疾善如仇”呢?人们却不说一句话。假使此后光明和黑暗还不能作彻底的战斗,老实人误将纵恶当作宽容,一味姑息下去,则现在似的混沌状态,是可以无穷无尽的。 | |
| 七 论“即以其人之道还治其人之身” | |
| 中国人或信中医或信西医,现在较大的城市中往往并有两种医,使他们各得其所。我以为这确是极好的事。倘能推而广之,怨声一定还要少得多,或者天下竟可以臻于郅治。例如民国的通礼是鞠躬,但若有人以为不对的,就独使他磕头。民国的法律是没有笞刑的,倘有人以为肉刑好,则这人犯罪时就特别打屁股。碗筷饭菜,是为今人而设的,有愿为燧人氏以前之民者,就请他吃生肉;再造几千间茅屋,将在大宅子里仰慕尧舜的高士都拉出来,给住在那里面;反对物质文明的,自然更应该不使他衔冤坐汽车。这样一办,真所谓“求仁得仁又何怨”,我们的耳根也就可以清净许多罢。 | |
| 但可惜大家总不肯这样办,偏要以己律人,所以天下就多事。“费厄泼赖”尤其有流弊,甚至于可以变成弱点,反给恶势力占便宜。例如刘百昭殴曳女师大学生,《现代评论》上连屁也不放,一到女师大恢复,陈西滢鼓动女大学生占据校舍时,却道“要是她们不肯走便怎样呢?你们总不好意思用强力把她们的东西搬走了罢?”殴而且拉,而且搬,是有刘百昭的先例的,何以这一回独独“不好意思”?这就因为给他嗅到了女师大这一面有些“费厄”气味之故。但这“费厄”却又变成弱点,反而给人利用了来替章士钊的“遗泽”保镳。 | |
| 八 结末 | |
| 或者要疑我上文所言,会激起新旧,或什么两派之争,使恶感更深,或相持更烈罢。但我敢断言,反改革者对于改革者的毒害,向来就并未放松过,手段的厉害也已经无以复加了。只有改革者却还在睡梦里,总是吃亏。因而中国也总是没有改革,自此以后,是应该改换些态度和方法的。 | |
| (一九二五年十二月二十九日。) | |
| 【故乡】 | |
| 我冒了严寒,回到相隔二千余里,别了二十余年的故乡去。 | |
| 时候既然是深冬;渐近故乡时,天气又阴晦了,冷风吹进船舱中,呜呜的响,从篷隙向外一望,苍黄的天底下,远近横着几个萧索的荒村,没有一些活气。我的心禁不住悲凉起来了。 | |
| 阿!这不是我二十年来时时记得的故乡? | |
| 我所记得的故乡全不如此。我的故乡好得多了。但要我记起他的美丽,说出他的佳处来,却又没有影像,没有言辞了。仿佛也就如此。于是我自己解释说:故乡本也如此,——虽然没有进步,也未必有如我所感的悲凉,这只是我自己心情的改变罢了,因为我这次回乡,本没有什么好 | |
| 心绪。 | |
| 我这次是专为了别他而来的。我们多年聚族而居的老屋,已经公同卖给别姓了,交屋的期限,只在本年,所以必须赶在正月初一以前,永别了熟识的老屋,而且远离了熟识的故乡,搬家到我在谋食的异地去。 | |
| 第二日清早晨我到了我家的门口了。瓦楞上许多枯草的断茎当风抖着,正在说明这老屋难免易主的原因。几房的本家大约已经搬走了,所以很寂静。我到了自家的房外,我的母亲早已迎着出来了,接着便飞出了八岁的侄儿宏儿。 | |
| 我的母亲很高兴,但也藏着许多凄凉的神情,教我坐下,歇息,喝茶,且不谈搬家的事。宏儿没有见过我,远远的对面站着只是看。 | |
| 但我们终于谈到搬家的事。我说外间的寓所已经租定了,又买了几件家具,此外须将家里所有的木器卖去,再去增添。母亲也说好,而且行李也略已齐集,木器不便搬运的,也小半卖去了,只是收不起钱来。 | |
| “你休息一两天,去拜望亲戚本家一回,我们便可以走了。”母亲说。 | |
| “是的。” | |
| “还有闰土,他每到我家来时,总问起你,很想见你一回面。我已经将你到家的大约日期通知他,他也许就要来了。” | |
| 这时候,我的脑里忽然闪出一幅神异的图画来:深蓝的天空中挂着一轮金黄的圆月,下面是海边的沙地,都种着一望无际的碧绿的西瓜,其间有一个十一二岁的少年,项带银圈,手捏一柄钢叉,向一匹猹尽力的刺去,那猹却将身一扭,反从他的胯下逃走了。 | |
| 这少年便是闰土。我认识他时,也不过十多岁,离现在将有三十年了;那时我的父亲还在世,家景也好,我正是一个少爷。那一年,我家是一件大祭祀的值年。这祭祀,说是三十多年才能轮到一回,所以很郑重;正月里供祖像,供品很多,祭器很讲究,拜的人也很多,祭器也很要防偷去。我家只有一个忙月(我们这里给人做工的分三种:整年给一定人家做工的叫长年;按日给人做工的叫短工;自己也种地,只在过年过节以及收租时候来给一定的人家做工的称忙月),忙不过来,他便对父亲说,可以叫他的儿子闰土来管祭器的。 | |
| 我的父亲允许了;我也很高兴,因为我早听到闰土这名字,而且知道他和我仿佛年纪,闰月生的,五行缺土,所以他的父亲叫他闰土。他是能装弶捉小鸟雀的。 | |
| 我于是日日盼望新年,新年到,闰土也就到了。好容易到了年末,有一日,母亲告诉我,闰土来了,我便飞跑的去看。他正在厨房里,紫色的圆脸,头戴一顶小毡帽,颈上套一个明晃晃的银项圈,这可见他的父亲十分爱他,怕他死去,所以在神佛面前许下愿心,用圈子将他套住了。他见人很怕羞,只是不怕我,没有旁人的时候,便和我说话,于是不到半日,我们便熟识了。 | |
| 我们那时候不知道谈些什么,只记得闰土很高兴,说是上城之后,见了许多没有见过的东西。 | |
| 第二日,我便要他捕鸟。他说: | |
| “这不能。须大雪下了才好。我们沙地上,下了雪,我扫出一块空地来,用短棒支起一个大竹匾,撒下秕谷,看鸟雀来吃时,我远远地将缚在棒上的绳子只一拉,那鸟雀就罩在竹匾下了。什么都有:稻鸡、角鸡、鹁鸪、蓝背……” | |
| 我于是又很盼望下雪。 | |
| 闰土又对我说: | |
| “现在太冷,你夏天到我们这里来。我们日里到海边检贝壳去,红的绿的都有,鬼见怕也有,观音手也有,晚上我和爹管西瓜去,你也去。” | |
| “管贼么?” | |
| “不是。走路的人口渴了摘一个瓜吃,我们这里是不算偷的。要管的是獾猪、刺蝟、猹。月亮地下,你听,啦啦的响了,猹在咬瓜了。你便捏了胡叉,轻轻地走去……” | |
| 我那时并不知道这所谓猹的是怎么一件东西——便是现在也没有知道——只是无端的觉得状如小狗而很凶猛。 | |
| “他不咬人么?” | |
| “有胡叉呢。走到了,看见猹了,你便刺。这畜生很伶俐,倒向你奔来,反从胯下窜了。他的皮毛是油一般的滑。……” | |
| 我素不知道天下有这许多新鲜事:海边有如许五色的贝壳;西瓜有这样危险的经历,我先前单知道他在水果店里出卖罢了。 | |
| “我们沙地里,潮汛要来的时候,就有许多跳鱼儿只是跳,都有青蛙似的两个脚。……” | |
| 阿!闰土的心里有无穷无尽的希奇的事,都是我往常的朋友所不知道的。他们不知道一些事,闰土在海边时,他们都和我一样只看见院子里高墙上的四角的天空。 | |
| 可惜正月过去了,闰土须回家里去,我急得大哭,他也躲到厨房里,哭着不肯出门,但终于被他父亲带走了。他后来还托他的父亲带给我一包贝壳和几枝很好看的鸟毛,我也曾送他一两次东西,但从此没有再见面。 | |
| 现在我的母亲提起了他,我这儿时的记忆,忽而全都闪电似的苏生过来,似乎看到了我的美丽的故乡了。我应声说: | |
| “这好极!他,——怎样?……” | |
| “他?……他景况也很不如意……”母亲说着,便向房外看,“这些人又来了。说是买木器,顺手也就随便拿走的,我得去看看。” | |
| 母亲站起身,出去了。门外有几个女人的声音,我便招宏儿走近面前,和他闲话:问他可会写字,可愿意出门。 | |
| “我们坐火车去么?” | |
| “我们坐火车去。” | |
| “船呢?” | |
| “先坐船,……” | |
| “哈!这模样了!胡子这么长了!”一种尖利的怪声突然大叫起来。 | |
| 我吃了一吓,赶忙抬起头,却见一个凸颧骨,薄嘴唇,五十岁上下的女人站在我面前,两手搭在髀间,没有系裙,张着两脚,正像一个画图仪器里细脚伶仃的圆规。 | |
| 我愕然了。 | |
| “不认识了么?我还抱过你咧!” | |
| 我愈加愕然了。幸而我的母亲也就进来,从旁说: | |
| “他多年出门,统忘却了。你该记得罢,”便向着我说,“这是斜对门的杨二嫂,……开豆腐店的。” | |
| 哦,我记得了。我孩子时候,在斜对门的豆腐店里确乎终日坐着一个杨二嫂,人都叫伊“豆腐西施”。但是擦着白粉,颧骨没有这么高,嘴唇也没有这么薄。而且终日坐着,我也从没有见过这圆规式的姿势。那时人说:因为伊,这豆腐店的买卖非常好。但这大约因为年龄的关系,我却并未蒙着一毫感化,所以竟完全忘却了。然而圆规很不平,显出鄙夷的神色,仿佛嗤笑法国人不知道拿破仑,美国人不知道华盛顿似的,冷笑说: | |
| “忘了?这真是贵人眼高。……” | |
| “那有这事……我……”我惶恐着,站起来说。 | |
| “那么,我对你说。迅哥儿,你阔了,搬动又笨重,你还要什么这些破烂木器,让我拿去罢。我们小户人家,用得着。” | |
| “我并没有阔哩。我须卖了这些,再去……” | |
| EN: The proverb says: Honesty is another name for uselessness. This may be a bit too harsh, but upon careful reflection, it proves to be not an incitement to evil but a maxim distilled from many bitter experiences. Take the example of not beating the dog that has fallen into the water: there are probably two reasons -- first, lack of strength; second, a faulty sense of proportion. The grave error of the second is twofold: one mistakes the fallen politician for a drowning dog; one fails to distinguish good and bad among the fallen, treats them alike, and abets evil. Even now, with the political situation unstable, evildoers lean on mountains of power, act without restraint, and once they stumble, suddenly plead for mercy. Honest people regard them as drowning dogs, refuse to strike, show compassion. Little do they know the dog never truly fell -- its lair was built long ago, its food stored, all in the foreign concession. Put harshly, they dig their own graves. | |
| Six: Why Fair Play Cannot Yet Be Practiced Without Restriction. Humane people may ask: So we should not want fair play at all? Of course we should -- but it is too early. If the other party does not show you fair play while you show it to him, you always lose. Therefore, one should first examine the opponent carefully; if unworthy, one may show no courtesy. Even public justice cannot save the good in today's China -- it protects the bad. When the good rise up, the theorists cry: No retaliation! Forbearance! Do not resist evil with evil! This time the cry is effective: the good are persuaded, and the bad are saved. | |
| Seven: On the Principle of Treating a Man by His Own Methods. In China, some believe in Chinese medicine, others in Western; in larger cities both coexist. If this principle could be extended, there would be fewer complaints. The standard greeting of the Republic is a bow; if someone considers this wrong, let him alone kowtow. The law has no flogging; if someone believes corporal punishment is good, let him be specially spanked. Anyone wishing to live before the discovery of fire should be served raw meat. Those who oppose material civilization should not ride in automobiles. Thus: He who seeks humanity finds humanity -- what cause for complaint? | |
| DE: Das Sprichwort sagt: Aufrichtigkeit ist ein anderer Name fuer Nutzlosigkeit. Das mag etwas zu schroff sein, doch bei naeherem Nachdenken erweist es sich nicht als Anstiftung zum Boesen, sondern als ein Warnwort, gewonnen aus vielen bitteren Erfahrungen. Nehmen wir das Gleichnis vom Nicht-Schlagen des ins Wasser gefallenen Hundes: Die Ursachen sind wohl zweierlei -- erstens fehlt die Kraft zum Schlagen, zweitens stimmt das Verhaeltnis nicht. Vom Ersteren abgesehen liegt der grosse Fehler des Letzteren wiederum in zweierlei: Erstens verwechselt man den gestuerzten Politiker mit einem ins Wasser gefallenen Hund; zweitens unterscheidet man nicht, dass unter den Gestuerzten Gute und Schlechte sind, behandelt sie alle gleich und foerdert so am Ende das Boese. Selbst in der Gegenwart, wo die politische Lage instabil ist, stuetzen sich die Boesen auf Machtberge, handeln zuegel- und ruecksichtslos, und sobald sie fallen, flehen sie um Mitleid. Die ehrlichen Menschen betrachten sie als ins Wasser gefallene Hunde, schlagen nicht zu, zeigen sogar Mitleid. Sie ahnen nicht, dass der Hund keineswegs wirklich ins Wasser gefallen ist -- sein Bau ist laengst gebaut, sein Futter laengst gehortet, und beides in der Konzession. Hart gesagt, grabt man sich selbst die Grube. | |
| Sechs: Warum Fair Play gegenwaertig noch nicht uneingeschraenkt gelten kann. Barmherzige Menschen moegen fragen: Wollen wir also kein Fair Play? Natuerlich wollen wir es -- aber es ist noch zu frueh. Wenn der andere dir gegenueber kein Fair Play zeigt, du ihm aber Fair Play entgegenbringst, bist am Ende immer du der Verlierer. Daher sollte man den Gegner genau betrachten: Ist er es nicht wert, darf man ungeniert zuschlagen. Selbst die oeffentliche Gerechtigkeit kann im heutigen China die Guten nicht retten -- sie schuetzt die Boesen. Wenn die Guten sich aufrichten, rufen die Gerechtigkeitstheoretiker: Keine Vergeltung! Milde! Widersteht dem Boesen nicht mit Boesem! Diesmal zeigt der Ruf Wirkung: Die Guten lassen sich ueberzeugen, und die Boesen werden gerettet. | |
| Sieben: Ueber den Grundsatz, jemandem mit seiner eigenen Methode zu begegnen. In China glauben manche an die chinesische Medizin, andere an die westliche; in den groesseren Staedten existieren beide nebeneinander. Koennte man dieses Prinzip weiter ausdehnen, gaebe es weniger Klagen. So ist der uebliche Gruss in der Republik das Verbeugen; glaubt aber jemand, das sei verkehrt, so lasse man allein ihn niederknien. Das Recht der Republik kennt keine Pruegel; meint jemand, Koerperstrafen seien gut, dann bekomme er bei einem Vergehen eigens seinen Hintern versohlt. Wer als Mensch der Zeit vor dem Feuerentdecker leben will, dem gebe man rohes Fleisch zu essen. Wer gegen die materielle Zivilisation ist, dem sollte man nicht erlauben, im Automobil zu sitzen. So verfaehrt man: Wer Menschlichkeit sucht, erhaelt Menschlichkeit -- was gaebe es zu beklagen? | |
| FR: Le proverbe dit : La probite est un autre nom pour l'inutilite. C'est peut-etre un peu severe, mais ce n'est pas une incitation au mal, mais une maxime tiree d'experiences ameres. Prenons l'exemple de ne pas frapper le chien tombe a l'eau : les raisons en sont doubles -- le manque de force et une erreur de proportion. On confond le politicien dechu avec un chien noye ; on ne distingue pas les bons et les mauvais parmi les dechus, on les traite de meme et on favorise le mal. Les malfaisants s'appuient sur des montagnes de pouvoir, et des qu'ils trebuchent, implorent la pitie. Les honnetes gens les regardent comme des chiens noyes et ne frappent pas. Ils ne savent pas que le chien n'est pas vraiment tombe a l'eau -- son repaire est construit depuis longtemps. | |
| Six : Pourquoi le fair play ne peut pas encore etre pratique sans restriction. Ne voulons-nous donc pas de fair play ? Bien sur que si -- mais c'est trop tot. Si l'autre ne vous montre pas de fair play tandis que vous lui en montrez, c'est vous qui perdez. Il faut examiner l'adversaire ; s'il n'est pas digne, on peut frapper. La justice publique ne peut sauver les bons dans la Chine d'aujourd'hui -- elle protege les mauvais. Quand les bons se relevent, les theoriciens crient : Pas de represailles ! Clemence ! Les bons se laissent convaincre, et les mauvais sont sauves. | |
| Sept : Sur le principe de traiter quelqu'un par ses propres methodes. En Chine, certains croient en la medecine chinoise, d'autres en la occidentale ; les deux coexistent dans les grandes villes. Si ce principe pouvait etre etendu, il y aurait moins de plaintes. La salutation de la Republique est l'inclinaison ; si quelqu'un la juge incorrecte, qu'il se prosterne seul. La loi ne prevoit pas de chatiment corporel ; si quelqu'un les croit bons, qu'on le punisse ainsi. Quiconque veut vivre avant la decouverte du feu, qu'on lui serve de la viande crue. Ceux qui s'opposent a la civilisation materielle ne devraient pas monter en automobile. Ainsi : Celui qui cherche l'humanite trouve l'humanite -- de quoi se plaindrait-il ? | |
| “阿呀呀,你放了道台了,还说不阔?你现在有三房姨太太;出门便是八抬的大轿,还说不阔?吓,什么都瞒不过我。” | |
| 我知道无话可说了,便闭了口,默默的站着。 | |
| “阿呀阿呀,真是愈有钱,便愈是一毫不肯放松,愈是一毫不肯放松,便愈有钱……”圆规一面愤愤的回转身,一面絮絮的说,慢慢向外走,顺便将我母亲的一副手套塞在裤腰里,出去了。 | |
| 此后又有近处的本家和亲戚来访问我。我一面应酬,偷空便收拾些行李,这样的过了三四天。 | |
| 一日是天气很冷的午后,我吃过午饭,坐着喝茶,觉得外面有人进来了,便回头去看。我看时,不由的非常出惊,慌忙站起身,迎着走去。 | |
| 这来的便是闰土。虽然我一见便知道是闰土,但又不是我这记忆上的闰土了。他身材增加了一倍;先前的紫色的圆脸,已经变作灰黄,而且加上了很深的皱纹;眼睛也像他父亲一样,周围都肿得通红,这我知道,在海边种地的人,终日吹着海风,大抵是这样的。他头上是一顶破毡帽,身上只一件极薄的棉衣,浑身瑟索着;手里提着一个纸包和一支长烟管,那手也不是我所记得的红活圆实的手,却又粗又笨而且开裂,象是松树皮了。 | |
| 我这时很兴奋,但不知道怎么说才好,只是说: | |
| “阿!闰土哥,——你来了?……” | |
| 我接着便有许多话,想要连珠一般涌出:角鸡、跳鱼儿、贝壳、猹,……但又总觉得被什么挡着似的。单在脑里面回旋,吐不出口外去。 | |
| 他站住了,脸上现出欢喜和凄凉的神情;动着嘴唇,却没有作声。他的态度终于恭敬起来了,分明的叫道: | |
| “老爷!……” | |
| 我似乎打了一个寒噤;我就知道,我们之间已经隔了一层可悲的厚障壁了,我也说不出话。 | |
| 他回过头去说:“水生,给老爷磕头。”便拖出躲在背后的孩子来,这正是一个廿年前的闰土,只是黄瘦些,颈子上没有银圈罢了。“这是第五个孩子,没有见过世面,躲躲闪闪。……” | |
| 母亲和宏儿下楼来了,他们大约也听到了声音。 | |
| “老太太。信是早收到了。我实在喜欢的了不得,知道老爷回来……”闰土说。 | |
| “阿,你怎的这样客气起来。你们先前不是哥弟称呼么?还是照旧:迅哥儿。”母亲高兴的说。 | |
| “阿呀,老太太真是……这成什么规矩。那时是孩子,不懂事……”闰土说着,又叫水生上来打拱,那孩子却害羞,紧紧的只贴在他背后。 | |
| “他就是水生?第五个?都是生人,怕生也难怪的;还是宏儿和他去走走。”母亲说。 | |
| 宏儿听得这话,便来招水生,水生却松松爽爽同他一路出去了。母亲叫闰土坐,他迟疑了一回,终于就了坐,将长烟管靠在桌旁,递过纸包来,说: | |
| “冬天没有什么东西了。这一点干青豆倒是自家晒在那里的,请老爷……。” | |
| 我问问他的景况。他只是摇头。 | |
| “非常难。第六个孩子也会帮忙了,却总是吃不够……又不太平……什么地方都要钱,没有定规……收成又坏。种出东西来,挑去卖,总要捐几回钱,折了本;不去卖,又只能烂掉。……” | |
| 他只是摇头;脸上虽然刻着许多皱纹,却全然不动,仿佛石像一般。他大约只是觉得苦,却又形容不出,沉默了片时,便拿起烟管来默默的吸烟了。 | |
| 母亲问他,知道他的家里事务忙,明天便得回去;又没有吃过午饭,便叫他自己到厨下炒饭吃去。 | |
| 他出去了;母亲和我都叹息他的景况:多子、饥荒、苛税、兵匪、官绅,都苦得他像一个木偶人了。母亲对我说,凡是不必搬走的东西,尽可以送他,可以听他自己去拣择。 | |
| 下午,他拣好了几件东西:两条长桌,四个椅子,一副香炉和烛台,一杆抬秤。他又要所有的草灰(我们这里煮饭是烧稻草的,那灰,可以做沙地的肥料),待我们启程的时候,他用船来载去。 | |
| 夜间,我们又谈些闲天,都是无关紧要的话;第二天早晨,他就领了水生回去了。 | |
| 又过了九日,是我们启程的日期。闰土早晨便到了,水生没有同来,却只带着一个五岁的女儿管船只。我们终日很忙碌,再没有谈天的工夫。来客也不少,有送行的,有拿东西的,有送行兼拿东西的。待到傍晚我们上船的时候,这老屋里的所有破旧大小粗细东西,已经一扫而空了。 | |
| 我们的船向前走,两岸的青山在黄昏中,都装成了深黛颜色,连着退向船后梢去。 | |
| 宏儿和我靠着船窗,同看外面模糊的风景,他忽然问道: | |
| “大伯!我们什么时候回来?” | |
| “回来?你怎么还没有走就想回来了。” | |
| “可是,水生约我到他家玩去咧……”他睁着大的黑眼睛,痴痴的想。 | |
| 我和母亲也都有些惘然,于是又提起闰土来。母亲说,那豆腐西施的杨二嫂,自从我家收拾行李以来,本是每日必到的,前天伊在灰堆里,掏出十多个碗碟来,议论之后,便定说是闰土埋着的,他可以在运灰的时候,一齐搬回家里去;杨二嫂发见了这件事,自己很以为功,便拿了那狗气杀(这是我们这里养鸡的器具,木盘上面有着栅栏,内盛食料,鸡可以伸进颈子去啄,狗却不能,只能看着气死,)飞也似的跑了,亏伊装着这么高底的小脚,竟跑得这样快。 | |
| 老屋离我愈远了;故乡的山水也都渐渐远离了我,但我却并不感到怎样的留恋。我只觉得我四面有看不见的高墙,将我隔成孤身,使我非常气闷;那西瓜地上的银项圈的小英雄的影像,我本来十分清楚,现在却忽地模糊了,又使我非常的悲哀。 | |
| 母亲和宏儿都睡着了。 | |
| 我躺着,听船底潺潺的水声,知道我在走我的路,我想:我竟与闰土隔绝到这地步了,但我们的后辈还是一气,宏儿不是正在想念水生么。我希望他们不再像我,又大家隔膜起来……然而我又不愿意他们因为要一气,都如我的辛苦辗转而生活,也不愿意他们都如闰土的辛苦麻木而生活,也不愿意都如别人的辛苦恣睢而生活。他们应该有新的生活,为我们所未经生活过的。 | |
| 我想到希望,忽然害怕起来了。闰土要香炉和烛台的时候,我还暗地里笑他,以为他总是崇拜偶像,什么时候都不忘却。现在我所谓希望,不也是我自己手制的偶像么?只是他的愿望切近,我的愿望茫远罢了。 | |
| 我在朦胧中,眼前展开一片海边碧绿的沙地来,上面深蓝的天空中挂着一轮金黄的圆月。我想:希望是本无所谓有,无所谓无的。这正如地上的路,其实地上本没有路;走的人多了,也便成了路。 | |
| (一九二一年一月。) | |
| 【风筝】 | |
| 北京的冬季,地上还有积雪,灰黑色的秃树枝丫叉于晴朗的天空中,而远处有一二风筝浮动,在我是一种惊异和悲哀。 | |
| 故乡的风筝时节,是春二月,倘听到沙沙的风轮声,仰头便能看见一个淡墨色的蟹风筝或嫩蓝色的蜈蚣风筝。还有寂寞的瓦片风筝,没有风轮,又放得很低,伶仃地显出憔悴可怜模样。但此时地上的杨柳已经发芽,早的山桃也多吐蕾,和孩子们的天上的点缀相照应,打成一片春日的温和。我现在在那里呢?四面都还是严冬的肃杀,而久经诀别的故乡的久经逝去的春天,却就在这天空中荡漾了。 | |
| 但我是向来不爱放风筝的,不但不爱,并且嫌恶他,因为我以为这是没出息孩子所做的玩艺。和我相反的是我的小兄弟,他那时大概十岁内外罢,多病,瘦得不堪,然而最喜欢风筝,自己买不起,我又不许放,他只得张着小嘴,呆看着空中出神,有时至于小半日,远处的蟹风筝突然落下来了,他惊呼;两个瓦片风筝的缠绕解开了,他高兴得跳跃,他的这些,在我看来都是笑柄,可鄙的。 | |
| 有一天,我忽然想起,似乎多日不很看见他了,但记得曾见他在后园拾枯竹。我恍然大悟似的,便跑向少有人去的一间堆积杂物的小屋去,推开门,果然就在尘封的什物堆中发见了他。他向着大方凳,坐在小凳上;便很惊惶地站了起来,失了色瑟缩着,大方凳旁靠着一个胡蝶风筝的竹骨,还没有糊上纸,凳上是一对做眼睛用的小风轮,正用红纸条装饰着,将要完工了。我在破获秘密的满足中,又很愤怒他的瞒了我的眼睛,这样苦心孤诣地来偷做没出息孩子的玩艺。我即刻伸手折断了胡蝶的一支翅骨,又将风轮掷在地下,踏扁了。论长幼,论力气,他是都敌不过我的,我当然得到完全的胜利,于是傲然走出,留他绝望地站在小屋里。后来他怎样,我不知道,也没有留心。 | |
| 然而我的惩罚终于轮到了,在我们离别得很久之后,我已经是中年,我不幸偶而看了一本外国的讲论儿童的书,才知道游戏是儿童最正当的行为,玩具是儿童的天使,于是二十年来毫不忆及的幼小时候对于精神的虐杀的这一幕,忽地在眼前展开,而我的心也仿佛同时变了铅块,很重很重的堕下去了。 | |
| 但心又不竟堕下去而至于断绝,他只是很重很重地堕着,堕着。 | |
| 我也知道补过的方法的:送他风筝,赞成他放,劝他放,我和他一同放。我们嚷着,跑着,笑着。——然而他其时已经和我一样,早已有了胡子了。 | |
| 我也知道还有一个补过的方法的:去讨他的宽恕,等他说,“我可是毫不怪你呵。”那么,我的心一定就轻松了,这确是一个可行的方法。有一回,我们会面的时候,是脸上都已添刻了许多“生”的辛苦的条纹,而我的心很沉重,我们渐渐谈起儿时的旧事来,我便叙述到这一节,自说少年时代的胡涂。“我可是毫不怪你呵。”我想,他要说了,我即刻便受了宽恕,我的心从此也宽松了罢。 | |
| “有过这样的事么?”他惊异地笑着说,就像旁听着别人的故事一样。他什么也不记得了。 | |
| 全然忘却,毫无怨恨,又有什么宽恕之可言呢?无怨的恕,说谎罢了。 | |
| 我还能希求什么呢?我的心只得沉重着。 | |
| 现在,故乡的春天又在这异地的空中了,既给我久经逝去的儿时的回忆,而一并也带着无可把握的悲哀。我倒不如躲到肃杀的严冬中去罢,——但是,四面又明明是严冬,正给我非常的寒威和冷气。 | |
| (一九二五年一月二十四日。) | |
| 【一九二二年】 | |